नरेंद्र मोदी की जाति क्या है। Caste Of Narendra Modi

नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री है। वे भारत के 14वे तथा स्वतंत्र भारत में जन्मे पहले प्रधानमंत्री है। मोदी अपने द्वारा किए गए विकास कार्यों के कारण “विकास पुरूष” कहे जाते हैं। मोदी वर्तमान समय में सबसे प्रसिद्ध राजनेता है, इन्हें “नमो” नाम से भी जाना जाता है। नरेंद्र मोदी (2001 – 2014) 4 बार गुजरात के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, वे भारतीय जनता पार्टी तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य है।

narendra modi ki jaati kya hai

नरेंद्र मोदी जी की जाति के बारे में जानकारी

इनका पूरा नाम” नरेंद्र दामोदर दास मोदी” है। आज हम नरेंद्र मोदी की जाति “मोदी” के बिषय में जानेंगे मोदी एक उपनाम है। इस उपनाम के नामकरण के लिए विद्वानों ने यह तथ्य दिया है, कि भारत में पीढ़ी-दर-पीढ़ी एक ही व्यवसाय में लगे रहने के कारण परम्परागत व्यवसाय ही जातियों में बदल गए थे। इसी प्रकार मोदी जाति का नामकरण प्राचीन काल में मोठ बेचने के व्यवसाय के कारण हुआ होगा। उनका मानना है, कि प्राचीन काल में जब मानव जाति जंगलो में निवास करती थी, तब वह पेड़ पौधे और जीव जंतु के मांस आदि पर आश्रित थी। धीरे-धीरे मानव जाति का विकास हुआ और खेती करना आरंभ किया। धीरे-धीरे उन्होंने गांव बसाए। गांव में रहने वाले लोगों को खाद्य पदार्थों की आवश्यकता पड़ती होगी। जिसके कारण कुछ लोग वन से जरूरत की वस्तुएं लाकर गांव वालों को बेचने लगे। कुछ लोगों के लिए यह व्यवसाय बन गया और यही व्यापार करने वाले लोग बनिए कहलाए होगे। और इनकी उपजातियां भी इसी तरह बनी होगी। जैसे बांस बेचने वाले – बंसल, मधु वाला मुद्गल तथा वन से लाकर मोठ बेचने वाले मोठी या धीरे-धीरे मोदी कहलाने लगे होगे। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि “मोदी” बनिया जाति की उपजाति है।

गुजरात के बड़नगर में जन्मे नरेंद्र मोदी मोढ-घांची समाज से है। यह समाज परंपरागत रूप से पीढ़ी दर पीढ़ी वनस्पति तेल निकालने और बेचने का काम करता रहा है। भारत के अन्य राज्यों में इस जाति को साहू या तेली नाम से भी जाना जाता है। जो कि बनिया जाति के अंतर्गत आती है। मोढ -घांची समाज पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में शामिल है।

मोढ़-घांची जाति का नाम OBC में दर्ज होने को लेकर कांग्रेस ने यह आरोप लगाया था कि मोदी ने सत्ता में आने के बाद अपनी जाति को OBC में शामिल करा लिया है। इस आरोप के जबाब में राज्य सरकार प्रवक्ता नितिन पटेल ने अपने बयान में कहा कि – गुजरात सरकार के सामाजिक कल्याण विभाग ने 25 जुलाई 1994 को एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसके अंतर्गत 36 जातियों को पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल किया गया, इनमें से एक मोढ़-घांची जाति भी है।

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