भारत का सबसे ऊंचा जलप्रपात कौन सा है।

भारत नदियों, पहाड़ो, समुन्द्रों, इत्यादि जैसे कई प्राकृतिक संसाधनों से पूर्ण देश हैं। इन सब के अलावा जलप्रपात ( Waterfall ) भी प्राकृतिक का एक बेहतरीन तोहफा है। भारत में कई जलप्रपात हैं जो कि भारत के अलग अलग राज्यों देखने को मिल जाते हैं। भारत में मौजूद जलप्रपात अलग  अलग ऊंचाई के हैं। यहां मौजूद जलप्रपातो में से सबसे ऊंचे जलप्रपात की बात करें तो, भारत का सबसे ऊंचा जलप्रपात कुंचिकल जलप्रपात ( Kunchikal Fall ) है। कुंचिकल जलप्रपात भारत के एक राज्य कर्नाटक में मौजूद है।

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कुंचिकल जलप्रपात – भारत का सबसे ऊंचा जलप्रपात

  • संक्षिप्त परिचय

भारत का सबसे ऊंचा जलप्रपात कर्णाटक के Masthikatte  के नज़दीक, शिमोगा ज़िले के Nidagodu गांव में मौजूद है। इस सबसे ऊंचे जलप्रपात की कुल ऊंचाई 455 मीटर यानी 1493 फ़ीट है। ऊंचाई के आधार पर यह जलप्रपात विश्व का 116वां सबसे ऊंचा जलप्रपात हैं।  यह जलप्रपात वराही नदी ( Varahi Rover ) से निकलती है। अर्थात जलप्रपात के पानी का श्रोत वराही नदी है। चट्टानों से बहती हुई यह नदी एक खूबसूरत दृश्य बनाती है। इस जलप्रपात को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं।

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समय के साथ हुए निर्माण और बदलाव के कारण इस Waterfall खासा पर प्रभावित हुआ है। Masthikatte के नज़दीक Mani Dam और पनबिजली केंद्र बनाने के कारण इस जलप्रपात से गिरने वाली पानी में काफी कमी आई हैं। इनके निर्माण के कारण घटे पानी के कारण अब यहां से एक तय समय पर ही झड़ने निकलते देखे जाते हैं। सामान्यतः यह जलप्रपात अब केवल वर्षा ऋतु के समय ही यानी जुलाई से सितंबर के बीच ही दिखाई देता है।

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यह झड़ना एक नियत स्थान तक ही सीमित रह गया है इसलिए यहां आने वाले पर्यटकों को यहां तक आने के लिए टिकट ( Pass ) की आवश्यकता होती है। यहां आने के लिए Pass इस स्थान के पहले ही, लगभग 15 किलोमीटर पहले लेना होता है। समय बीतने के बाद भी बड़ी संख्या में दर्शक प्रकृति के इस बेहतरीन नज़ारे को देखने के लिए आते हैं।

  • कुंचिकल जलप्रपात में हुए निर्माण

इस जलप्रपात के पास ही मनी बांध का निर्माण किया गया है। इसके ठीक निचे यानी इस झड़ने के तल ( Base ) पर एक शक्तिशाली पनबिजली ऊर्जा घर ( Hydro Electric Power Station ) का निर्माण किया गया है। यह  Hydro Electric Power Station कर्नाटक का पहला Underground Electric Station है। इस निर्माण के बाद इस झड़ने का अधिकांश पानी इसी बने बांध में बिजली पैदा करने के उद्देश्य से गिरने लगा।

इस जगह पर इतने बड़े निर्माण के कारण पहले की अपेक्षा इस स्थान पर आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए इनके आने जाने का इलाका सीमित कर दिया गया है। जबकि इस इलाके का एक बड़ा हिस्सा संरक्षित कर दिया गया है। इस कारण यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी कमी देखी जाने लगी है। इस स्थान पर वर्षा ऋतु में दर्शक अधिक आते हैं क्यों कि इस समय झड़ने से गिड़ने वाले पानी का बहाव भी काफी तेज होता है जो कि एक अलग ही रोमांच का एहसास कराता है।

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