15 अगस्त क्यों मनाया जाता है। 15 August in Hindi

हर वर्ष 15 अगस्त को भारत का स्वतन्त्रता दिवस मनाया जाता है। यह एक ऐसा त्योहार है जिसका नाम सुनते ही हर भारतीय के मन में देश प्रेम और राष्ट्रीयता की भावनाएँ जागने लगती हैं। 15 अगस्त 1947 को भारत ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के 200 वर्षों की गुलामी से आजाद हुआ था। मित्रों भारत देश इस वर्ष यानि 2019 में अपना 73वां स्वतन्त्रता दिवस मना रहा है। ऐसे में 15 अगस्त को हर साल मनाए जाने वाले देश की आजादी के इस महापर्व के बारे में जानना और इसके महत्व से परिचित होना हर भारतीय का फर्ज है।

आइए आप और हम भारत के स्वतन्त्रता दिवस के बारे में उन सभी महत्वपूर्ण पहलुओं से परिचित होते हैं, जो 15 अगस्त को हमारे लिए खास बनाते हैं। इसके अलावा आप स्वतन्त्रता दिवस से जुड़ी कुछ रोचक और अनसुनी ऐतिहासिक जानकारियों को भी जानेंगे जो इस दिन के साथ जुड़ी हुई हैं।

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15 अगस्त क्यों मनाया जाता है – why independence day is celebrated

दोस्तों! भारत का नागरिक होने के नाते सबसे पहला प्रश्न यही उठता है कि आखिर 15 अगस्त का पर्व क्यों मनाया जाता है? हर साल देश के प्रधानमंत्री दिल्ली में लाल किले पर राष्ट्रीय झण्डा यानि तिरंगा क्यों फहराते हैं? यह इसलिए है क्योंकि भारत देश 15 अगस्त 1947 के दिन 200 वर्षों से अधिक के ब्रिटिश शासन की गुलामी से आजाद हुआ था। हाँ दोस्तों ! भारत पहले अंग्रेजों का गुलाम था जिन्होने इस देश पर 200 वर्षों से अधिक समय तक राज किया था। फ्रेंच, पुर्तगालियों और अन्य यूरोपीय शक्तियों की तरह ही ब्रिटिश भी पहले भारत में व्यापार के लिए ही आए थे।

1765 में तत्कालीन मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय द्वारा बंगाल के प्रांतों ( बंगाल, बिहार और ओडिशा) के दीवानी अधिकारों को ईस्ट इंडिया कंपनी को दिये जाने से लेकर 1858 में इंग्लैंड की महारानी द्वारा भारत सरकार अधिनियम 1858 से भारत के शासन को सीधे अपने अधीन किए जाने तक, भारत पूरी तरह ब्रिटिश शासन की गुलामी में कैद हो गया था।

किन्तु 1857 में हुए भारत के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम के बाद से ही देश में राष्ट्रीयता की भावनाएँ जन्म लेने लगीं थी। 1857 से लेकर 1947 तक हजारों भारतीय स्वतन्त्रता सेनानियों ने देश को विदेशी शासन से मुक्त कराने का सपना देखा था। देश के करोड़ों लोगों के अथक प्रयास और हजारों लोगों की कुर्बानी के कारण ही 1947 में देश को आजादी मिली थी। भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस पार्टी से जुड़े नेताओं जैसे कि महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, जवाहरलाल नेहरू, बाल गंगाधर तिलक, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सरोजिनी नायडू, गोपाल कृष्ण गोखले, राममनोहर लोहिया और सुरेन्द्रनाथ बनर्जी इत्यादि दे देश के लोगों को आजादी के लिए प्ररित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वहीं दूसरी ओर काँग्रेस से बाहर के लोग जैसे कि सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव, वीर सावरकर, आचार्य कृपलानी, और असंख्य अन्य स्वतन्त्रता सेनानी और कार्यकर्ताओं ने अपने जीवन को भारत को विदेशी दासता से मुक्त कराने में झोंक दिया था।

