1871 और 1881 की जनगणना के आंकड़े और महत्वपूर्ण तथ्य –

1881 की जनगणन को भारत की पहली समवर्ती, निरंतर या Synchronous जनगणना क्यों कहा जाता है?

आधुनिक समय में भारत में जनगणना का इतिहास 19वीं शताब्दी से शुरू होता है। भारत की पहली आम जनगणना 1865 से शुरू होकर 1872 के बीच सम्पन्न हुई थी। यहाँ ध्यान देने की बात यह है कि इंग्लिश भाषा में पहली Synchronous census 1881 की जनगना को माना गया है। यहाँ Synchronous शब्द का अर्थ है एक ही समय में सभी जगह होने वाली। या दूसरे शब्दों में निरंतर रूप से एक ही कालावधि में पूरे देश में होने वाली जनगणना।

इस संदर्भ में 1871-72 की जनगणना को Synchronous census नहीं माना जाता है क्योंकि इस जनगणना के लिए आंकड़े एक साथ इकट्ठे नहीं किए गए थे। यह आंकड़े 1865 से 1872 के बीच 6 वर्षों के अंतराल में इकठ्ठा किए गए थे जिसके कारण ये अधिक सटीक नहीं माने गए हैं। लेकिन 1881 में जो जनगणना हुई थी वह पूरे भारत में एक साथ सम्पन्न कराई गई थी और एक साथ ही देश के सभी भागों से आंकड़े इकठ्ठा किए गए थे। इसलिए भारत की पहली समवर्ती या पूरे देश में एक ही समय में होने वाली जनगणना 1881 की जनगणना को माना जाता है। 1881 से अब तक भारत में हर 10 वर्षों के अंतराल पर एक बार जनगणना कराई जाती है।

bharat ki jansankhya

1872 की जनगणना की एक बात और गौर करने वाली है। 1872 में सम्पन्न हुई जनगणना “संपूर्ण भारत” – ब्रिटिश भारत और “देशी सामंती राज्यों” से जनगणना संबंधित डेटा इकट्ठा करने का पहला प्रयास था। लेकिन ब्रिटिश भारत में स्थित देशी  रियासतों से मिली जानकारी और संख्या सटीक नहीं थे और केवल जनसंख्या संबन्धित अनुमान ही थे। इसलिए 1872 की जनगणना  में केवल ब्रिटिश भारत से प्राप्त हुए आंकड़े ही ठीक माने गए हैं। 1872 की जनगणना में सभी प्रांतों का प्रतिनिधित्व पूर्ण रूप से नहीं किया गया था और जानकारी अलग-अलग समय पर एकत्र की गई थी। इस जनगणना के लिए स्वतंत्र एजेंसियों का भी सहारा लिया गया था।

1871 से पहले भारत में हुई जनगणनाओं का इतिहास

1871 से पहले भारत में जो जनगणनाएँ होती थीं वह पूरे देश की ना होकर बल्कि एक शहर या प्रांत तक सीमित होती थीं।

  • यदि इतिहास की बात करें तो भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान पहली बार किसी भी तरह की जनगणना जेम्स प्रिंसेप के द्वारा 1824 में इलाहाबाद शहर में और बनारस शहर में 1827-28 में आयोजित की गई थी।
  • अंग्रेजों के द्वारा किसी भी भारतीय शहर की पहली पूर्ण जनगणना 1830 में ढाका में हेनरी वाल्टर द्वारा की गई थी।
  • भारत में दूसरी जनगणना 1836-37 में फोर्ट सेंट जॉर्ज द्वारा आयोजित की गई थी। ब्रिटिश भारत की गृह सरकार ने जुलाई, 1856 के सांख्यिकीय डिस्पैच नंबर 2 के तहत यह निश्चित किया था कि 1861 में देश में जनसंख्या की एक आम जनगणना की जा सकती है। किन्तु 1861 में होने वाली जनगणना को 1857 में हुए भारत के पहले स्वतन्त्रता संग्राम या विद्रोह के कारण स्थगित कर दिया गया था।
  • हालांकि 10 जनवरी 1865 के दिन उत्तर-पश्चिमी प्रांतों में घर-घर जाकर जनगणना की गई थी।
  • ऐसी ही एक जनगणना नवंबर 1866 में केंद्रीय प्रांतों में और 1867 में बरार में की गई थी। इसी प्रकार 1855 और 1868 में पंजाब क्षेत्र में जनगणना सम्पन्न कराई गई थी।
  • अवध नाम से मशहूर प्रांत की जनगणना 1869 में ली गई थी।
  • मद्रास के शहरों में, बंबई और कलकत्ता की जनगणना के लिए आंकड़े पहली बार क्रमशः 1863, 1864 और 1866 में इकठ्ठा किए गए थे।
  • 1865 में भारत में ब्रिटिश सरकार ने यह निश्चय किया कि 1871 में एक सामान्य जनसंख्या जनगणना कराई जाएगी। वर्ष 1866-67 में देश के अधिकांश हिस्सों में व्यक्तियों की वास्तविक गणना की गई थी। 1866-67 की द्विवार्षिक जनगणना के आंकड़े 1871 की आम जनगणना में विलय कर दिये गए थे। ध्यान देने की बात यह है कि 1871 कि जनगणना में ब्रिटिश भारत के नियंत्रण में आने वाले सभी रियासतों, प्रान्तों या भागों की जनगणना नहीं हुई थी। इस जनगणना में आंकड़ों के लिए जिस रजिस्टर का उपयोग हुआ था उसमें कुल मिलाकर 17 सवाल हुआ करते थे। इसमें जिन जानकारियों को भरा गया था वे नाम, आयु, धर्म, जाति या वर्ग, जाति या राष्ट्रीयता, स्कूल / कॉलेज में भाग लेने और पढ़ने और लिखने में सक्षमता इत्यादि से संबन्धित थे। हालांकि ये सभी प्रश्न पुरुषों और महिलाओं से अलग-अलग पूछे गए थे। जबकि पुरुषों से उनके व्यवसाय के विषय में अलग से प्रश्न पूछे जाते थे।

