अलाउद्दीन खिलजी की पत्नी का नाम क्या था । alauddin khilji wife name in hindi

अलाउद्दीन खिलजी दिल्ली सल्तनत के खिलजी वंश का सबसे ताकतवर सुल्तान था। उसके महिलाओं से सम्बन्धों के विषय में कई किस्से मशहूर हैं। लगभग दो दशकों तक दिल्ली सल्तनत पर शासन करने वाले अलाउद्दीन खिलजी ने अपने जीवन में कई बार विवाह किया था। किन्तु अलाउद्दीन खिलजी के केवल चार विवाह और चार पत्नियों के नाम ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित हैं।

अलाउद्दीन खिलजी ( Alauddin Khilji) द्वारा राजस्थान के चित्तोढ़ के राजा रत्नसिंह ( रतनसेन) पर उसकी सुंदर पत्नी पद्मावती ( Padmavati) को जीत कर अपने साथ ले जाने के लिए किए गए आक्रमण का भी उल्लेख है। किन्तु केवल पद्मावती को पाने के लिए चित्तोढ़ पर अलाउद्दीन के आक्रमण के बारे में कोई भी स्पष्ट ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। मालिक मोहम्मद जायसी के अवधि भाषा में लिखे पद्मावत काव्य में पद्मावती का जो उल्लेख है वह केवल एक काल्पनिक उल्लेख माना जाता है। चित्तोढ़ पर अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के बारे में ऐतिहासिक साक्ष्य हैं किन्तु किसी पद्मावती के बारे में कोई प्रमाण नहीं है।

alauddin khilji ki patni ka naam

अलाउद्दीन खिलजी की चार पत्नियों के नाम  (Wives of Alauddin Khilji)

  1. मल्लिका-ए-जहां ( First Wife of Alauddin Khilji)
  2. महरु     
  3. झत्यपाली
  4. कमला देवी

अलाउद्दीन खिलजी की पहली पत्नी : मल्लिका-ए-जहां

अलाउद्दीन खिलजी का प्रथम विवाह अपने चाचा और खिलजी वंश की स्थापना करने वाले जलालुद्दीन फिरोज खिलजी की पुत्री मल्लिका-ए-जहां से हुआ था। हालांकि उसकी पहली पत्नी मलिका-ए-जहां का व्यवहार अलाउद्दीन के प्रति रूखा था। अलाउद्दीन और मल्लिका-ए-जहां का विवाह अलाउद्दीन के सुल्तान बनने से पहले हुआ था । किन्तु कुछ समय बाद ही मल्लिका-ए-जहां  के पिता दिल्ली के सुल्तान बन गए जिसके चलते मल्लिका-ए-जहां के अंदर भी घमंड आ गया और वो अलाउद्दीन को अपने आगे अधिक महत्व नहीं देने लगी। इसी घमंड में मल्लिका-ए-जहां अपने पति अलाउद्दीन पर हावी होने का भी प्रयत्न करती थी।

मलिका-ए-जहां का व्यवहार अलाउद्दीन के प्रति रूखा होने का एक कारण यह भी था कि अलाउद्दीन खिलजी ने अपने चाचा ( जो उसके ससुर और मल्लिका-ए-जहां के पिता भी थे) की ह्त्या कर के दिल्ली सल्तनत की सत्ता हथियाई थी। इतना ही नहीं अलाउद्दीन ने अपनी पहली पत्नी के तीन भाइयों और जलालुद्दीन फिरोज खिलजी के पुत्रों की आँखें निकलवाकर उन्हे अंधा बना दिया था। बाद में जब अलाउद्दीन खिलजी ने महरु नाम की युवती से दूसरा विवाह किया तो उसकी पहली पत्नी और भी चिढ़ गयी। इन्ही घटनाओं के कारण अलाउद्दीन खिलजी और उसकी पहली पत्नी मल्लिका-ए-जहां के बीच संबंध कभी भी अच्छे नहीं हुए।

अलाउद्दीन खिलजी की दूसरी पत्नी: महरु

अपनी पहली शादी से असंतुष्ट होने के कारण अलाउद्दीन खिलजी ने दूसरा विवाह किया था। अलाउद्दीन की दूसरी पत्नी का नाम महरु (Maharu) था। अलाउद्दीन की दूसरी पत्नी महरु मलिक संजर उर्फ ​​अल्प खान ( Alp Khan) की बहन थी। किन्तु मल्लिका-ए-जहां अलाउद्दीन और महरु को एक साथ नहीं देखना चाहती थी। एक घटना के अनुसार अलाउद्दीन और उसकी दूसरी पत्नी महरु एक बार बगीचे में एक साथ बैठे थे। ठीक उसी समय मल्लिका-ए-जहां भी उसी बगीचे में आ गयी और उन दोनों को एक साथ बैठे देखकर गुस्से में आ गयी और महरु पर अपनी जूती से हमला कर दिया। महरु पर हुए आक्रमण को अलाउद्दीन बर्दाश्त नहीं कर सका और उसने अपनी तलवार से मल्लिका-ए-जहां पर हमला कर दिया। मल्लिका-ए-जहां किसी तरह अपनी जान बचा कर भागी किन्तु उसे कुछ चोटें जरूर आई। अलाउद्दीन द्वारा मल्लिका-ए-जहां पर हमले की बात तत्कालीन दिल्ली के सुल्तान और अलाउद्दीन के ससुर जलालुद्दीन तक भी गयी किन्तु उन्होने अलाउद्दीन के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया। 

