अशोक कौन था ? who was the ashoka

अशोक को हिंदुस्तान  अशोक महान के नाम से जानता है वही पाश्चात्य जगत Ashoka The Great  के नाम से जानता है । भारतीय उपमहाद्वीप जिसे जंबू द्वीप भी कहा जाता है में हजारों राजा हुए एवं हजारों साम्राज्य यहां पर है परंतु इतिहासकारों के अनुसार भारत का कोई राजा अशोक के वैभव के नजदीक कभी नहीं पहुंच पाया । अशोक मौर्य वंश के तीसरे राजा थे ।

सबसे पहले आपको यह बता दें कि उनके तीसरे राजा होने पर कुछ विवाद है इस विवाद का कारण यह है कि ऐसा माना जाता है कि मौर्य वंश के तीसरे  राजा उनके बड़े भाई सुसीमा  थे , परंतु ज्यादातर इतिहासकार इस बात से सहमत नहीं है उनका मानना है कि  सुसीमा  कभी भी पूर्ण रूप से मौर्य वंश के राजा नहीं बने । ऐसा क्यों था इस विषय में हम आगे पढ़ेंगे । इतिहासकारों के अनुसार सम्राट अशोक का जन्म  ईसा पूर्व 304 में हुआ । 

ashok kaun tha

इतिहासकारों का मानना है कि उनका जन्म मौर्य वंश के दूसरे शासक बिंदुसार के घर पाटलिपुत्र में हुआ था जो आज पटना के नाम से जाना जाता है । उनकी मृत्यु का समय 232 ईसा पूर्व माना जाता है । चलिए जब आपने इस सवाल का जवाब जान लिया कि अशोक कौन था ? तो  आगे बढ़ते हैं और बताते हैं कि अशोक कैसे सम्राट बना ।

अशोक के सम्राट अशोक बनने की कहानी

अशोक का मौर्य वंश का शासक बनना आसान नहीं था क्योंकि तत्कालीन शासक बिंदुसार ने यह पहले ही घोषित कर दिया था कि उनकी मृत्यु के पश्चात उनके स्थान पर उनके उत्तराधिकारी होंगे उनके बड़े पुत्र सुसीमा परंतु अशोक एवं अशोक के सहयोगी मंत्री ऐसा नहीं मानते थे उनका मानना था कि मौर्य वंश के लिए सबसे उपयुक्त उत्तराधिकारी अशोक ही है ।

बिंदुसार अपनी मृत्यु के पूर्व इस बात को समझते थे कि अशोक मौर्य वंश के शासक बनना चाहते हैं और वे ऐसा नहीं होने देना चाहते थे। इसीलिए उन्होंने अशोक को राजधानी पाटलिपुत्र से दूर उज्जैन भेजने का निर्णय लिया। अशोक को उज्जैन भेजने के पीछे बिंदुसार का यह विचार था कि अशोक ऐसे में राजधानी से दूर रहेंगे और उनके बड़े भाई सुसीमा   को परेशान नहीं करेंगे परंतु अशोक का उज्जैन जाना उनके लिए अभिशाप की जगह वरदान साबित हुआ ।

अशोक जब उज्जैन पहुंचे तो उन्हें पता चला कि उज्जैन एवं इसके आसपास का इलाका अत्यंत ही संपन्न इलाका है । अशोक ने इसका लाभ उठाते हुए इस पूंजी का इस्तेमाल एक बड़ी  सेना बनाने में किया । जब अशोक के पास यह खबर पहुंची कि बिंदुसार बहुत बीमार हैं एवं शीघ्र ही उनकी मृत्यु हो सकती है तो वे अपनी इस बड़ी सेना को लेकर पाटिल पुत्र की ओर चल दिए और इससे पहले कि सुसीमा  वहां पहुंच पाते अशोक ने अपने आपको मौर्य वंश का अगला शासक घोषित कर दिया ।

यह वर्ष था 272 ईसा पूर्व परंतु ज्यादातर इतिहासकार इसको अशोक के शासन की शुरुआत नहीं मानते हैं। ज्यादातर इतिहासकारों का मानना है ,कि अशोक के शासन की शुरुआत 268 ईसा पूर्व में हुई । ऐसा इसलिए था क्योंकि इतिहासकारों के अनुसार 272 ईसा पूर्व से 268 ईसा पूर्व तक अशोक एवं उनके अन्य भाइयों के बीच सत्ता संघर्ष हुआ जो 268 ईसा पूर्व में खत्म हुआ ।

कलिंग का युद्ध एवं हृदय परिवर्तन

सम्राट अशोक को अशोक महान के नाम से  आज जाना जाता है परंतु इतिहासकारों के अनुसार तत्कालीन भारतवर्ष में अशोक को चंड अशोक के नाम से जाना जाता था।  ऐसा इसलिए था क्योंकि सम्राट अशोक को अपने प्रतिद्वंद्वियों को बुरी तरह कुचल देने के लिए जाना जाता था । ऐसा माना जाता है कि मौर्य वंश एवं कलिंग के बीच में एक भयंकर युद्ध हुआ एवं इस युद्ध में जान एवं माल की हानि को देखकर अशोक को बहुत ही ग्लानि महसूस हुई इसके पश्चात उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया और शांति के रास्ते पर चलें ।

परंतु कई इतिहासकार इस बात से सहमत नहीं है कि अशोक का हृदय परिवर्तन हुआ था उनका यह मानना है कि अशोक जब पूरा भारत जीत चुके थे तो उनके लिए जीतने के लिए कुछ बचा नहीं था । ऐसे में चंड अशोक बने रहने का कोई मतलब नहीं था इस स्थिति में जब आपने पूरा राज्य जीत लिया हो तब शांतिपूर्वक राज्य करना ही उचित है अशोक इस बात को समझते थे इसीलिए उन्होंने अपना एक नया अवतार रचा । इसमें उन्होंने शांति से राज किया एवं राज्य की व्यवस्था पर ज्यादा ध्यान दिया ना कि अपने राज्य की सीमा (Boundry) को बढ़ाने में । चलिए यह तो हुई सम्राट अशोक की बात ऐसी ही अन्य रोचक जानकारियों के लिए हमारे साथ बने रहे ।

दोस्तों, आपको यह जानकारी अशोक कौन था पसंद आई या नहीं हमें कमेंट के माध्यम से जरूर बताये और अगर आपके किसी भी तरह के प्रश्न है तो उसके बारे में भी कमेंट में लिख सकते हैं । धन्यवाद ।

Leave a Reply