भारत का सबसे ऊंचा दरवाजा कौन सा है।

भारत में मुग़लो के शासन का इतिहास काफी पुराना हैं। मुग़लों ने भारत में 1526 से ले कर भारत में  आंग्रेज़ी शासन के आने तक यानी 1857 तक राज किया। इस दैरान मुगल साम्राज्य के अलग अलग राजाओं ने  इस देश पर हुकूमत की। अपने शासनकाल में मुग़लों ने भारत के अलग अलग हिस्सों में कुछ ऐसे निर्माण कराएं जो आज तक शान से खड़ा है तथा देश के पर्यटन स्थलों में प्रमुख स्थान रखता हैं।

bharat ka sabse uncha darwza kaha aur koun sa hai

उस दौरान मुग़लो द्वारा कराए कुछ निर्माण जैसे ताजमहल, लाल किला, कुतुबमीनार इत्यादि आज भी बड़ी संख्या में दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इन निर्माण के समय में ही मुग़लो द्वारा बनवाया एक और चीज़ है जिसे दरवाजा ( Gate ) यानी प्रवेशद्वार कहते हैं। मुग़ल काल में ही निर्मित एक दरवाज़े को भारत के सबसे ऊंचे दरवाज़े का गौरव प्राप्त है। भारत का सबसे ऊंचा दरवाजा  बुलंद दरवाजा ( Buland Darwaza ) है। इतना ही नही, बुलंद दरवाजा सिर्फ भारत का ही नही बल्कि दुनिया का सबसे ऊंचा दरवाजा है।

बुलंद दरवाजा – भारत का सबसे ऊंचा दरवाजा

  • संक्षिप्त परिचय

बुलंद दरवाजा यानी Gate of Victory का निर्माण मुगल काल के राजा अकबर द्वारा, गुजरात पर मिली जीत के प्रतीक के रूप में करवाया गया था।  पुराने समय में राजा युद्ध में जीत हासिल करने के बाद अक्सर द्वार का निर्माण करवाते थे। यह भी कुछ उसी तरह का निर्माण था। मेहरानगढ़ के किले में भी 7 द्वार किसी न किसी विजय गाथा को समेटे ही हुए है।

बुलंद दरवाज़े का निर्माण 1572 में मुग़ल बादशाह अकबर द्वारा बनवाया गया था। यह दरवाजा फतेहपुर सीकरी का मुख्य प्रवेश द्वार था। मुग़ल काल में काफी समय तक फतेहपुर सीकरी मुग़ल साम्राज्य की राजधानी भी हुआ करती थी। फतेहपुर सीकरी उत्तर प्रदेश के आगरा शहर से 43 किलोमीटर दूर स्तिथ है। भारत और विश्व का यह सबसे ऊंचा दरवाजा Mughal Architecture का बेहतरीन नमूना है।

  • बुलंद दरवाज़े की बनावट के बारे में जानकारी

पहली नज़र में बुलंद दरवाजा को देखने से लगता है कि यह दिल्ली के जामा मस्जिद के डिज़ाइन का ही रूप है। लेकिन ऐसा बिल्कुल नही है। बुलंद दरवाज़े के निर्माण में मुख्यतः लाल रंग के बलुआ पत्थर का उपयगो किया गया था। इसे आकर्षक बनाने के लिए इसके ऊपर सफेद और काले रंग के मार्बल का उपयोग किया गया था। बुलंद दरवाज़े की कुल ऊंचाई जमीन से 54 मीटर है। इस दरवाजे के मुख्य द्वार में प्रवेश करने के लिए इसके सीढ़ियों पर जाना होता है। इसके बाद यह दरवाजा आगे एक मस्जिद की ओर जाती है। इसका निर्माण हिन्दू और फारसी वास्तु कला के आधार पर किया गया था।

इस बड़े से दरवाज़े पर उस समय बहुत सारी बातें लिखी गयी थी। इस पर क़ुरआन की कुछ आयतें भी अंकित की गई हैं। कुरआन की लिखी ये आयतें आज भी पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहता है। कुरान की आयतों के अलावा इसपर एक ओर फारसी में भी कुछ बातें लिखी हुई है। फारसी में लिखी बातें अकबर के दक्कन पर मिली जीत के बारे में है। इस दरवाज़े के सहारे अकबर की भव्यता भी दर्शाने की कोशिश की गई है।

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