भारत के सभी प्रधानमंत्री की सूची 2019 और सामान्य जानकारी।

bharat ke pradhan mantri ki soochi

श्री नरेंद्र मोदी (वर्तमान प्रधानमंत्री )

जवाहरलाल नेहरू – JAWAHARLAL NEHRU –

(जन्म 14 नवम्बर 1889 प्रयागराज –निधन 27 मई 1964 नई दिल्ली) – भारत के प्रथम और सबसे अधिक समय तक (17 वर्ष) प्रधानमंत्री के पद पर बने रहने वाले शीर्ष काँग्रेस नेता और भारतीय स्वतन्त्रता सेनानी जवाहरलाल नेहरू कश्मीरी ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते थे और भारत की आजादी से पहले असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, किसान सभा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने वाले शीर्ष नेताओं में शामिल थे। “हिन्दू-चीनी भाई भाई” का नारा देने वाले, संविधान सभा की Union Powers Committee और Union Constitution Committee के अध्यक्ष, 13 दिसम्बर 1946 को ऐतिहासिक Objectives Resolution पेश करने वाले (जिसे आधार बनाकर  संविधान की प्रस्तावना लिखी गयी है) जिसे 22 जनवरी 1947 के दिन संविधान सभा ने ग्रहण किया, Discovery of India और विश्व इतिहास की झलकियाँ तथा एक आत्मकथा: टूवर्ड फ्रीडम जैसी पुस्तकों के लेखक जवाहरलाल नेहरू बहुमुखी प्रतिभा के व्यक्ति थे। 1955 में भारत रत्न से सम्मानित नेहरू को स्वतन्त्रता संग्राम के दिनों में कई बार जेल भी जाना पड़ा था। 11 बार Noble Peace Prize (शांति के नोबल पुरस्कार) के लिए नामांकित और Non-Aligned Movement के संस्थापकों में से एक, जवाहरलाल का निधन हार्ट अटैक के कारण हुआ था। नई दिल्ली में उनका समाधि-स्थल शांतिवन है।

जवाहरलाल नेहरू :- Quick Facts

  • Father – मोतीलाल नेहरू
  • Mother – स्वरूपरानी नेहरू
  • Sister – विजया पंडित
  • Children – इन्दिरा गांधी
  • Wife – कमला नेहरू 
  • Profession – वकील, राजनेता
  • Political Party – काँग्रेस

गुलज़ारी लाल नन्दा (कार्यवाहक) –                                                                                                      

( जन्म 4 जुलाई 1898-मृत्यु 15 जनवरी 1998) – दो बार भारत के कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले श्री गुलज़ारीलाल नन्दा जी एक अर्थशास्त्री भी थे। गुर्जर परिवार में सियालकोट में जन्मे नन्दा जी ने अपनी शिक्षा लाहौर, आगरा और फिर इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पूरी की और 1921 में नेशनल कॉलेज (बॉम्बे) में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर बने। महात्मा गांधी से प्रभावित नन्दा जी ने स्वतन्त्रता आंदोलन में भाग लिया और जेल गए। काँग्रेस पार्टी की ओर से बंबई(1937) से विधानसभा जीते और 1946-50 में बंबई के श्रम मंत्री बने। केंद्र में नेहरू की सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्री पदों पर कार्य किया। 27 मई 1964 को नेहरू जी की मृत्यु के बाद वे पहली बार 13 दिन के लिए कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने। इसी प्रकार लालबहादुर शास्त्री जी की मृत्यु पर उन्हे 11 जनवरी, 1966 को फिर से 13 दिनों के लिए यह पद दिया गया।