अलाउद्दीन खिलजी की तीसरी पत्नी: झत्यपाली

अलाउद्दीन ने कारा का गवर्नर रहते हुए 1296 इसवीं में देवगिरि पर सैन्य अभियान का नेतृत्व किया था। इस आक्रमण के बाद देवगिरि ( दक्खन) के शासक रामचन्द्र (या रामदेव) ने अलाउद्दीन के सामने हार मान ली थी और दिल्ली सल्तनत का आधिपत्य स्वीकार कर लिया था। किन्तु 1303-1304 इसवीं में यादव राजा रामचन्द्र ने अलाउद्दीन को दिये जाने वाले नजराने पर रोक लगा दी। इस घटना से क्रोधित हुए अलाउद्दीन ने मलिक कफूर के नेतृत्व में अपनी सेना देवगिरि भेजी जिसके बाद आसानी से देवगिरि की सेना को हराकर उसके शासक रामचन्द्र को बंदी बनाकर अलाउद्दीन के पास दिल्ली ले जाया गया। किन्तु दिल्ली में अलाउद्दीन ने रामचन्द्र के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किया और उसे उसका राज्य वापस लौटा दिया बशर्ते वो दिल्ली सल्तनत की हूकूमत के भीतर रहते हुए शासन करेगा। इसके बाद रामचन्द्र ने अपनी पुत्री झत्यपाली  (Jhatyapali) का विवाह अलाउद्दीन के साथ कर दिया। झत्यपाली को कई साहित्यिक विवरणों में क्षेत्रपाली के नाम से भी जाना जाता है। अलाउद्दीन की इसी पत्नी झत्यपाली ने उसके पुत्र शिहाब-उद-द्दीन उमर को जन्म दिया था। अलाउद्दीन और झत्यपाली का पुत्र शिहाब-उद-द्दीन उमर बाद में अलाउद्दीन का उत्तराधिकारी बना। झत्यपाली का पिता और देवगिरि का शासक रामचन्द्र जीवन भर अलाउद्दीन खिलजी के प्रति वफादार बना रहा और उसने अलाउद्दीन खिलजी के दक्षिण में किए गए कई अभियानों में सहायता भी की। 16वीं शताब्दी के इतिहासकार फ़रिश्ता (मोहम्मद कासिम हिन्दू शाह) के अनुसार अलाउद्दीन की पत्नी झत्यपाली ने अलाउद्दीन की मृत्यु के बाद उसके प्रिय मलिक कफूर से विवाह कर लिया था।

अलाउद्दीन खिलजी की चौथी पत्नी : कमलादेवी

अलाउद्दीन की पत्नी रानी कमला देवी ( Kamaladevi) गुजरात के अंतिम वघेल राजा राय कर्ण की पत्नी थी जिसके साथ अलाउद्दीन ने विवाह किया था। अलाउद्दीन की सेनाओं द्वारा 1299 में राय कर्ण के राज्य पर आक्रमण किए जाने के बाद वह गुजरात से जान बचाकर भाग निकला। हालांकि इस हार के बाद भी वघेल वंश का शासन गुजरात में कुछ क्षेत्रों में जारी था। लेकिन 1304 में अलाउद्दीन द्वारा किए गए दूसरे सैन्य अभियान के बाद पूरी तरह से राय कर्ण की शक्ति का खात्मा हो गया और गुजरात में वघेल वंश के शासन का अंत हो गया। रानी कमलादेवी को अलाउद्दीन के वघेल शासन के ऊपर किए गए पहले आक्रमण के दौरान ही बंदी बना लिया गया था। बंदी बनाए जाने के बाद कर्ण की पत्नी रानी कमला देवी को दिल्ली में अलाउद्दीन के अन्तःपुर में भेज दिया गया। बाद में अलाउद्दीन और कमला देवी का विवाह हुआ और वो अलाउद्दीन की पत्नी बनी। किन्तु अलाउद्दीन के प्रति निष्ठा और अपने सौन्दर्य के कारण जल्द ही रानी कमला देवी ने अलाउद्दीन के हृदय में अपनी जगह बना ली। वघेल वंश पर किए गए अलाउद्दीन के दूसरे आक्रमण के बाद रानी कमला देवी की नवजात पुत्री देवल को भी दिल्ली अलाउद्दीन के पास भेज दिया गया।

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