चाणक्य कौन था ? who was the Chanakya

Evergreen ग्रंथ अर्थशास्त्र के रचयिता को दुनिया अलग-अलग नामों से जानती है । कोई इन्हे चंद्रगुप्त के गुरु  के रूप में जानता है । तो कोई उन्हें चंद्रगुप्त के साथ मौर्य साम्राज्य का स्थापक मानता है । कोई उन्हें उनकी  बुद्धि की वजह से कौटिल्य कहता है तो कोई उन्हें चड़क  के पुत्र चाणक्य के रूप में जानता है । इन सब नामों में उनका असली नाम हमेशा गुम हो जाता है। आप में से बहुत से लोगों को यह पता नहीं होगा कि चाणक्य का नाम विष्णुगुप्त था ।

ऐसा माना जाता है कि चाणक्य का जन्म 350 ईसा पूर्व में हुआ एवं उनकी मृत्यु 283 ईसा पूर्व में हुई । चाणक्य के पिता तत्कालीन पाटिल पुत्र के सबसे प्रसिद्ध शिक्षकों में से एक थे । उनका नाम था चड़क । वह शिक्षा का महत्व समझते थे इसीलिए उन्होंने अपने पुत्र विष्णु गुप्त को तत्कालीन भारत की सबसे बेहतरीन University तक्षशिला भेजा । जहां विष्णुगुप्त ने शिक्षा प्राप्त की । शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात विष्णुगुप्त तक्षशिला में ही आने वाले छात्रों को पढ़ाने लगे । इन्हीं में से एक छात्र था चंद्रगुप्त ।

chankya kaun tha

इस विषय में इतिहासकारों के मध्य में मतभेद है कि चंद्रगुप्त पहले से ही तक्षशिला में छात्र था या फिर विष्णुगुप्त उसे अपने साथ लेकर आए थे । गुरु शिष्य की यह जोड़ी  आने वाले समय में भारत का भविष्य लिखने वाली थी । अब जब आपने यह जान लिया कि ,चाणक्य कौन था ?  तो आगे बढ़ते हैं और आपको बताते हैं कि चाणक्य के जीवन में शिक्षक से  आधुनिक भारत के निर्माता बनने तक का सफर कैसे तय हुआ ।

Alexander का आक्रमण और भारतीय शासकों में एकता की कमी

इतिहासकारों का मानना है कि जब Alexander  ने भारत पर आक्रमण किया तो  सभी भारतीय राजाओं ने  पोरस  का साथ देने की  जगह  उसे Alexander   से अकेले लड़ने के लिए छोड़ दिया । विष्णु गुप्त इस बात से अत्यंत विचलित थे । इसके लिए उन्होंने एक प्रण लिया कि वे भारत को एक दिन इतना मजबूत बना देंगे कि इस पर कोई और विदेशी आक्रांता नहीं आएगा । इसके लिए वे विभिन्न राजाओं के पास गए और उनसे  इस बात का निवेदन किया कि वे सब इकट्ठे होकर विदेशी आक्रांताओं का सामना करें  । परंतु सभी राजाओं से वे निराश हुए फिर वे अपने गृह नगर  पाटलिपुत्र लौटे और तत्कालीन नंद वंश के राजा धनानंद से एलेग्जेंडर का सामना करने  का निवेदन किया । ऐसा माना जाता है कि धनानंद ने ना सिर्फ ऐसा करने से मना कर दिया बल्कि उन्होंने चाणक्य का अपमान भी किया । तभी  चाणक्य ने इस बात का निर्णय लिया कि इन  राजाओं में कभी एकता नहीं हो सकती इसीलिए उन्हें ही ऐसा साम्राज्य खड़ा करना होगा जो ना सिर्फ पूरे भारत को एक कर सके , बल्कि विदेशी आक्रांता से  इसकी सुरक्षा भी कर सके ।  ऐसे साम्राज्य के नेतृत्व के लिए चाणक्य ने चंद्रगुप्त को चुना ।

मौर्य साम्राज्य का गठन

आचार्य चाणक्य ने चंद्रगुप्त के नेतृत्व में एक सेना बनाई, एक ऐसी सेना जिसका कोई राज्य नहीं था । फिर उन्होंने तत्कालीन नंद साम्राज्य के आसपास के राजाओं  के साथ मिलकर नंद साम्राज्य पर हमला किया  और विजय प्राप्त की । परंतु उन्होंने अन्य राजाओं को पाटिल पुत्र के अंदर नहीं आने दिया और ऐसा  करके उन्होंने चंद्रगुप्त को नंद साम्राज्य का एकलौता उत्तराधिकारी बना दिया । फिर कुछ दिनों बाद पाटलिपुत्र की सीमा के बाहर खड़े राजाओं को खदेड़ दिया गया और इस तरह नंद साम्राज्य का हमेशा हमेशा के लिए अंत हो गया और  मौर्य साम्राज्य का उदय हो गया ।

चाणक्य और अर्थशास्त्र

चाणक्य को एक बेहतरीन रणनीतिकार होने के साथ ही साथ एक बेहतरीन Philosopher के रूप में भी जाना  जाता है । जब एक बार मौर्य साम्राज्य का गठन हो गया तो चाणक्य को यह समझ में आया कि चंद्रगुप्त या उसके बाद आने वाला कोई भी राजा धनानंद के जैसा  विलासी  न  हो जाए इससे बचने के लिए उन्होंने किसी ऐसे ग्रंथ की रचना करनी चाही जो राजा एवं जनता को उनके कर्तव्यों से अवगत कराएं और एक कानून की तरह कार्य करें । यह सब ध्यान में रखते हुए उन्होंने जिस ग्रंथ की रचना की उसे आप अर्थशास्त्र के नाम से जानते हैं । हमें उम्मीद है चाणक्य अथवा विष्णुगुप्त के विषय में आपको सभी प्रश्नों के उत्तर मिल गए होंगे । ऐसी ही अन्य रोचक जानकारियों के लिए हमारे साथ बने रहे ।

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