भारत का सबसे बड़ा मंदिर कौन सा है ।

भारत का सबसे बड़ा मंदिर दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में, श्री रंगम की पावन भूमि पर स्थित है, जिसका नाम श्री रंगनाथस्वामी मंदिर है। तिरुचिरापल्ली शहर के कावेरी नदी के ‘श्रीरंगम’ नामक द्वीप पर बने इस मंदिर को “भू-लोक वैकुण्ठ” के नाम की संज्ञा दी गई है, इसके अलावा श्रीरंगम मंदिर तिरुवरंगम, तिरुपति, पेरियाकोइल, आदि विभिन्न नामों से भी इस मंदिर को जाना जाता है। यह दक्षिण भारत के सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर में से एक हिन्दूओं का प्रमुख तीर्थ स्थल है ।

bharat ka sabse bada mandir koun sa hai

रंगनाथस्वामी मंदिर के बारे में सामान्य जानकारी

भारत के सबसे विशाल मंदिर परिसर होने के कारण इसे 3 नवम्बर 2017 को सांस्कृतिक विरासत संरक्षण हेतु “यूनेस्को एशिया प्रशांत मेरिट पुरस्कार ” प्रदान किया गया था।
इस मंदिर के सम्पूर्ण परिसर की बात करे तो यह विशाल मंदिर परिसर लगभग 6,31,000 वर्ग मी (156 एकड़) के क्षेत्र में फैला हुआ है। श्रीरंगम मंदिर के परिसर में 7 संकेंद्रित दीवारी अनुभाग और 21 गोपुरम है। गोपुरम का आशय मंदिर के द्वार से है। इस मंदिर के प्रमुख द्वार को “राजगोपुरम” कहा जाता है और इस द्वार की ऊंचाई 236 फीट (72 मी) है।

द्रविड़ शैली से निर्मित यह मंदिर वास्तुकला की अनुपम कृति है, इस मंदिर से जुड़े जो शिलालेख हैं वो प्रमुख रूप से 10 वी शताब्दी के दिखाई पड़ते हैं। ये पुरातात्विक शिलालेख चोल, पांड्य, होयसाल और विजयनगर राजवंशों से सम्बंधित हैं। इन सभी राज्यों ने तिरुचिरापल्ली पर शासन किया था तथा मंदिर का संरक्षण किया, इस मंदिर में ग्रेनाइट से बने 953 स्तंभों का हॉल है जिसका निर्माण विजयनगर काल (1336 – 1565) में किया गया था इन स्तंभों में कुछ मूर्तियाँ अंकित है, जिसमें जंगली घोड़े और बड़े पैमाने पर बाघों के घूमते हुए सिर बने है जो कि प्राकृतिक लगते है, तथा मंदिर परिसर की दीवारों को हर्बल और वनस्पति रंगों के उपयोग से जिस तरह चित्रित किया गया है, वह अद्भुत चित्रकला है।

श्री रंगनाथस्वामी मंदिर धर्म और प्राचीन संस्कृति की झलक दिखाता है, यह मंदिर प्राचीन वास्तु शैली से सराबोर अनूठी एतिहासिक धरोहर है।

भारत का सबसे बड़ा मंदिर दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में, श्री रंगम की पावन भूमि पर स्थित है, जिसका नाम श्री रंगनाथस्वामी मंदिर है। तिरुचिरापल्ली शहर के कावेरी नदी के ‘श्रीरंगम’ नामक द्वीप पर बने इस मंदिर को “भू-लोक वैकुण्ठ” के नाम की संज्ञा दी गई है, इसके अलावा श्रीरंगम मंदिर तिरुवरंगम, तिरुपति, पेरियाकोइल, आदि विभिन्न नामों से भी इस मंदिर को जाना जाता है। यह दक्षिण भारत के सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर में से एक हिन्दूओं का प्रमुख तीर्थ स्थल है ।

रंगनाथस्वामी मंदिर के बारे में सामान्य जानकारी

भारत के सबसे विशाल मंदिर परिसर होने के कारण इसे 3 नवम्बर 2017 को सांस्कृतिक विरासत संरक्षण हेतु “यूनेस्को एशिया प्रशांत मेरिट पुरस्कार ” प्रदान किया गया था।
इस मंदिर के सम्पूर्ण परिसर की बात करे तो यह विशाल मंदिर परिसर लगभग 6,31,000 वर्ग मी (156 एकड़) के क्षेत्र में फैला हुआ है। श्रीरंगम मंदिर के परिसर में 7 संकेंद्रित दीवारी अनुभाग और 21 गोपुरम है। गोपुरम का आशय मंदिर के द्वार से है। इस मंदिर के प्रमुख द्वार को “राजगोपुरम” कहा जाता है और इस द्वार की ऊंचाई 236 फीट (72 मी) है।

द्रविड़ शैली से निर्मित यह मंदिर वास्तुकला की अनुपम कृति है, इस मंदिर से जुड़े जो शिलालेख हैं वो प्रमुख रूप से 10 वी शताब्दी के दिखाई पड़ते हैं। ये पुरातात्विक शिलालेख चोल, पांड्य, होयसाल और विजयनगर राजवंशों से सम्बंधित हैं। इन सभी राज्यों ने तिरुचिरापल्ली पर शासन किया था तथा मंदिर का संरक्षण किया, इस मंदिर में ग्रेनाइट से बने 953 स्तंभों का हॉल है जिसका निर्माण विजयनगर काल (1336 – 1565) में किया गया था इन स्तंभों में कुछ मूर्तियाँ अंकित है, जिसमें जंगली घोड़े और बड़े पैमाने पर बाघों के घूमते हुए सिर बने है जो कि प्राकृतिक लगते है, तथा मंदिर परिसर की दीवारों को हर्बल और वनस्पति रंगों के उपयोग से जिस तरह चित्रित किया गया है, वह अद्भुत चित्रकला है।

श्री रंगनाथस्वामी मंदिर धर्म और प्राचीन संस्कृति की झलक दिखाता है, यह मंदिर प्राचीन वास्तु शैली से सराबोर अनूठी एतिहासिक धरोहर है।

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