श्री लाल बहादुर शास्त्री

(जन्म 2 अक्टूबर, 1904 मुगलसराय-मृत्यु 11 जनवरी 1966 ताशकंद) :- (पिता शारदा प्रसाद श्रीवास्तव और माता श्रीमति रामदुलारी देवी)- भारत के प्रधान मंत्री (1964-66), काशी विद्यापीठ से शिक्षा ग्रहण करने वाले शास्त्री जी महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित थे और स्वतन्त्रता संघर्ष में भाग लेकर काँग्रेस पार्टी के उत्तर प्रदेश के शीर्ष नेता बने। शास्त्री जी के पिता का उनके बचपन में ही निधन हो गया था जिसके कारण उन्हे गरीबी का सामना करना पड़ा। 1927 में उनका विवाह ललिता देवी के साथ हुआ और भारत की आजादी के बाद उत्तर प्रदेश के गृह मंत्री बने। 1951 के बाद केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की ज़िम्मेदारी संभाली जिनमें रेल मंत्री; परिवहन और संचार मंत्री; वाणिज्य और उद्योग मंत्री; तथा ग्रह मंत्री के पद शामिल हैं। 1952, 1957 और 1962 के आम चुनावों में काँग्रेस को मिली जीत में शास्त्री जी का अहम योगदान था। नेहरू के 1964 में निधन के बाद लाल बहादुर शास्त्री 9 जून 1964 को प्रधानमंत्री बने और 1965 में हुए भारत पाकिस्तान युद्ध में सफलतापूर्वक देश का नेतृत्व किया। “जय जवान जय किसान” का प्रसिद्ध नारा देने वाले लाल बहादुर शास्त्री जी का 11 जनवरी 1966 को ताशकंद (उज्बेकिस्तान) में निधन हुआ।

श्रीमति इन्दिरा गांधी

(जन्म19 नवंबर 1917 इलाहाबाद-मृत्यु 31 अक्टूबर, 1984 नई दिल्ली) कमला नेहरू और जवाहरलाल नेहरू की एकमात्र संतान इन्दिरा प्रियदर्शिनी गांधी की शिक्षा देश विदेश के कई महत्वपूर्ण संस्थानों से हुई थी। 1936 में इनकी माता का निधन हुआ और जवाहरलाल नेहरू के स्वतन्त्रता आंदोलन में भाग लेने और देश-प्रेम का इन पर भी प्रभाव पड़ा। इन्दिरा गांधी ने 26 मार्च, 1942 को एक पारसी वकील फिरोज गांधी से शादी की। Indira और Feroz को दो सन्तानें संजय और राजीव गांधी हुईं। अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलनों में भाग लेने के कारण इन्दिरा गांधी को Quit India Movement में सितंबर 1942 में जेल में डाल दिया गया किन्तु वे बिना प्रभावित हुए राष्ट्र के प्रति Freedom Struggle में भाग लेती रहीं।  इन्दिरा गांधी 1955 में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की सदस्य बनी और चार वर्षों के बाद वे इसकी अध्यक्ष भी बनीं।  भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रेसिडेंट के पद पर भी उन्हे 1959 में कार्य करने का मौका मिला। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के पद पर वो दोबारा जनवरी 1978  में चुनी गईं। केंद्र सरकार में 1964 से लेकर 1966 तक  इन्दिरा गांधी सूचना और प्रसारण मंत्री थीं। लाल बहादुर शास्त्री के असमय निधन के बाद इन्दिरा गांधी 24 जनवरी 1966 को पहली बार भारत की प्रधानमंत्री बनीं।  प्रधानमंत्री के रूप में उनका यह कार्यकाल जनवरी 1966 से मार्च 1977 तक चला। इसके बाद लोक सभा चुनाव जीतकर वो फिर 14 जनवरी, 1980 से प्रधानमंत्री बनी किन्तु 31 अक्टूबर, 1984 के दिन इन्दिरा गांधी की हत्या उनके विश्वसनीय अंगरक्षक द्वारा कर दी गयी। ये हत्या इन्दिरा गांधी द्वारा स्वर्ण मंदिर में की गयी कार्यवाही का बदला लेने के लिए की गयी थी। इन्दिरा गांधी ने 1971 में Bangladesh को आजाद कराने में अहम भूमिका निभाई तथा उनके कार्यकाल में ही 1976 का संविधान संसोधन तथा इमरजेंसी-Emergency  भी लागू की गयी थी।

