दुनिया के सात अजूबों के नाम क्या है ? 7 wonder name in Hindi

सबसे पहली बात तो आप यह जान लीजिए कि दुनिया में ऐसी कोई आधिकारिक सूची नहीं है जो दुनिया के सात अजूबों के नाम बताएं। अलग-अलग संस्थाओं  के RECORD  में अलग-अलग सात अजूबे हैं। यही नहीं दुनिया की बहुत सारी सूचियां अलग अलग अजूबों के नाम से बनी हुई है। कोई सूची आपको  मध्यकालीन दुनिया के अजूबे बताएगी।

कोई सूची आपको प्राचीन दुनिया के अजूबे बताएगी। किसी सूची का नाम है आधुनिक दुनिया के सात अजूबे।  किसी  सूची का नाम है प्राकृतिक दुनिया के सात अजूबे। सरल भाषा में हम यह कहना चाह रहे हैं कि आपको सात अजूबे की अलग-अलग सूचियां दुनिया में मिल जाएंगे। इसीलिए आज हम आपके सामने दुनिया के 8 ऐसे  अजूबों  की सूची लेकर आए हैं जो लगभग लगभग सभी सूचियों में शामिल है।

7 wonder name list

7 Wonder of the world

1. ताजमहल : अगर दुनिया के अजूबों की शुरुआत करनी है तो हम अपने घर से ही करते हैं।  भारत का विश्व प्रसिद्ध ताजमहल आज भी दुनिया के लोगों के बीच में कौतूहल का विषय बना हुआ है। ताजमहल का निर्माण 1632 ईस्वी मे पूरा हुआ था।  ताजमहल के विषय में विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आज ताज महल बनाया जाता तो इसे बनाने के लिए लगभग 827 मिलियन डॉलर लगते अगर भारतीय रुपए मे इसे बदला जाए तो लगभग 6000 करोड रुपए की कीमत से यह ताजमहल बना था। UNESCO के अनुसार ताजमहल World Heritage site है।

ताजमहल की खूबसूरती का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि इसे देखने प्रतिवर्ष लगभग 8,000,000 लोग भारत आते हैं। ताजमहल के विषय में इतिहासकारों का मानना है कि यह ताजमहल तत्कालीन बादशाह शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज महल के मरने के पश्चात उनकी याद में बनाया था।  जब शाहजहां के बेटे औरंगजेब ने उसे सत्ता से बेदखल किया और जेल में डाल दिया तब भी शाहजहां को एक ऐसा कमरा दिया गया जिसकी खिड़की से वह ताज महल देख सकता था।

2. चाइना की महान दीवार : दुनिया में सात अजूबों की ऐसी कोई भी सूची नहीं है जिसमें चाइना की दीवार ना हो , इसे पूरी दुनिया The Great Wall of China के नाम से जानती है।  ग्रेट वॉल ऑफ चाइना की आधिकारिक लंबाई है 21,196 किलोमीटर। वैसे तो इस दीवार को बनाने में चाइना के विभिन्न साम्राज्य ने अपना योगदान दिया परंतु इस दीवार को सबसे ज्यादा बनाने का श्रेय जाता है मिंग  साम्राज्य को ।

इतिहासकारों के अनुसार मिंग साम्राज्य ने महान दीवार का लगभग 9000 किलोमीटर का हिस्सा बनाया है। इस दीवार की औसत ऊंचाई लगभग 8 मीटर के आसपास है।  विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इस दीवार के लगभग एक तिहाई हिस्से का अब कोई वजूद नहीं बचा है याने कि आप जो दीवार देखते हैं वह दीवार मूल रूप से बनाई गई दीवार से छोटी है। इसको इसके पुराने वैभव में लौटाने के लिए 1957 से इस दीवार के टूटे हुए हिस्सों  को फिर से बनाने का काम शुरू हुआ ।

3. माचू पिचू : पेरू का माचू पिचू दुनिया के लाखों लोगों को अपनी ओर प्रतिवर्ष आकर्षित करता है।  माचू पिचू भी लगभग सभी अजूबों   की सूची में अपनी जगह बनाया हुआ है।  विशेषज्ञों का मानना है कि इसका निर्माण इंका साम्राज्य के दौरान हुआ था। इंका साम्राज्य भी तत्कालीन दुनिया के आधुनिक साम्राज्य माया की तरह अत्यंत आधुनिक साम्राज्य था।

ऐसा माना जाता है कि इसका निर्माण 1450 ईसवी के आसपास किया गया होगा। जब स्पेनिश अंपायर ने यहां पर हमला करके इस जगह को अपने कब्जे में ले लिया उसके बाद से माचू पिचू नाम के शहर को छोड़ दिया गया और यह शहर तब तक दुनिया के लिए अनजान बना रहा जब तक कि कुछ अमेरिकी  पुरातत्वविदों ने फिर से इस शहर को ढूंढ नहीं निकाला ।

