आर्यभट्ट कौन था । आर्यभट्ट का जीवन परिचय – Aryabhatta in hindi

आर्यभट्ट प्राचीन भारत के विश्व प्रसिद्ध गणितज्ञ एवं  खगोलविद्य  थे , बोलचाल की भाषा में कहा जाए तो आर्यभट्ट प्राचीन भारत के Mathematician एवं astronomer थे । इतिहासकारों के अनुसार उनका जन्म  476 ईसवी में हुआ एवं उनकी मृत्यु 550 ईसवी में हुई । उनके जन्म के स्थान पर इतिहासकारों के आपस में मतभेद हैं कुछ इतिहासकारों का यह मानना है कि उनका जन्म पाटलिपुत्र में हुआ था वहीं कुछ इतिहासकार कहते हैं कि उनका जन्म बिहार के अन्य किसी गांव में हुआ था और बाद में वे पाटलिपुत्र में आकर बसे ।

इस बात पर सभी इतिहासकार सहमत हैं कि उनकी शिक्षा पाटलिपुत्र में ही हुई थी । इतिहासकारों का मानना है कि उनकी शिक्षा नालंदा University में हुई थी । कई इतिहासकार यह भी मानते हैं कि तत्कालीन शासक ने आर्यभट्ट को  नालंदा विश्वविद्यालय का प्रधान अध्यापक भी बनाया था।

aaryabhatt koun tha

आर्यभट्ट एवं उनके कार्य

आर्यभट्ट को खगोल शास्त्र एवं गणित में उनके योगदान के लिए याद किया जाता है । बड़ी संख्या में इतिहासकारों का मानना है कि आर्यभट्ट ने अपने समय में ही यह बता दिया था कि पृथ्वी सूर्य के चक्कर लगाती है यही नहीं उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि पृथ्वी सूर्य के चक्कर लगाने के साथ ही साथ अपनी धुरी पर भी घूमती है जिसके फल स्वरुप दिन एवं रात होते हैं । कई इतिहासकार इस बात का भी दावा करते हैं कि आर्यभट्ट ने अपने समय के दौरान ही नौ ग्रहों की पहचान कर ली थी । जहां तक बात गणित  की है इस विषय में माना जाता है कि आर्यभट्ट के कार्यों से जुड़े ज्यादातर कागजात नष्ट हो चुके हैं ।

फिर भी इस बात के स्पष्ट सबूत मिलते हैं कि उन्होंने पाई के स्पष्ट मूल्य का प्रमाण दिया था । यही नहीं श्रृंखला (Series) का formula भी उन्हीं का योगदान माना जाता है । ऐसा माना जाता है कि उन्होंने Trigonometry, Geometry के क्षेत्र में भी अपना योगदान दिया। चलिए यह तो बात हुई आर्यभट्ट की आर्यभट्ट कौन थे , ऐसी ही अन्य रोचक जानकारियों के लिए हमारे साथ बने ।

इन लोगो के बड़ा में जानिए –

Leave a Reply