श्री मोरारजी देसाई

मोरारजी रणछोड़जी देसाई (जन्म 29 फरवरी 1896 भदेली, गुजरात प्रांत-मृत्यु 10 अप्रैल, 1995, मुंबई) पहली गैर काँग्रेसी सरकार के प्रधानमंत्री तथा भारत रत्न और निसान-ए-पाकिस्तान, दोनों से सम्मानित एकमात्र भारतीय। गुजराती अनविल ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने वाले देसाई जी के पिता अध्यापक थे जिंहोने बचपन से ही उन्हे अनुशासन का महत्व समझा दिया था। 1918 में विल्सन कॉलेज से स्नातक की शिक्षा पूरी करने के बाद देसाई जी ने अगले 12 वर्षों तक डिप्टी कलेक्टर के रूप में कार्य किया। श्री देसाई का विवाह गुजराबेन के साथ 1911 में सम्पन्न हुआ था जिससे उन्हे 5 सन्तानें हुईं। भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में शामिल होने के लिए उन्होने ब्रिटिश सेवा का त्याग कर दिया और 1931 में All India Congress Committee के सदस्य बने। श्री देसाई 1937 तक गुजरात प्रदेश Congress Committee के सचिव के पद पर भी थे। 1952 में बंबई प्रांत के मुख्यमंत्री बने। 14 नवम्बर 1956 को उन्हे केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल कर के केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री का पद दे दिया गया। इसके अलावा केंद्रीय मंत्रिमंडल में उन्हे भारत के वित्त मंत्री के रूप में भी 22 मार्च 1958 को शामिल किया गया।

पहले Administrative Reforms Commission के अध्यक्ष और 1967 में इन्दिरा गांधी की सरकार में डेप्युटी प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के पद पर काम करने वाले देसाई जी से जब इन्दिरा गांधी ने उनकी सहमति के बिना वित्त विभाग वापस ले लिया तो देसाई जी ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। 1975 के आपातकाल में गिरफ्तार हुए देसाई जी को आम चुनावों से पहले 18 जनवरी, 1977 के दिन रिहा किया गया। मोरारजी देसाई जी के नेतृत्व में मार्च 1977 के लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी की जीत हुई और वे 24 मार्च, 1977 को भारत के प्रधानमंत्री बने। किन्तु गठबंधन की सरकार अधिक दिनों तक नहीं चली और 1979 में मोरारजी देसाई को प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बास्द वे मुंबई चले गए और 99 वर्ष की आयु में 1995 में उनका निधन हुआ।

श्री चरण सिंह

(जन्म 23 दिसंबर 1902 मेरठ-मृत्यु 29 मई 1987 नई दिल्ली) प्रधानमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल 28 जुलाई 1979 से 14 जनवरी 1980 तक था। मध्यवर्गीय जाट परिवार से आने वाले चौधरी चरण सिंह जी किसानों के प्रति अत्यधिक सहानुभूति रखते थे। 1923 में विज्ञान में स्नातक, 1925 में आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट-ग्रेजुएशन और वकालत की शिक्षा लेने के बाद चरण सिंह गाज़ियाबाद में वकालत (Law) की प्रैक्टिस करने लगे।

भारत के स्वतन्त्रता संघर्ष के प्रति गहरा लगाव होने के कारण काँग्रेस के सदस्य बने और महात्मा गाँधी के विचारों से प्रभावित थे। चरण सिंह का विवाह गायत्री देवी से हुआ था। चौधरी चरण सिंह की 6 सन्तानें हुईं जिनमें अजित सिंह भी एक हैं। पहली बार 1937 में उत्तर प्रदेश के छपरौली-बागपत से विधान सभा निर्वाचित होने के बाद वे वे लगातार 1946, 1952, 1962 और 1967 इसी सीट से चुने जाते रहे। जून 1951 में पहली बार कैबिनेट मंत्री बने और न्याय और सूचना विभाग के मंत्री के रूप में कार्य किया। सीधी-साधी और Simple जीवनशैली जीने वाले चौधरी चरण सिंह दिखावे से दूर रहते थे। वे 1960 में श्री सी बी गुप्ता के मंत्रालय में गृह और कृषि मंत्री, 1962-63 में श्रीमती सुचेता कृपलानी सरकार में कृषि और वन मंत्री, इत्यादि के पदों पर थे। 1अप्रैल, 1967 को उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ी तथा 1969 में काँग्रेस के विभाजन के बाद चरण सिंह फरवरी 1970 में दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री बने। पहली बार उत्तर प्रदेश में गैर-कॉंग्रेसी सरकार चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व में ही 1967 में बनी थी। चरण सिंह मोरारजी देसाई की सरकार में 1977-78 में गृह मंत्री तथा 1979 में उपप्रधानमंत्री के पद पर कार्यरत थे।उन्होने देसाई जी की सरकार में वित्त मंत्री का पद भी संभाला था।

