किस देश के साथ न्यू मूर द्वीप के कारण भारत का विवाद है ?

एक देश का दूसरे देशों, खास कर अपने पड़ोसी मुल्कों से किसी न किसी बात को ले कर विवाद होता ही रहता है। इसी तरह एशियाई देशों का भी आपस में विवाद का इतिहास रहा है। एशियाई देशों में देखें तो भारत, पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश इत्यादि का विवाद शुरू से ही रहा है। इन विवादों का मुख्य कारण सीमा ही बना है। यह विवाद जलीय सीमाओं को भी ले कर रहा है।

new moor dweep ka bhart ke saath vivad

इसी तरह का एक विवाद भारत का अपने एक पड़ोसी मुल्क के साथ रहा था। यह विवाद एक द्वीप को ले कर हुआ था। जिस द्वीप को ले कर भारत का विवाद हुआ था, वह था 70 के दशक में एक प्राकृतिक घटना के उपरांत बंगाल की खाड़ी में प्रकट होने वाला न्यू मूर द्वीप। इस प्रश्न का उत्तर जानने से पहले संक्षेप में न्यू मूर द्वीप के बारे में बता देते हैं।

  • न्यू मूर द्वीप

संक्षेप में न्यू मूर द्वीप के बारे में बता दें कि 1970 बंगाल की खाड़ी से एक बहुत ही भयंकर तूफान शुरू हुआ। यह तूफान इतना भयानक था कि पाकिस्तान तथा भारत के West Bengal को अपने चपेट में लेते हुए एक अनुमान के  मुताबिक 5 लाख लोगों को मौत की नींद सुला गया।  यह द्वीप बंगाल की खाड़ी में गंगा – ब्रह्मपुत्र नदी के डेल्टा क्षेत्रों के तटीय क्षेत्र में मौजूद था। यह बंगाल की खाड़ी में ऐसे छोर पर था जिस पर भारत तथा बंगलादेश दोनो अपना दावा करते थे। यह विवाद लंबे समय तक चला।

  • न्यू मूर द्वीप को ले कर भारत का विवाद इसके पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश के साथ विवाद था।

न्यू मूर द्वीप को South Talpatti के नाम से भी जाना जाता था। इसके अस्तिव में आने के बाद भारत तथा बांग्लादेश दोनो अपना दावा करने लगें।  समय के साथ यह विवाद बढ़ता गया। यह द्वीप अस्तित्व में आने के बाद भी बिल्कुल वीरान ही रहा था यहां कोई आबादी कभी नही बसी क्यों कि यहां हर साल बाढ़ आ जाती थी। इस द्वीप पर  कोई जन जीवन न होने के बाद भी इस द्वीप पर दोनो देशों का दावा था। इस दावे के महत्वपूर्ण कारण थे।

  • न्यू मूर द्वीप को लेकर भारत – बंगलादेश के बीच विवाद का कारण

इस द्वीप को ले कर विवाद का बड़ा कारण यह था कि इसके अस्तित्व में आने के बाद ही इस बात की संभावना जताई गई थी कि यह द्वीप प्राकृतिक संपदा से भरा हुआ है। ऐसी संभावना जताई गई थी कि इस द्वीप पर तेल तथा प्राकृतिक गैस के श्रोत मौजूद हैं। इन कारणों को छोड़ भी दे तो विवाद का कारण दोनो देशों की  संप्रभुता से भी जुड़ा हुआ था।

  • विवाद का निपटारा

दोनो देशों के बीच इस द्वीप को ले कर विवाद बढ़ा तो भारत ने 1981 में यानी इस द्वीप के अस्तित्व में आने के 11वें साल में यहां भारतीय तिरंगा लहराते हुए इस पर कब्ज़ा कर लिया तथा अस्थायी रूप से Border Security Force ( BSF ) की चौकी भी बना दी। इसके बाद भी विवाद नही थमा। भारतीय कब्जे को अवैध बताते हुए बांग्लादेश ने इसका विरोध किया।

यह मामला विश्व के देशों के सीमा विवाद को देखने वाले न्यायालय ( Permanent Court of Arbitration ) के समक्ष चला गया। यहां न्यायालय का फैसला 7 जुलाई 2014 को आया जो कि बंगलादेश के पक्ष में गया। यानी कि इस द्वीप को बांग्लादेश का हिस्सा बताया गया। हालांकि जब तक इस पर फैसला आया, उससे पहले ही 2010 में यह द्वीप एक बार फिर समुन्द्र में समा गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक समुद्री जल स्तर बढ़ने के कारण न्यू मूर द्वीप समुद्र में समा गया।

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