हर साल भारत के नागरिक 15 अगस्त को देश के उन्ही वीर स्वतन्त्रता सेनानियों को याद करने और उनके बलिदान से प्रेरणा लेकर एक नए विकसित देश का निर्माण करने के लिए यह राष्ट्रीय पर्व मनाते हैं। भारत पर आधिकारिक रूप से ब्रिटिश शासन का अंत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के द्वारा हुआ था। 3 जून 1947 को माउंटबेटन योजना के तहत भारत का बंटवारा किया गया था। इस योजना को लागू करने के लिए भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 को ब्रिटिश संसद ने 5 जुलाई 1947 को पास किया था जिसे 18 जुलाई 1947 को इंग्लैंड की महारानी से अंतिम स्वीकृति मिली थी। लेकिन इस अधिनियम ने भारत को दो अलग-अलग देशों में बाँट दिया था। माउंटबेटन योजना के तहत ही ब्रिटिश भारत के दो टुकड़े कर के भारत से अलग पाकिस्तान देश का गठन हुआ था।

14-15 अगस्त 1947 की रात में ही भारत की संसद में पहली बार देश के पहले प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू ने अपना प्रसिद्ध Tryst With Destiny भाषण दिया था। देश की आजादी का दिन होने और एक स्वतंत्र, संप्रभु, गणतंत्रात्मक देश के रूप में भारत के निर्माण के कारण ही हर साल 15 अगस्त का दिन भारत में स्वतन्त्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन से भारत ने एक राष्ट्र के रूप में विकास की नई ऊंचाइयों को छूना शुरू किया है। 2019 में देश के 73वें स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर भारत एक विश्व शक्ति बन चुका है। दुनिया का सबसे बड़ा लोकतन्त्र होने के गौरव के साथ भारत एक शांतिपूर्ण देश के रूप में जाना जाता है। भारत में सभी धर्मों के लोग रहते हैं और यहाँ सर्व धर्म समन्वय की भावना विद्यमान है।

भारत के लिए 15 अगस्त का महत्व क्या है

भारत का स्वतंत्रता दिवस, जो हर साल 15 अगस्त को पूरे देश में बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है, भारत के सभी पर्वों में एक विशेष स्थान रखता है। इसके महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस दिन ना सिर्फ 15 अगस्त 1947 को भारत ने दासता और ग़ुलामी की जंजीरों को तोड़कर अँग्रेजी हुकूमत के आजादी प्राप्त की थी बल्कि यह वो दिन भी है जब एक राष्ट्र के रूप में भारत देश का उदय हुआ था। आजादी से पहले तक भारत देश ब्रिटिश शासन के अधीन कई रियासतों और प्रान्तों में बंटा था। देश में एक समान नागरिकता का कोई अर्थ नहीं था। एक राष्ट्र के नागरिक होने का गौरव भी जनता को प्राप्त नहीं था। इतना ही नहीं विदेशों में भी भारतीयों को एक गुलाम देश का नागरिक होने की अपमान सहना पड़ता था।

विदेशी देश के गुलाम होने के कारण भारत की अपनी सभ्यता और संस्कृति का ह्रास हो रहा था। इनके संरक्षण और प्रचार-प्रसार के स्थान पर विदेशी संस्कृति को भारत के जनमानस पर थोपा जा रहा था। प्राचीन भारतीय सभ्यता के अस्तित्व पर ही प्रश्न चिन्ह लगा दिया गया था। ब्रिटेन समेत दूसरे यूरोप के देश यह मानने को तैयार नहीं थे कि प्राचीन यूनान, मिश्र और रोम जैसी सभ्यताओं के अलावा दुनिया में कहीं दूसरी जगह भी कोई श्रेष्ठ सभ्यता ने विकास किया था। यह सब इसलिए था क्योंकि तथाकथित अंग्रेजों की विदेशी शिक्षा ने भारत के नागरिकों को भी वही शिक्षा लेने पर मजबूर किया जो अंग्रेजों के स्वार्थ को सिद्ध कर सके।

कोई भी राष्ट्र जब गुलामी से आजाद होता है तो उसे केवल राजनैतिक रूप से आजादी नहीं मिलती है बल्कि उस देश की संस्कृति को भी आजादी मिलती है। किसी भी समाज में कला, संस्कृति अध्यात्म, चिंतन, शिक्षा, नीति, विज्ञान, इत्यादि के विकास के लिए एक स्वतंत्र, शांत और भयमुक्त वातावरण की आवश्यकता होती है। इसलिए 15 अगस्त 1947 को भारत की आजादी के साथ ही भारत की आत्मा को भी दोबारा से मुक्त वातावरण में सांस लेने की आजादी मिली। यह वही दिन है जब हजारों वर्षों से स्थापित भारतीय संस्कृति ने दोबारा देश के नागरिकों को अपने ऊपर गर्व करने का अवसर प्रदान किया था। हम भारतीय हैं-यह कहने में दोबारा से सम्मान के साथ सर ऊंचा करने के लिए 15 अगस्त के इसी दिन ने हमें मौका दिया है।