जुलाई 1979 में जनता पार्टी की सरकार गिर जाने के बाद चौधरी चरण सिंह इन्दिरा गांधी के समर्थन से भारत के प्रधानमंत्री बने। किन्तु शीघ्र ही इन्दिरा गांधी ने अपना समर्थन वापस ले लिया और चरण सिंह की सरकार भी गिर गयी। चरण सिंह का निधन 29 मई 1987 में राजधानी दिल्ली में हुआ।

श्री राजीव गांधी –

(जन्म 20 अगस्त 1944 मुंबई- मृत्यु-21 मई 1991 ) 40 वर्ष की उम्र में भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने राजीव गांधी भारत के पहले प्रधानमंत्री श्री Jawaharlal Nehru के Grandson( नाती) और श्रीमती इन्दिरा गांधी के पुत्र थे।  फिरोज गांधी और इन्दिरा गांधी के पुत्र तथा संजय गांधी के बड़े भाई राजीव गांधी की शिक्षा देहरादून के आवासीय दून स्कूल और कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज तथा लंदन के इंपीरियल कॉलेज से हुई थी। उन्होने 1965 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग का कोर्स किया था। कमर्शियल पायलट लाइसेंस प्राप्त करने के बाद कुछ समय तक 1968 में इंडियन एयरलाइंस के पायलट के रूप में काम भी किया।

संगीत और हवाई जहाज़ उड़ाने के शौकीन राजीव गांधी राजनीति से दूर रहना चाहते थे किन्तु 23 जून 1980 को एक हवाई जहाज़ दुर्घटना में संजय गांधी की मृत्यु के बाद इन्दिरा गांधी के आग्रह पर वे राजनीति में आए। राजीव गांधी का सोनिया मेनो से विवाह 1968 में नई दिल्ली में सम्पन्न हुआ।  विवाह के पश्चात राजीव गांधी और सोनिया गांधी को दो सन्तानें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी हुई। जून 1981 में अमेठी लोक सभा से पहली बार निर्वाचित हुए और 31 अक्टूबर, 1984 को राजीव गांधी की माँ और प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी की हत्या कर दी गयी। इस दुखद, तनावपूर्ण और तल्ख हालात में देश के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी समझते हुए राजीव गांधी ने 31 अक्टूबर, 1984 के ही दिन भारत के प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के पदों को स्वीकार किया। दिसम्बर लोक सभा चुनावों में काँग्रेस को मिली जीत के बाद वे प्रधानमंत्री बने रहे। उन्होने भारत में Information Technology, तकनीकी कौशल और वैज्ञानिक दूरदर्शिता के प्रसार के लिए कार्य किया। November 1989 लोक सभा चुनावों में मिली हार के कारण राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि वे काँग्रेस के अध्यक्ष बने रहे। तमिलनाडु के श्रीपेरुमबुदुर में चुनाव प्रचार के लिए गए राजीव गांधी की हत्या 21 मई 1991 के दिन श्रीलंकाई अलगाववादी समूह लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम से संबंध रखने वाली एक महिला धनु द्वारा बम विस्फोट से कर दी गयी। राजीव गांधी की समाधि वीर भूमि है। 1991 में इन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह –

(जन्म 25 जून, 1931 इलाहाबाद-मृत्यु 27 नवम्बर 2008 नई दिल्ली) कार्यकाल : 2 दिसंबर, 1989 – 10 नवंबर, 1990 V. P. Singh- विश्वनाथ प्रताप सिंह के पिता राजा भगवती प्रसाद सिंह थे। मांडा रियासत के राजा (शासक) राजा बहादुर राम गोपाल सिंह ने 1936 में श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह को गोंद लिया था। इसी मांडा रियासत में वे बाद में शासक भी बने। श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह का विवाह 25 जून, 1955 के दिन सीता कुमारी के साथ सम्पन्न हुआ था। उनके दो पुत्र श्री अभय सिंह और अजय सिंह हैं।

