ज़ीरो का आविष्कार किसने किया था। Who Invented the Zero

शून्य की खोज किसने की थी ? ( Who discovered zero ? ) आज हम हमारी इस post के माध्यम से हमारी इस लोकप्रिय website पर आपको बताएंगे की शून्य की खोज किसने की थी ? शून्य के खोजकर्ता का नाम आज हम इस हमारी post में जानेंगे ही एवं साथ ही साथ हम हमारी post शून्य की खोज किसने की थी ?मैं शून्य की खोज करने वाले व्यक्ति के बारे में भी बहुत सी जानकारियां प्राप्त करेंगे तो दोस्तों इस post को आखरी तक पढ़ना ना भूलें ।

zero ka aviskar kisne kiya tha

गणित के इतिहास की सबसे बड़ी खोज शून्य (“0”, Zero) के आविष्कार के विषय में काफी मतभेद था। सबसे पहली बार किस सभ्यता में और किस देश में शून्य का उपायोग हुआ और किस लिए हुआ यह विवाद का विषय था। विश्व में यह माना जाता था कि सबसे पहले भारतीय गणितज्ञ आर्यभट्ट ने शून्य का प्रयोग किया था। लेकिन हाल ही में भारत में प्राप्त हुए बख्शाली पाण्डुलिपि (Bakhshali manuscript) में अंकित शून्य के निशान की कार्बन डेटिंग ने यह सिद्ध कर दिया है कि सबसे पहले गणित में शून्य का उपयोग आर्यभट्ट से भी 500 साल पहले हिंदुओं ने ही किया था। बख्शाली पाण्डुलिपि भोजपत्र पर शारदा लिपि में लिखी गयी है जो 1881 में पेशावर के पास एक गांव की खुदाई में निकली थी। इस पाण्डुलिपि में 70 भोजपत्र हैं जो की विशेषज्ञों के अनुसार व्यापारियों के लिए किसी प्रकार की गणित की ट्रेनिंग मैनुअल थी।

शून्य (Zero) का सबसे पुराना लिखिल प्रमाण

1902 से ब्रिटेन की जिस बोडलीयन लाइब्रेरी में यह Manuscript रखी गयी थी वहाँ के अनुसंधानकर्ताओं का मानना था कि ये लगभग सातवीं या आठवीं सदी की हैं। लेकिन सबसे आश्चर्य की बात यह है कि वैज्ञानिकों द्वारा की गयी रेडियो कार्बन डेटिंग (Radiocarbon dating) में इस पाण्डुलिपि का समय तीसरी या चौथी सदी (3rd or 4th century) निकल कर आया है जो कि इस Manuscript का  पहले कि तुलना में लगभग 500 साल और प्राचीन होना प्रमाणित करता है।

दुनिया भर के गणितज्ञों के विचार में आर्यभट्ट पहले व्यक्ति थे जिंहोने सबसे पहले गणित में शून्य का व्यापक प्रयोग किया था। लेकिन बख्शाली पाण्डुलिपि में अंकित सैकड़ों शून्य के चिन्हों ने इसके अस्तित्व को और अधिक प्राचीन कर दिया है।

ज़ीरो का उपयोग

भारतीय खगोलविद और गणितज्ञ ब्रह्मगुप्त ने सबसे पहली बार 628 AD में अपनी पुस्तक ब्रह्मस्फुटसिद्धान्त में ज़ीरो और उसके प्रयोग को पारिभाषित किया है। इस पुस्तक में ब्रह्मगुप्त ने शून्य के लिए एक विशेष प्रतीक का उपयोग किया है।  गणित का उपयोग करने के बावजूद प्राचीन यूनानियों के पास शून्य के लिए कोई प्रतीक नहीं था। बेबीलोन के लोगों ने ज़ीरो का उपयोग placeholder के रूप में किया था। शून्य का एक Mathematical Concept के रूप में भारत में विकसित होना, भारतीय दार्शनिक और सांस्कृतिक परंपरा में शून्य और अनंत के विषय में अनुमानों से प्रभावित हुआ है।

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