भारत के पहले मुस्लिम राष्ट्रपति कौन थे। First Muslim President of India

विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में सबसे बड़ा पद राष्ट्रपति का पद माना जाता है। भारत के 26 जनवरी 1950 को लोकतांत्रिक देश घोषित होने के बाद से ही राष्ट्रपति का भी पद अस्तित्व में आया। इसके बाद देश के पहले राष्ट्रपति के रूप में राजेंद्र प्रसाद चुने गए। राजेन्द्र प्रसाद 26 जनवरी 1950 से ले कर 1962 तक यानी 12 साल देश के राष्ट्रपति रहे। दो कार्यकाल तक लगातार देश के राष्ट्रपति रहने वाले यह पहले व्यक्ति है। इसके बाद से वर्तमान राष्ट्रपति को मिलाकर भारत के 14 राष्ट्रपति हो चुके हैं।

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एक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक देश होने के कारण देश के सबसे बड़े पद पर भारत के अलग अलग धर्म के लोगों को भी इस पद पर आसीन होने का मौका मिला। भारत के इस सर्वोच्च पद पर पहुँचने वाले पहले मुस्लिम व्यक्ति ज़ाकिर हुसैन (Zakir Husain) थे। इनकी नियुक्ति देश के तीसरे राष्ट्रपति के रूप में हुई थी।

ज़ाकिर हुसैन – भारत के पहले मुस्लिम राष्ट्रपति

  • संक्षिप्त परिचय

ज़ाकिर हुसैन खान एक नेता तथा Freedom Fighter थे। इनका जन्म हैदराबाद में 8 फ़रवरी 1897 को हुआ था। इनकी मृत्यु भारत के राष्ट्रपति के पद पर रहते 3 मई 1969 को हो गया। ज़ाकिर हुसैन देश के तीसरे राष्ट्रपति के रूप में 13 मई 1967 को चुने गए तथा मृत्यु तक यानी 3 मई 1969 तक राष्ट्रपति रहे। देश के लिए इनके योगदान को देखते हुए इन्हें देश का सबसे बड़ा सम्मान, भारत रत्न 1963 को दिया गया। इन्हें पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है।

भारत के राष्ट्रपति बनने से पहले ज़ाकिर हुसैन बिहार के राज्यपाल भी रह चुके थे। बिहार के राज्यपाल के रूप में इनका कार्यकाल 1957 से ले कर 1962 तक रहा था। इसके बाद 1962 से ले कर देश के दूसरे उप-राष्ट्रपति के पद पर भी रहे। उप राष्ट्रपति के रूप में इनका कार्यकाल 1962 से कर 1967 तक रहा। इसके बाद ही वह देश के राष्ट्रपति चुने गए।

  • ज़ाकिर हुसैन का जीवन

सिर्फ 23 साल की उम्र में ही ज़ाकिर हुसैन ने छात्रों और कुछ शिक्षकों के साथ मिल कर अलीगढ़ में  29 अक्टूबर 1920 को नेशनल मुस्लिम यूनिवर्सिटी की नींव रखी। इसके कुछ साल बाद ही यह यूनिवर्सिटी 1925 में दिल्ली के करोल बाग Shift हो गया। इसके बाद एक बार फिर इस यूनिवर्सिटी का स्थान बदल और यह 1 मई 1935 को जामिया नगर, नई दिल्ली में आ गया। इसके बाद उन्होंने इस यूनिवर्सिटी का नाम जामिया मिलिया इस्लामिया कर दिया। इसके बाद भी इस यूनिवर्सिटी ने कई उतार चढ़ाव देखने के बाद देश के प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी मे शामिल हो गया। मौजूदा समय में भी यह यूनिवर्सिटी देश के बेहतरीन यूनिवर्सिटी में गिनी जाती है तथा इसे सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्त है।

ज़ाकिर हुसैन इस यूनिवर्सिटी के जामिया नगर आने के बाद एक बार फिर अपनी पढ़ाई करने के सिलसिले में बाहर निकले। जर्मनी के Frederick William University of Berlin से Economy में PhD की डिग्री हासिल की। 1927 में जामिया यूनिवर्सिटी की हालत खराब हो चुकी थी और यह बन्द होने के कगार पर था। तब ज़ाकिर हुसैन जर्मनी से वापस आ कर इस यूनिवर्सिटी से जुड़े और अगले 21 साल तक यहां Vice Chancellor के रूप में रहे। इस दौरान उन्होंने सिर्फ यूनिवर्सिटी को ही नही संभाला, बल्कि इसका स्तर काफी बेहतर किया साथ ही इस दौरान Freedom Movement से भी जुड़े रहें।

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