ATM का आविष्कार किसने किया इसका Full Form क्या होता है।

Automated Teller Machines या एटीएम पिछले 50 वर्षों से भी अधिक समय से लोगों को किसी भी समय अपने बैंक अकाउंट से पैसे निकालने की सुविधा प्रदान कर रहीं हैं। दुनिया के पहले एटीएम का आविष्कार जॉन शेफर्ड-बैरन (John Shepherd-Barron) और उनकी टीम ने 1967 में किया था। लेकिन जॉन शेफर्ड-बैरन द्वारा बनाई गयी यह मशीन आजकल प्रयोग होने वाले प्लास्टिक के ATM कार्ड्स का उपयोग नहीं करती थी। जिस एटीएम पिन और पासवर्ड का इस्तेमाल आधुनिक एटीएम मशीनें करती हैं, वह तकनीक भी जॉन शेफर्ड-बैरोन के द्वारा बनाई गयी मशीन नहीं करती थी। ATM कार्ड के बदले उसमें चेक (cheques) डालने पर पैसा निकलता था। उनकी मशीन एक हल्के रेडियोधर्मी पदार्थ कार्बन -14 से लगे चेक को पढ़ने में सक्षम थी, जिसे एक पिन से जांच और मिलान कर के बैंक के ग्राहक को पैसे दिये जाते थे।

atm ka aviskar kisne aur kab kiya tha

स्कॉटिश माता-पिता के पुत्र जॉन शेफर्ड-बैरोन का जन्म भारत में हुआ था। बाद में वे रॉस-शायर (स्कॉटलैंड में एक जगह ) के पोर्टमहोमैक में रहने लगे थे। वे बैंकनोट निर्माता प्रिंटिंग कंपनी डी ला रू (De La Rue ) के लिए काम करते थे। 1960 के दशक में बैंक सक्रिय रूप से टेलर प्रक्रिया को स्वचालित करने के लिए उपाय और तकनीक ढूंढ रहे थे। ऐसे में जॉन शेफर्ड-बैरोन ने सबसे पहले इस तकनीक की सार्वजनिक रूप से शुरुआत की थी। लेकिन डी ला रू कंपनी ने इसे पैटंट (Patent) नहीं कराया था। धोखा-धड़ी करने वाले कहीं इस तकनीक को जान न जाएँ इसी डर के कारण इस कंपनी ने एटीएम तकनीक को patent नहीं किया। जॉन शेफर्ड-बैरोन का निधन 2010 में हुआ था।

ATM का अविष्कार कब हुआ था ?

2005 में, श्री शेफर्ड-बैरोन को ” automatic cash dispenser के आविष्कारक” के रूप में बैंकिंग सेवाओं के लिए इंग्लैंड की महारानी द्वारा Officer of the Order of the British Empire या OBE के सम्मान ने नवाजा गया था।

लेकिन उस एटीएम मशीन का आविष्कार किसने किया जो आजकल की तरह एटीएम पिन (ATM PIN) और कार्ड का प्रयोग करती थी और जिस तकनीक पर आधुनिक एटीएम मशीनें बनाई जाती हैं?

जेम्स गुडफेलो और पहली एटीएम कार्ड मशीन-इस प्रकार की पहली एटीएम मशीन स्कॉटिश आविष्कारक जेम्स गुडफेलो (James Goodfellow) ने सबसे पहले मई 1966 में बनाकर patent कारवाई थी। उस वक़्त श्री गुडफेलो ग्लासगो की एक कंपनी केल्विन ह्यूजेस के लिए इंजीनियर के रूप में काम करते थे। उनके द्वारा आविष्कार की गईं एटीएम कार्ड रीड कर सकने वाली पहली Chubb-branded (Chubb Ltd. ने इसकी मार्केटिंग की थी) मशीन, 1967 में वेस्टमिंस्टर बैंक (बाद में नैटवेस्ट) में लगाई गईं। जेम्स गुडफेलो द्वारा लगाई गयी एटीएम मशीन, जॉन शेफर्ड-बैरोन की एटीएम मशीन के चालू होने के एक महीने बाद काम करना शुरू कर पाई थी। इसलिए सबसे पहले एटीएम मशीन बनाने और आम जनता के लिए यह सेवा शुरू करने का श्रेय जॉन शेफर्ड-बैरोन को ही दिया जाता है। जेम्स गुडफेलो को यूके पेटेंट नंबर 1,197,183 और प्राथमिकता तिथि 2 मई 1966 के द्वारा अपने आविष्कार के लिए पेटेंट दिया गया था। गुडफेलो द्वारा डिज़ाइन किया गया एटीएम कार्ड आजकल के क्रेडिट कार्ड के आकार का ही था जिसमें केवल 30 बाइट डेटा होता है। उनकी एटीएम मशीन पिन कीपैड के साथ एन्क्रिप्टेड कार्ड को पढ़ सकने में सक्षम थी।

गुडफेलो ने जिस एटीएम कार्ड और पिन तकनीक की खोज की थी, उससे लाखों लोगों के लिए लाइसेंस दिया गया था। दुनिया भर में 70 के दशक में बैंकों में एटीएम मशीन लगाने की होड लग गयी थी। इस नयी तकनीक के Patent का फायदा स्मिथस इंडस्ट्रीज लिमिटेड को तो बहुत हुआ लेकिन गुडफेलो को व्यक्तिगत रूप से कोई फायदा नहीं हो पाया। उनके अनुसार इस एटीएम मशीन की खोज से उन्हे सिर्फ £ 10 ही मिले। बाद में गुडफेलो इस कंपनी को छोड़कर IBM के लिए काम करने लगे थे। बैंकिंग सेवाओं में दिये गए अपने योगदान के लिए गुडफेलो को 2006 में “व्यक्तिगत पहचान संख्या के पेटेंट” के रूप में इंग्लैंड की महारानी से OBE (Officer of the Order of the British Empire) का पद दिया गया।

इसके अलावा नकदी और चेक जमा करने के लिए अमेरिकन लूथर जॉर्ज सिम्जियन द्वारा 1960 में बनाए गए बैंकोग्राफ का भी जिक्र किया जा सकता है। लेकिन यह मशीन केवल पैसे जमा करने के काम आती थी।

दुनिया की पहली एटीएम मशीन कब और कहाँ लगी थी?

दुनिया की पहली एटीएम मशीन का उद्घाटन 27 जून 1967 को इंग्लैंड के उत्तरी लंदन के एनफील्ड में बार्कलेज़ बैंक की एक ब्रांच में किया गया था। इस मशीन से सबसे पहले कॉमेडी अभिनेता रेग वर्नी ने पैसा निकाला था। यह मशीन जॉन शेफर्ड-बैरोन और उनकी टीम द्वारा डिज़ाइन की गयी थी। लेकिन इस मशीन में एटीएम कार्ड और पिन की सुविधा नहीं थी। दुनिया के पहले एटीएम मशीन से केवल अधिकतम कैश £ 10 तक ही निकाला जा सकता था। यहाँ ध्यान देने की बात यह है कि 1960 और 1970 के दशक में इंटरनेट और नेटवर्किंग की सुविधा नहीं थी।

एक अनुमान के अनुसार वर्तमान में पूरे विश्व में 30 लाख से अधिक ATM मशीन सक्रिय हैं। कैशलेस पैसों के लेनदेन के कारण नयी एटीएम मशीन लगाने की गति (CAGR में) में कुछ मंदी आई है।

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