15 अगस्त का महत्व भारत देश की संस्कृति का हिस्सा बन चुका है और भविष्य में भी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा। 15 अगस्त का दिन भारत में सार्वजनिक अवकाश (Public Holiday) होता है।

15 अगस्त को लाल किले पर क्या कार्यक्रम होते हैं : लाल किले पर होने वाला स्वतन्त्रता दिवस समारोह

भारत के ऐतिहासिक लाल किले पर हर साल 15 अगस्त को तिरंगा झण्डा देश के प्रधानमंत्री द्वारा फहराया जाता है। इस दिन, राष्ट्रीय पर्व के रूप में सरकार लाल किले का ध्वजारोहण समारोह आयोजित करती है। लाल किले के आयोजन के मुख्य अतिथि भारत के प्रधानमंत्री होते हैं। लाल किले के इस समारोह की शुरुआत भारत के राष्ट्र गान और 21-गन शॉट्स की सलामी से होती है। 15 अगस्त पर भारत के राष्ट्रपति राष्ट्र के नाम सम्बोधन भी करते हैं। लाल किले के आयोजन में सबसे महत्वपूर्ण होता है भारत के प्रधानमंत्री द्वारा दिया अजाने वाला भाषण। इस भाषण में वे भारतीय आंदोलन के नेताओं को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ देश की उपलब्धियों और भविष्य के लक्ष्यों पर प्रकाश भी डालते हैं। वे देश में भविष्य की नीति की रूपरेखा के ऊपर चर्चा भी करते हैं।

इस दिन देश में सभी संस्थान, बैंक, भवन और कार्यालय बंद रहते हैं।

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 (Indian Independence Act of 1947)

भारत की स्वतन्त्रता से संबंधती कोई भी चर्चा भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 का जिक्र किए बगैर अधूरी है। इसी अधिनियम ने आधिकारिक रूप से 15 अगस्त 1947 के दिन भारत से अँग्रेजी शासन को समाप्त किया था।

  • भारत सरकार अधिनियम, 1947 भारत में दो स्वतंत्र डोमिनियन स्थापित करने के लिए एक अधिनियम था जिसे 18 जुलाई 1947 के दिन ब्रिटिश संसद ने पास किया था।
  • इस अधिनियम ने दो नए स्वतंत्र प्रभुत्व सम्पन्न देश बनाए; भारत और पाकिस्तान।
  • पाकिस्तान फिर पाकिस्तान और पूर्वी पाकिस्तान में विभाजित हो गया जो अब बांग्लादेश है।
  • इस अधिनियन के प्रावधानों के अंतर्गत बंगाल और पंजाब प्रांतों का विभाजन दोनों देशों के बीच हुआ था।
  • इस अधिनियम के द्वारा ‘भारत के सम्राट’ के उपयोग को ब्रिटिश क्राउन के शीर्षक के रूप में समाप्त कर दिया था।
  • भारत में मौजूद रियासतों के साथ सभी मौजूदा संधियों को भी समाप्त कर दिया गया ।
  • इसके लागू होने के कुछ समय बाद तक लॉर्ड माउंटबेटन गवर्नर-जनरल के रूप में बने रहे और जवाहरलाल नेहरू को भारत का पहला प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया।
  • मुहम्मद अली जिन्ना पाकिस्तान के गवर्नर-जनरल और लियाकत अली खान पाकिस्तान के पहले प्रधान मंत्री बने।
  • इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार दोनों देशों की संविधान सभा को देश के संविधान बनाने के लिए पूरा अधिकार दिया गया था।
  • देश में प्रशासनिक अधिकारियों की स्थिति वैसी ही बनी रही। उनकी स्थिति में बदलाव भारत के संविधान के लागू होने के बाद आया था।
  • 15 अगस्त 1947 की सुबह जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में भारत में नई कैबिनेट ने शपथ ली थी।

हम उम्मीद करते हैं आपको यह पता चला गया होगा कि 15 अगस्त क्या है और इस दिन को स्वतंत्रता दिवस के रूप में क्यों मनाया जाता है। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ और social media पर भी share करें ताकि अन्य लोगों को भी यह जानकारी  स्वतंत्रता दिवस क्या है इसे क्यों celebrate जाता है की जानकारी मिल सके। धन्यवाद।

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