देहरादून के कर्नल ब्राउन कैम्ब्रिज स्कूल, Allahabad और Pune (पूना) Universities से शिक्षा प्राप्त करने वाले विश्वनाथ प्रताप सिंह के पास वकालत की भी डिग्री थी। अपने मित्रों के बीच राजा साहब के नाम से मशहूर V. P. Singh ने 1957 में भूदान आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया और इलाहाबाद जिले में स्थित पसना गाँव में अपनी कुछ भूमि स्वेच्छा से दान कर दी। सामाजिक रूप से संवेदनशील और गरीबों के प्रति Sympathy रखने वाले श्री वी॰ पी॰ सिंह ने Allahabad के कोरांव में Gopal School, इंटरमीडिएट कॉलेज की स्थापना भी की थी। 1969 में, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के सदस्य बने और 1971 में पहली बार संसद बने। 1980-82 में वे उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री भी रहे। वे राजीव गांधी की सरकार में वित्त मंत्री के पद पर भी रहे जिस पर रहते हुए उन्होने  भारत की प्रमुख industrial और व्यापारिक कंपनियों पर tax fraud के संदेह के चलते छापे (Raids) भी मरवाये। राजीव गांधी ने उनसे वित्त मंत्रालय का पदभार लेकर रक्षा मंत्री बना दिया किन्तु विश्वनाथ प्रताप सिंह ने भारत में Defence Purchases की जांच शुरू की जिसमें बोफोर्स (Bofors) रक्षा सौदे भी शामिल थे। बोफोर्स सौदे के ऊपर कोई कार्यवाही होने से पहले ही विश्वनाथ प्रताप सिंह जी को केंद्रीय मंत्रिमंडल और Defence Minister के पद से बर्खास्त कर दिया गया। इस घटना के बाद श्री V. P. Singh ने राजीव गांधी से दूरी बना ली तथा Congress पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसी समय लोक सभा में Member of Parliament के रूप में अपनी सदस्यता से भी उन्होने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होने जन मोर्च नाम की पार्टी बनाई जो बाद में जनता पार्टी बनी।

नवंबर 1989 के चुनावों में जनता दल की सरकार बनी और 2 दिसंबर 1989 के दिन वे भारत के प्रधानमंत्री बने। किन्तु गढ़बंधन में फूट पड़ने के कारण 10 नवम्बर 1990 को वे प्रधानमंत्री के पद से हट गए। 27 नवम्बर 2008 को नई दिल्ली में विश्वनाथ प्रताप सिंह का निधन हुआ।

श्री चन्द्रशेखर –

(जन्म 1 जुलाई 1927 बलिया-मृत्यु 8 जुलाई, 2007 नई दिल्ली) आचार्या Narendr Dev (नरेंद्र देव) के करीबी और Young Turk के नाम से मशहूर चन्द्र शेखर Janata Party से संबंध रखने वाले समाजवादी विचारधारा के व्यक्ति थे। केंद्र सरकार या किसी भी राज्य सरकार में कोई भी मंत्री बने बिना ही सीधे प्रधानमंत्री बनने वाले पहले व्यक्ति थे। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले चंद्रशेखर सिंह का झुकाव राजनीति में बहुत पहले ही हो गया था। उन्होने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से 1950 में Political Science विषय में post graduation की शिक्षा पूरी की और 1962 में चंद्र शेखर को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा में सांसद के रूप में चयन किया गया। शुरुआती दिनों में सोशलिस्ट पार्टी से जुड़े चंद्रशेखर इस पार्टी के विभाजन के बाद काँग्रेस में आ गए। 1969 में दिल्ली में  Young Indian (“यंग इंडियन “) नाम के एक Weekly (साप्ताहिक पत्र) का प्रकाशन किया तथा उसके Editor (संपादक) के रूप चन्द्रशेखर जी ने अपनी राय रखी।

इन्दिरा गांधी से मतभेदों के चलते उन्हे June, 1975 में आपातकाल के दौरान जेल भेज दिया गया। चंद्रशेखर ने V. P. Singh के इस्तीफे के बाद 10 नवम्बर 1990 के दिन भारत के नौवें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली जिसमें काँग्रेस ने समर्थन दिया था। किन्तु काँग्रेस के समर्थन वापस लेने के बाद उनकी सरकार गिर गयी। वे 21 जून 1991 तक प्रधानमंत्री के पद पर थे।