4. Christ the Redeemer अथवा क्राइस्ट द रिडीमर : क्राइस्ट द रिडीमर ब्राजील की राजधानी रेडियो दी जिनेरो में उपस्थित है। यह भी लगभग सात अजूबों की सभी सूचियों में शामिल है।  इसका निर्माण किसी ब्राजीली व्यक्ति ने नहीं बल्कि एक फ्रेंच शिल्पकार ने किया था जिसका नाम था पॉल लवंडास्की।  यही नहीं इस मूर्ति का चेहरा बनाने का श्रेय जाता है रोमानियन शिल्पकार गोहेरा लियोनिडा को। इस मूर्ति की लंबाई लगभग 26 फीट है इसकी चौड़ाई लगभग 92 फीट है।  इसका वजन लगभग 635  मीट्रिक टन  के आसपास है। जीसस क्राइस्ट की यह मूर्ति लगभग 2300 फीट की ऊंचाई पर लगाई गई है ।

5. रोम का कोलोसियम : रोम का कोलोसियम लगभग दुनिया की हर सात अजूबों की सूची में शामिल है।  यह कोलोजियम एक तरह का Theater था। जहां पर कभी नाटक खेले जाते थे।  परंतु यह कोलोसियम नाटकों के मुकाबले यहां पर होने वाली  लड़ाईओं के लिए ज्यादा मशहूर हैं।  आपको ग्लैडिएटर नाम की फिल्म तो याद ही होगी ऐसा माना जाता है कि इतिहास में वह लड़ाई भी कोलोसियम के अंदर ही हुई थी। रोम के कोलोजियम के बारे में माना जाता है कि इसका निर्माण 72 ईसवी में शुरू हुआ और 80 ईसवी में खत्म हुआ।

ऐसा माना जाता है कि इसका निर्माण का काम सम्राट वेस्पेशियन ने शुरू करवाया था और जब यह बना  तब तक वह मर चुका था।  यह कितनी बेहतरीन संरचना है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कोलोजियम के अंदर 80 हजार लोगों को बैठाने की व्यवस्था है। आज की आधुनिक दुनिया में भी  कुछ गिने-चुने ही स्टेडियम ऐसे हैं जहां पर 80,000 लोगों के बैठने की व्यवस्था है

6. चिचेन इत्जा : चिचेन इत्जा मैक्सिको के याकटेन  राज्य में उपस्थित है। इसके बारे में कहा जाता है कि यह संरचना तब बनाई गई थी जब मेक्सिको में माया साम्राज्य का कब्जा था। सरल शब्दों में कहा जाए तो यह बेहतरीन एवं अत्यंत आकर्षक संरचना तब  बनाई गई थी जब यूरोपीय लोगों ने उत्तरी एवं दक्षिणी अमेरिका को नहीं ढूंढ निकाला था , अगर और भी सरल शब्दों में कहा जाए तो यह संरचना कोलंबस के अमेरिका को खोजने के पहले की संरचना है। चिचेन इत्जा  शहर के बारे में कहा जाता है कि यह शहर माया साम्राज्य का सबसे महत्वपूर्ण शहर था।

7. पेट्रा : जॉर्डन का पेट्रा भी सात अजूबों की सूची में बहुत महत्वपूर्ण स्थिति में आता है।  पुरातत्व वेदों के अनुसार यह दुनिया के प्राचीन इतिहास को समझने के लिए बहुत महत्वपूर्ण संरचनाओं में से एक है।  कुछ लोग इसे ROSE CITY  के नाम से भी जानते हैं। UNESCO के अनुसार पेट्रा  World Heritage site है।

8. गीजा के पिरामिड : आप सोच रहे होंगे कि सात अजूबों की सूची में आठवां अजूबा कहां से आ गया । हम पहले ही आपको बता चुके हैं कि दुनिया में सात अजूबों की कोई आधिकारिक सूची नहीं है इसीलिए हमने दुनिया के आठ ऐसे अजूबे चुने हैं जो लगभग सारी सूचियों में अपना स्थान बनाए हुए हैं। कभी इनमें से कोई एक अजूबा स्थान नहीं बना पाता तो कोई दूसरा बना लेता है इसीलिए इन आठ अजूबों को अगर आप मिला कर देखेंगे तो दुनिया की लगभग सभी अजूबों की सूची में पाएंगे। 

गीजा का पिरामिड पुरातत्व विदों के अनुसार प्राचीन दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण संरचनाओं में से एक है। इन संरचनाओं के विषय में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इतिहासकारों के अनुसार इनका निर्माण लगभग ईसा पूर्व 3800 वर्ष पहले शुरू हुआ और इनका निर्माण ईसा पूर्व 2560 में खत्म हुआ होगा। आप इनके इतने पुराने होते हुए भी आधुनिक होने के कारण इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि आखिर क्यों पुरातत्व विशेषज्ञ इन के विषय में हमेशा कौतूहल के साथ देखते और बोलते हैं। ऐसा माना जाता है कि आज भी इन पिरामिड के सभी रहस्य को मानव हल नहीं कर पाया है ।

हमें उम्मीद है कि इस लेख ने आपके ज्ञान वर्धन का कार्य किया होगा । ऐसी ही अन्य रोचक जानकारियों के लिए हमारे साथ बने रहे ।

One Response

  1. Rupendra kumar August 4, 2019

Leave a Reply