1871 की जनगणना से संबन्धित आंकड़े

1871-72 में हुई जनगणना को भारत की पहली जनगणना माना जाता है। हालांकि यह पूरे देश में एक साथ और एक ही समय पर नहीं हुई थी। इसके अलावा इस जनगणना में ब्रिटिश भारत के सभी क्षेत्रों को शामिल भी नहीं किया गया था। इस जनगणना से कुछ समय पहले ही पंजाब, अवध और बेरार में जनगणना कराई गई थी। दोबारा से खर्च को रोकने और लोगों को दोबारा से परेशान ना करने के कारण इन क्षेत्रों में 1871-72 में जनगणना नहीं कराई गई। जिन इलाकों में जनगणना नहीं की गई थी वहाँ पहले के आंकड़ों को शामिल किया गया या अनुमान लगाया गया था। किन्तु देश में रह रहे व्यक्तियों का अनुमान लगाने का यह पहला वैज्ञानिक प्रयास था। 

  • 1871-72 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या 238, 830, 958 या 23 करोड़ 88 लाख व्यक्तियों की थी। इसमें ब्रिटिश शासन के सीधे अंदर आने वाले भारत के प्रान्तों की जनसंख्या 190563048 व्यक्तियों की थी। जबकि भारतीय रियासतों (feudatory states) में जनसंख्या 48267910 व्यक्तियों की थी। इस जनगणना के समय ब्रिटिश शासन के सीधे अंदर आने वाले भारत के प्रान्तों का कुल क्षेत्रफल 904, 049 वर्ग मील था जबकि रियासतों के अंतर्गत आने वाले भूभाग का कुल क्षेत्रफल 546, 695 वर्ग मील का था। इस जनगणना के दौरान ब्रिटिश भारत का कुल क्षेत्रफल ( ब्रिटिश शासन और रियासतों दोनों मिलाकर) 1450744 वर्ग मील था।
  • इस जनगणना में ब्रिटिश भारत के प्रान्तों और भारत की रियासतों का औसत जनसंख्या घनत्व 165 व्यक्ति प्रति वर्ग मील था। केवल ब्रिटिश प्रशासन के सीधे अंतर्गत पड़ने वाले क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व 211 व्यक्ति प्रति मील था। यदि व्यक्ति प्रति किलोमीटर वर्ग की बात करें तो 1871 में ब्रिटिश भारत का जनसंख्या घनत्व 131 था। 
  • पहले सम्पन्न हुई और 1871-72 की इस जनगणना के दौरान भारत के ब्रिटिश प्रान्तों या देसी रियासतों में जनसंख्या बढ़ी या घटी इस बात के कोई सर्वमान्य आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। क्योंकि ना ही 1871-72 की जनगणना के आंकड़े और ना ही इससे पहले हुई जनगणनाओं के आंकड़े एकदम सटीक थे। यदि 1871 में कहीं जनसंख्या में बढ़ोत्तरी हुई भी थी तो वह इस जनगणना में व्यक्तियों की गणना के पंजीकरण के अधिक प्रभावशाली और व्यापक रूप से होने के कारण हो सकती है जिसे निश्चित रूप से जनसंख्या में बढ़ोत्तरी नहीं माना जा सकता है।     
  • 1871 की जनगणना में ब्रिटिश भारत में बसे हुए घरों की संख्या 37,041,468 रेकॉर्ड की गई थी जिसमें 41 घर प्रति वर्ग मील में स्थित थे। औसतन एक घर में 5.14 व्यक्ति थे। ब्रिटिश भारत में कुल 493,444 गाँव और कस्बे थे। इनमें से 480,437 गांवों की आबादी 5,000 से कम थी
  • लगभग 37.5 मिलियन लोग कृषि में लगे हुए थे।
  • इस जनगणना के अनुसार ब्रिटिश भारत के प्रांतों में कुल 98 मिलियन पुरुष और 92.5 मिलियन महिलाएं रहती थीं, और प्रति 100 पुरुषों पर 94 महिलाएं थीं।

