भारत का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन कौन सा है।

इससे पहले कि आप यह जाने कि भारत का सबसे पहला रेलवे स्टेशन कौन सा है आपको यह बात समझनी होगी कि भारत के सबसे पहले रेलवे स्टेशन एवं भारत के सबसे पुराने Operational रेलवे स्टेशन में फर्क है । भारत का सबसे पुराना रेलवे स्टेशन तत्कालीन बंबई में बना था जिसे आप आज मुंबई के नाम से जानते हैं। यहां पर पहला रेलवे स्टेशन बोरीबंदर में बना था जिसको परिवर्तित कर विक्टोरिया टर्मिनस बना दिया गया अर्थात आप  विक्टोरिया टर्मिनस को भारत का पहला रेलवे स्टेशन कह सकते हैं जिसे आजकल आप छत्रपति शिवाजी टर्मिनस के नाम से जानते हैं।

वहीं अगर आप  सबसे पुराने रेलवे स्टेशन की बात कर रहे हैं जो आज  भी अपनी Original  स्थिति  में काम कर रहा है अर्थात Operational है  तो  वह  रेलवे स्टेशन होगा  रोयापुरम रेलवे स्टेशन  जोकि  चेन्नई के  आर्कोनम  बीच पर बना है ।

bharat ka sabse pahla railway station

चलिए आप जब भारत के सबसे पहले रेलवे स्टेशन की बात कर रहे हैं तो भारतीय रेलवे का थोड़ा सा इतिहास भी जान लेते हैं।  आप सभी को पता होगा कि  भारत में सबसे पहली ट्रेन मुंबई और ठाणे के बीच 16 अप्रैल 1953 को चली। इस  ट्रेन में 14 डिब्बे थे और इस ट्रेन को 3 इंजन चला रहे थे जिनका नाम था सुल्तान,  सिंध और साहेब।

इस रास्ते की लंबाई 21 मील के आसपास थी एवं इस रास्ते को पूरा करने के लिए ट्रेन ने 45 मिनट का समय लिया ।कई लोगों को इस बात की गलतफहमी है कि   इस दिन भारत की पहली ट्रेन चली थी, परंतु सत्य यह नहीं है।  16 अप्रैल 1953 को मुंबई और ठाणे के बीच चलने वाली ट्रेन भारत की पहली Commercial ट्रेन थी ।  इसीलिए इसे आधिकारिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है परंतु इसके पहले भी 22 दिसंबर 1951 को रुड़की और पिरान कलियार के बीच ट्रेन चल चुकी थी।

जब आपने थोड़ा बहुत रेलवे का इतिहास पढ़ लिया है तो इस बात को भी समझ लीजिए कि ऐसा नहीं है कि अंग्रेजों ने जो रेलवे नेटवर्क  बना कर दिया था उस पर हम केवल थोड़ी बहुत ही बढ़ोत्तरी कर पाए है। भारत  ने 1947 के बाद  इस नेटवर्क में 40% की बढ़ोतरी की है, यही नहीं अंग्रेजो के द्वारा बनाए गए बहुत बड़ी मात्रा में नेरो गेज को ब्रॉड गेज में परिवर्तित किया गया है। अगर आप एक तरह से समझें तो यह नई लाइन बिछाने जैसा ही है।

डॉ. शशि थरूर की लिखी किताब में हमें पता चलता है कि अंग्रेजों ने केवल वही रेलवे नेटवर्क बिछाया था जहां उनके लिए व्यापारिक रूप से लाभकारी था। कई शहर ऐसे थे जिनकी आबादी अच्छी खासी थी पर जिनका कोई व्यापारिक महत्व नहीं था वहां कोई रेलवे स्टेशन नहीं बिछाया गया अर्थात अंग्रेज केवल अपने फायदे की सोच रहे थे। आपको यह जानकर भी आश्चर्य होगा कि यह पूरा रेलवे नेटवर्क जब भारत में बनाया गया तो इसकी लागत दुनिया में और किसी रेलवे नेटवर्क से डेढ़ गुना ज्यादा थी और यह डेढ़ गुना ज्यादा  कीमत भारत की गरीब जनता ने अदा की और यह पैसा सीधे अमीर अंग्रेज लॉर्डों की  जेब में गया।

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