श्री पी॰ वी॰ नरसिम्हा राव –                                                                                                                

(जन्म 28 जून, 1921 करीमनगर, तेलंगाना-मृत्यु 23 डींबर 2004 नई दिल्ली) पामुलपर्ति वेंकट नरसिम्हा राव या पी॰ वी॰ नरसिम्हा राव साहित्य में विशेष रुचि रखते थे। उन्होने 1991 के आर्थिक सुधारों को लागू करने तथा भारतीय अर्थव्यवस्था के Liberalization (उदारीकरण) और लाईसैन्स राज को खत्म करने में अहम भूमिका निभाई। उनकी शिक्षा Pune के Fergusson College (फर्ग्यूसन कॉलेज) और Bombay (अब मुंबई) और Nagpur के विश्वविद्यालयों में हुई थी। नरसिम्हा राव को कई Languages (भाषाओं) का ज्ञान था तथा काकातीय नामक एक तेलुगु Weekly (साप्ताहिक पत्रिका) का संपादन भी  किया। आंध्रा प्रदेश से 1957 में में पहली बार विधायक बने और सितंबर 1971-जनवरी 1973 के बीच आंध्र प्रदेश के मुख्य मंत्री बने रहे।

राजनीति में Indira Gandhi के सहयोगी और supporter माने जाने वाले नरसिम्हा राव ने इन्दिरा गांधी और राजीव गांधी दोनों की सरकारों में कई Important मंत्री पद प्राप्त किए जिनमें विदेश मंत्री (1980-84, 1988) -89), गृह मंत्री (19 जुलाई, 1984 से 31 दिसंबर, 1984) और रक्षा मंत्री (31 दिसंबर, 1984 से 25 सितंबर, 1985 तक) के पद महत्वपूर्ण हैं। राजीव गांधी की बम धमाकों में हत्या के कारण काँग्रेस पार्टी को सम्हालने के लिए वापस राजनीति में आए और  21 जून, 1991 को भारत के प्रधानमंत्री बने। नरसिम्हा राव ने प्रधानमंत्री के रूप में 5 साल का कार्यकाल पूरा कर के 16 मई, 1996 को इस पद से विदा हुए।

श्री एच॰ डी॰ देवेगौड़ा –                                                                                                              

(जन्म 18 मई, 1933 हासन, कर्नाटक) किसानी परिवार से ताल्लुक रखने वाले हरदनहल्ली डोड्डेगौड़ा देवेगौड़ा जी की माता देवम्मा और पिता श्री डोड्डे गौड़ा थे। वे वर्तमान में Janata Dal (जनता दल (सेकुलर)) पार्टी के National President भी हैं। इसके अलावा देवेगौड़ा जी Karnataka की Hassan (हासन) लोकसभा संसदीय सीट से 2014 में चुने गए थे। उनका विवाह श्रीमती चेनम्मा से हुआ जिनसे उन्हें 4 Sons और 2 Daughters की प्राप्ति हुई।

सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने वाले देवेगौड़ा जी बचपन से ही किसानों और पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए कुछ करना चाहते थे। 1962 में काँग्रेस से अलग होने के बाद वे स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में 1962 में कर्नाटक विधानसभा की होलेनारसीपुरा विधानसभा सीट से चुने गए और वहाँ से लगातार 6 बार 1962 से 1989 तक विधायक के पद पर बने रहे। 1994 में हुए कर्नाटक के विधानसभा के चुनावों के बाद 11 दिसंबर, 1994 को उन्होंने कर्नाटक के 14 वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इस पद पर वे 1996 तक बने रहे। 30 मई, 1996 को कर्नाटक के मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देकर वे 1 जून 1996 को भारत के प्रधानमंत्री बने। उनकी गठबंधन की सरकार एक साल से भी कम समय में गिर गयी। वे 21 अप्रैल 1997 तक भारत के प्रधानमंत्री बने रहे।

श्री इंदर कुमार गुजराल –

(जन्म-4 दिसंबर 1919 झेलम-अविभाजित पंजाब, अब पाकिस्तान में-मृत्यु 30 नवम्बर 2012 गुरुग्राम) स्वतन्त्रता सेनानी और भारत के प्रधानमंत्री इंदर कुमार गुजराल जी गुजराल सिद्धांत या Gujral Doctrine नाम की विदेश नीति के लिए जाने जाते हैं। श्री गुजराल राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के Writer और टिप्पणीकार होने के साथ साथ Theatre (रंगमंच) जैसी विधाओं के लिए भी लिखते थे। इंदर कुमार गुजराल का Urdu (उर्दू) के प्रति काफी लगाव था जिसके चलते वे Urdu Poetry और कविताओं में भी रुचि लेते थे। उन्होंने Lahore के DAV College (डीएवी कॉलेज), Hailey College of Commerce (हैली कॉलेज ऑफ कॉमर्स) और Forman Christian College University (फॉर्मान क्रिश्चियन कॉलेज) से अपनी शिक्षा पूरी की थी। श्री गुजराल ने बी.कॉम, एम.ए., और पीएच.डी. जैसी उच्च उपाधियाँ प्राप्त की थीं। 26 मई, 1945 को श्री इंदर कुमार गुजराल का विवाह श्रीमती शीला गुजराल के साथ हुआ था। उन्होने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया था और भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान वे जेल भी गए थे।

