भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर कौन सा है ?

भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर शक संवत पर आधारित है। इस कारण शक संवत को ही भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर कहा जाता है। इसे भारत का राष्ट्रीय पांचांग या राष्ट्रीय कैलेंडर भी कहा जाता है। इसके अलावा शक संवत को राष्ट्रीय शाके के नाम से भी जाना जाता है। शक संवत आधारित कैलेंडर को 22 मार्च 1957 को भारत के राष्ट्रीय कैलेंडर के रूप में अपनाया गया था। इसी के बाद से ही सभी सरकारी दस्तावेजों समेत सभी जगह अंग्रेज़ी कैलेंडर के साथ – साथ राष्ट्रीय कैलेंडर का भी उपयोग किया जाता है।

शक संवत की शुरुआत 78 ईसा पूर्व की मानी जाती है। माना जाता है कि शक संवत कैलेंडर की शुरुआत राजा कनिष्क ने की थी। हालांकि इस विषय में इतिहासकारों में एक राय नही है। इसे शुरू करने वालों के रूप में कई अन्य लोगो का भी नाम लिया जाता है। शक संवत के अस्तित्व में आने के बाद ही भारत में बड़े पैमाने पर इसका उपयोग किया जाने लगा। माना जाता है कि 500 ईसा पूर्व तक इसका उपयोग लगभग सभी जगह किया जाने लगा।

bharat ka rashtriya calendar kaun sa hai

हालांकि समय के साथ इसका उपयोग पुनः सिमटता चला गया। इसके अलावा ग्रेगोरियन कैलेंडर या अंग्रेज़ी कैलेंडर के आगमन के बाद शक संवत आधारित कैलेंडर बेहद कम ही उपयोग में था। इसी के बाद भारत सरकार ने स्वर्णिम इतिहास को ज़िंदा रखने के उद्देश्य से इसे शक संवत आधारित राष्ट्रीय कैलेंडर को भारत के राष्ट्रीय कैलेंडर के रूप में घोषित कर दिया।

शक संवत को 1957 में भारत के राष्ट्रीय कैलेंडर के रूप में घोषित करने से पहले इसमें कई आवश्यक बदलाव किए गए। हालांकि यह बदलाव बेहद मामूली एवं इसे सरल बनाने के लिए किए गए थे। शक संवत में भी अंग्रेज़ी कैलेंडर की ही तरह 12 महीने होते हैं। राष्ट्रीय कैलेंडर में भी दिनों की संख्या 365 होती है।

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