₹ 50 के नोट पर किसके हस्ताक्षर होते हैं ?

₹50 के नोट पर आरबीआई अथवा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं ।  वर्तमान में जारी किए जाने वाले ₹50 के नोट की चौड़ाई 135 मिलीमीटर, एवं लंबाई  66 मिली मीटर है ।  वर्तमान ₹50 के नोट को पहली बार 2017 में जारी किया गया था । अब जब आपने यह जान लिया कि ₹50 के नोट पर किसके हस्ताक्षर होते हैं? तो इस नोट को जारी करने वाली संस्था अर्थात रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के विषय में कुछ समझ लेते हैं ।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना 1935 में हुई थी। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि शुरुआती दिनों में यह संस्था एक निजी संस्था थी, यही नहीं इस संस्था के शुरुआती गवर्नर भारतीय मूल के भी नहीं थे। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का राष्ट्रीयकरण 1949 में किया गया । आरबीआई  के लिए आर्थिक वर्ष 1 जुलाई से 30 जून तक का होता है।

50 ke note par kiske sign hote hain

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया केवल नोट छापता है सिक्कों  जारी करने की जिम्मेदारी भारतीय सरकार की होती है। आरबीआई की मुख्य दो जिम्मेदारियां होती हैं पहला देश की  आर्थिक वृद्धि दर को बनाए रखना एवं दूसरा महंगाई को नियंत्रण में रखना।  इन दोनों जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए रिजर्व बैंक के पास तीन हथियार होते हैं पहला रेपो रेट, दूसरा रिवर्स रेपो रेट, तीसरा  कैश रिजर्व रेश्यो ।

अगर रिजर्व बैंक को लगता है कि महंगाई बढ़ रही है तो रिजर्व बैंक अपनी  रेपो रेट एवं रिवर्स रेपो रेट में बढ़ोतरी कर देता है और अगर इससे भी बात नहीं बनी तो कैश रिजर्व रेश्यो को बढ़ा देता हैं ऐसा करने से मार्केट में लिक्विडिटी कम हो जाती है और चीजों के दाम कम होने लगते हैं। अगर आरबीआई को यह लगता है कि आर्थिक दर में कमी आ रही है तो इसको तेज करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया रेपो रेट रिवर्स रेपो रेट में कमी करता है और अगर इससे बात नहीं बनती तो कैश रिजर्व रेश्यो में भी कमी करता है और ऐसा करने से मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ जाती है और आर्थिक वृद्धि दर तेज होने के आसार बन जाते हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया  के गवर्नर का यही कर्तव्य होता है कि वह महंगाई बढ़ने ना दे ठीक उसी समय आर्थिक वृद्धि दर कम ना होने दें।

इन दोनों के बीच में समन्वय बनाना अत्यंत ही कठिन कार्य है इसीलिए आरबीआई के गवर्नर को भारत सरकार की अन्य संस्थाओं से ज्यादा आजादी प्राप्त है, आरबीआई का गवर्नर निश्चित समय के लिए आता है उसके बीच में  उसे हटाया  नहीं जाता है । वर्तमान में आरबीआई गवर्नर का कार्यकाल 3 वर्षों का होता है ।

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