श्री गुजराल ने इन्दिरा गांधी और H. D. Deve Gowda जी की सरकार में मंत्री के रूप में भी कार्य किया था। श्री इंदर कुमार गुजराल ने Foreign Minister, जल संसाधन मंत्री, USSR में भारत के राजदूत, संचार और संसदीय मामलों के मंत्री; सूचना और प्रसारण और संचार मंत्री; Planning Minister; निर्माण और आवास मंत्री इत्यादि मंत्री पदों के साथ-साथ कई अन्य महत्वपूर्ण positions पर कार्य किया था। 21 अप्रैल, 1997 को वे भारत के प्रधानमंत्री बने। उस समय वे राज्य सभा सांसद थे। प्रधानमंत्री के पद पर वे 19 मार्च 1998 तक ही बने रहे।

श्री अटल बिहारी वाजपेयी –                                                                                                         

(जन्म 25 दिसम्बर 1924 ग्वालियर-मृत्यु 16 अगस्त 2018 नई दिल्ली) प्रतिभासम्पन्न कवि, वक्ता, Writer, मार्गदर्शक, Nature Lover, राजनेता और समाजसेवी अटल जी के जीवन से कई पीढ़ियों ने प्रेरणा ली है। वे 3 बार भारत के प्रधानमंत्री के पद पर पहुंचे। किन्तु प्रथम दो बार केवल 13 दिनों और 13 महीनों के लिए ही प्रधानमंत्री के पद पर रह पाए। उनकी माता कृष्णा देवी और पिता श्री कृष्ण बिहारी वाजपेयी थे। उनकी शिक्षा Gwalior के सरस्वती शिशु मंदिर से स्कूली शिक्षा, Victoria College से हिंदी, संस्कृत और English में Graduation तथा कानपुर के डीएवी कॉलेज से राजनीति विज्ञान से एमए के रूप में हुई थी। जीवन भर विवाह नहीं करने वाले अटल जी ने कभी भी काँग्रेस की सदस्यता ग्रहण नहीं की। युवावस्था से ही उनका रुझान भारतीय जन संघ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर था। 1942 के Quit India Movement (भारत छोड़ो आंदोलन) में भाग लेने पर Atal Bihari Vajpayee जी को उनके भाई प्रेम जी के साथ गिरफ्तार कर लिया गया था। British Government ने उन्हे 24 दिनों के बाद रिहा किया।

अटल जी श्यामा प्रसाद मुखर्जी के अनुयायी थे और 1968 में जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में Atal Bihari Vajpayee जी का चयन हुआ। 1957 में वे बलरामपुर से सांसद बने और उनके ओजस्वी वक्तृत्व कौशल और मर्यादित भाषा शैली से Jawaharlal Nehru इतने प्रभावित हुए कि उन्होने भविष्यवाणी की कि Atal Bihari Vajpayee किसी दिन अवश्य भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे। प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए ही अटल बिहारी जी ने Pokharan, Rajasthaan में May 1998 में परमाणु परीक्षण सम्पन्न करवाए थे। उनका पहला कार्यकाल 16 मई, 1996 – 1 जून 1996 था जबकि प्रधानमंत्री के रूप में दूसरा और तीसरा कार्यकाल 19 मार्च, 1998 – 22 मई, 2004 तक चला। 2015 के अंतिम में उन्होने राजनीति से सन्यास ले लिया। उन्हे 2015 में भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार – भारत रत्न, तथा 7 जून 2015 को बांग्लादेश सरकार द्वारा Bangladesh’s Liberation War Honour का सम्मान दिया गया। 93 वर्ष की उम्र में नई दिल्ली में अटल जी का निधन हो गया।