1881 की जनगणना से संबन्धित आंकड़े

1881 की जनगणना 17 फरवरी, 1881 को संदर्भ अवधि मानकर भारत के तत्कालीन जनगणना आयुक्त डबल्यू सी प्लोवन (W.C. Plowden) द्वारा सम्पन्न कराई गई थी। 1881 की जनगणना में न केवल देश के सभी भागों को शामिल किए जाने पर, बल्कि जनसांख्यिकीय के आर्थिक और सामाजिक विशेषताओं के वर्गीकरण पर भी जोर दिया गया था।

1881 की जनगणना ब्रिटिश भारत के पूरे भूभाग (कश्मीर को छोड़कर) पर एक साथ हुई जिसमें रियासतें भी शामिल थीं। किन्तु इस जनगणना में भारत के फ्रांसीसी और पुर्तगाली औपनिवेशिक भाग शामिल नहीं थे। हालांकि उन क्षेत्रों में भी उसी समय जनगणना कराई गई थी। इस जनगणना में शामिल होने वाले क्षेत्रों में बंगाल, उत्तर पश्चिम प्रांत, मद्रास, बॉम्बे, पंजाब, असम, बरूच, बरार, कूर्ग और अजमेर के अलावा राजपूताना के देसी रियासतों के राज्य, मध्य भारत, निजाम के प्रभुत्व, मैसूर, बड़ौदा, त्रावणकोर और कोचीन की रियासतें शामिल थीं।

  • 1881 जनगणना के अनुसार कुल जनसंख्या 253,891,821 या 25 करोड़ 38 लाख 91 हज़ार व्यक्तियों की थी। यह जनसंख्या ब्रिटिश शासन के सीधे अंदर आने वाले भागों और नेटिव स्टेट्स, दोनों को मिलकर थी। इस जनगणना के दौरान ब्रिटिश भारत का कुल क्षेत्रफल 1,382,624 वर्ग मील था।
  • इस जनगणना में ब्रिटिश शासन के सीधे अंदर आने वाले भागों में सबसे अधिक जनसंख्या बंगाल प्रांत की थी। बंगाल की जनसंख्या उस समय 69536861 व्यक्तियों की रेकॉर्ड की गई थी। वहीं नेटिव स्टेट्स या देसी रियासतों में सबसे अधिक जनसंख्या राजपूताना राज्य की थी जिसकी जनसनखया 1881 में 10268392 व्यक्तियों की थी। हालांकि जनसंख्या में बंगाल प्रांत सबसे अधिक था किन्तु सबसे अधिक क्षेत्रफल वाला ब्रिटिश प्रांत बॉम्बे था जिसका कुल क्षेत्रफल 197,875 वर्ग मील था। 193,198 वर्ग मील के साथ बंगाल क्षेत्रफल के मामले में दूसरे स्थान पर था। बम्बई उस समय ब्रिटिश भारत का सबसे बड़ा शहर था जिसकी जनसंख्या 772,196 थी।  
  • 1881 में जनसंख्या घनत्व पूरे ब्रिटिश भारतीय साम्राज्य के लिए औसत 184 व्यक्ति प्रति वर्ग मील था। यह 1871 की जनगणना के 165 के आंकड़े से अधिक था।
  • इस जनगणना में कुल 129.94 मिलियन या 12.9 करोड़ पुरुष और 123.95 मिलियन या 12.3 करोड़ महिलाएं दर्ज की गईं थीं।
  • इस जनगणना के दौरान प्रत्येक 10,000 लोगों में 7,402 हिंदू, 1,974 मुस्लिम, 253 मूल आदिवासी, 135 बौद्ध, 73 ईसाई, 73 सिख और 48 जैन व्यक्ति शामिल थे।
  • 1881 की जनगणना के अनुसार कुल आबादी की 90.9 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती थी। असम में सबसे अधिक ग्रामीण निवासी (98.6 प्रतिशत) थे, जबकि ग्रामीण आबादी का सबसे कम प्रतिशत अजमेर में (80 प्रतिशत) था।

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