श्री मनमोहन सिंह –

(जन्म-26 सितंबर 1932 अविभाजित पंजाब) उच्च स्तर के अर्थशास्त्री, कुशल राजनेता और विनम्र स्वभाव वाले मनमोहन सिंह जी ने 2009 की आर्थिक मंदी के दौर में भारत की अर्थव्यवस्था को सफलतापूर्वक उसके प्रभाव से दूर रखा। उनके पिता श्री गुरमुख सिंह तथा माता अमृत कौर थीं। किन्तु मनमोहन सिंह जी की माता का निधन उनके बचपन में ही हो गया था। 1947 में भारत के विभाजन के बाद उनका परिवार पाकिस्तान वाले हिस्से को छोड़कर, सीमा पार कर भारत के अमृतसर में बस गया।

डॉ0 सिंह ने 1948 में पंजाब विश्वविद्यालय से मैट्रिक, Economics में 1952 में स्नातक, पंजाब  विश्वविद्यालय से ही अर्थशास्त्र में मास्टर्स, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से उन्होने 1957 में अर्थशास्त्र में प्रथम श्रेणी ऑनर्स, तथा ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के नफ़िल्ड कॉलेज से 1962 में डी0 फिल0 (D. Phil) की डिग्री भी पूरी की। पढ़ाई के बाद उन्होने पंजाब विश्वविद्यालय और फिर दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में Economics के Professor की भूमिका निभाई। कुछ समय तक वे UNCTAD सचिवालय में भी कार्यरत थे। 1976 में Finance Ministry के Secretary के पद पर भी उन्होने कार्य किया है। 21 जून 1991 के दिन मनमोहन सिंह जी ने श्री पी० वी० नरसिम्हा राव की सरकार में भारत के वित्त मंत्री के रूप में शपथ ली थी। इस पद पर वे 16 मई 1996 तक बने रहे। वे असम से राज्य सभा सांसद थे। Finance Minister के रूप में श्री मनमोहन सिंह जी ने भारत में परमिट राज को खत्म कर के अर्थव्यवस्था पर Government Regulation (सरकारी नियंत्रण) को कम कर दिया। वे 1991, 1995, 2001, 2007, 2013 में असम राज्य से Rajya Sabha सांसद ( MP) रहे हैं। 22 मई 2004 के दिन वे पहली बार भारत के प्रधानमंत्री बने और मई 2009 में हुए लोक सभा चुनावों में जीत के बाद दोबारा 22 मई 2009 के दिन प्रधानमंत्री के पद की शपथ ली। वे मई 2014 में बीजेपी की सरकार बनने तक इस पद पर बने रहे। 1987 में उन्हे पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।\

श्री नरेंद्र मोदी

(जन्म-17 सितंबर 1950 मेहसाना, गुजरात) बचपन में चाय बेच कर अपने पिता की मदद करने वाले नरेंद्र दामोदरदस मोदी के पिता दामोदर दास मूलचंद मोदी और माता हीराबेन हैं जिनके वे तीसरे पुत्र हैं। उनके चार भाई और एक बहन हैं। 1967 में वडनगर में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, नरेंद्र मोदी ने घर छोड़ दिया और पूरे भारत का भ्रमण किया। मोदी ने अपनी यात्रा के दौरान ऋषिकेश, हिमालय, रामकृष्ण मिशन और पूर्वोत्तर भारत के स्थलों का भ्रमण किया। दो वर्ष बाद घर लौटने पर उन्होने 1971 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रचारक के रूप में अपना जीवन समर्पित कर दिया।

मोदी ने राजनीति विज्ञान में गुजरात विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर किया है और 7 अकटूबर 2001 में पहली बार नरेंद्र मोदी को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया। नरेंद्र मोदी 2001 से लगातार 3 बार 2014 तक गुजरात के मुख्य मंत्री के पद पर बने रहे। गुजरात में उनकी आर्थिक नीतियों और प्रशानिक कुशलता की विश्व भर में प्रशंसा हुई है। नरेंद्र मोदी ने 2014 में वाराणसी और वडोदरा की सीटों से चुनाव लड़ा था। वे दोनों ही सीटों से चुनाव जीतने में सफल हुए। बाद में मोदी ने केवल Varanasi की सीट ही अपने पास रखी।

नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 के दिन भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। उनके द्वारा शुरू किया गया Swachch Bharat Mission (स्वच्छ भारत अभियान) ने साफ-सफाई के विषय में देश भर में एक नई मुहीम चला दी है। जलवायु परिवर्तन से लेकर Ganga नदी की सफाई तक, Narendra Modi ने हर जगह अपनी उपस्थिती दर्ज कराई है।

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