भारत की जनसंख्या/Population कितनी है 2019 ? पूरी जानकारी

भारत की जनसंख्या कितनी है ? यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है क्योंकि आज भारत विश्व में जनसंख्या के आधार पर दूसरा सबसे बड़ा देश है वहीं चीन जनसंख्या के आधार पर विश्व का पहला देश है। अब किसी भी व्यक्ति के लिए यह बात जानना interesting होगा कि आखिर ! भारत और चीन की जनसंख्या में कितना अंतर है और भारत की कुल जनसंख्या कितनी है।

2019 में भारत की वर्तमान जनसंख्या 1 अरब 36 करोड़ है जो संयुक्त राष्ट्र के नवीनतम अनुमानों पर आधारित है। यह विश्व के देशों में चीन के बाद दूसरी सबसे अधिक जनसंख्या है। 2020 तक इसके बढ़कर 1 अरब 38 करोड़ पहुँच जाने की संभावना है। एक अरब से अधिक जनसंख्या होने के कारण वर्तमान में भारत में जनसंख्या घनत्व भी बढ़कर 460 व्यक्ति प्रति किलोमीटर हो गया है।

Bharat ki kul Jansankhya kitni hai

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अगर आप भारत की जनसंख्या वर्तमान में कितनी है यह जानना चाहते है World Meter वेबसाइट पर जा सकते है यहाँ पर आपको live जनसंख्या count मिल जाएगी।

2011 की जनगणना में भारत में जनसंख्या घनत्व केवल 382 व्यक्ति प्रति किलोमीटर था। सितंबर 2019 में भारत की कुल आबादी 1,369,343,938 रेकॉर्ड की गई थी। भारत के राज्यों में उत्तर प्रदेश की जनसंख्या सबसे अधिक 20 करोड़ से ज्यादा रेकॉर्ड की गई है।

भारत की जनसंख्या कितनी है

भारत की जनसंख्या वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार कितनी थी ?

2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या 1.21 अरब (1.21 बिलियन) थी। यह जनसंख्या 1 मार्च 2011 के दिन रेकॉर्ड की गई थी। इसमें 62.32 करोड़ पुरुष और 58.76 करोड़ महिलाएं शामिल हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार भारत का सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाला राज्य है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश भारत के पाँच सबसे अधिक आबादी वाले राज्य हैं जबकि सिक्किम सबसे कम जनसंख्या वाला राज्य है।

2011 के आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र राज्य का ठाणे जिला देश का सबसे अधिक आबादी वाला जिला है जबकि अरुणाचल प्रदेश का अंजाव सबसे कम आबादी वाला जिला है।

कुल जनसंख्या के प्रतिशत के संदर्भ में ग्रामीण आबादी भारत की कुल जनसंख्या का 68.8% और शहरी आबादी कुल आबादी का 31.2% है। पिछले दशक में शहरी आबादी के अनुपात में 3.4% की वृद्धि हुई है। 2001-2011 के दशक के दौरान भारत की जनसंख्या में 181 मिलियन से अधिक की वृद्धि हुई है। भारत की कुल जनसंख्या में हिंदू 96.63 करोड़ (79.8%); मुस्लिम 17.22 करोड़ (14.2%), ईसाई 2.78 करोड़ (2.3%); सिख 2.08 करोड़ (1.7%); बौद्ध 0.84 करोड़ (0.7%); और जैन 0.45 करोड़ (0.4%) हैं।

2011 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या के आंकड़े

  जनसंख्या 2011
व्यक्ति 1210.2 मिलियन
पुरुष 623.7 मिलियन
महिला 586.5 मिलियन

नोट – पुरुष में पुरुष और ‘अन्य’ शामिल हैं

जनगणना 2011 में देश की प्रशासनिक इकाइयों की संख्या

जनगणना 2011 में प्रशासनिक इकाइयों की संख्या

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश 35
जिले 640
उप-जिले 5,924
नगर 7,936
गाँव 6.41 लाख

भारत की जनसंख्या का इतिहास

किसी भी देश की जनसंख्या स्थायी नहीं रहती है। उसमें निरंतर परिवर्तन होता रहता है। भारत की जनसंख्या भी देश की राजनैतिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती है। 1901 में भारत की जनसंख्या 23 करोड़ 83 लाख थी जो 2011 में हुई जनगणना में बढ़कर 1 अरब 21 करोड़ हो गई।

1901 से लेकर 2011 तक भारत की जनसंख्या के आंकड़े और उसमें हुए बदलाव:-  

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असम में व्याप्त विकट परिस्थितियों के कारण 1981 की जनगणना नहीं हो सकी थी। 1981 में असम की जनसंख्या के आंकड़े ‘Interpolation’ के द्वारा जोड़े गए हैं।

  • 1891-1921: इस दौर में भारत की जनसंख्या में वृद्धि बहुत धीमी थी। इसे स्थिर जनसंख्या का काल कहा जाता है। इस काल में भारत की कुल जनसंख्या में केवल 1.27 करोड़ व्यक्ति ही बढ़े। 1921 के दशक में जनसंख्या वृद्धि दर शून्य से भी कम हो है थी। इस समय भारत की जनसंख्या में कमी आई थी। हालांकि इस दशक के बाद भारत की जनसंख्या लगातार बढ़ती गई।
  • 1921-1951: 1921 के दशक से भारत की जनसंख्या में तीव्र गति से बढ़ोत्तरी रेकॉर्ड की गई। इस काल को जनसंख्या की स्थिर वृद्धि का काल कहा जाता है। भारत की जनसंख्या वृद्धि का दूसरा चरण (स्थिर विकास का चरण) 1921 से 1951 तक 30 वर्षों तक जारी रहा। 1921 में जनसंख्या 251 मिलियन से बढ़कर 1951 में 361 मिलियन हो गई, यानी 110 मिलियन व्यक्तियों की बढ़ोत्तरी। इस चरण में मृत्यु दर में गिरावट तेज़ थी। जन्म दर में भी गिरावट थी लेकिन यह गिरावट नगण्य थी। इस चरण के दौरान मृत्यु दर 47 प्रति हजार से घटकर 27 प्रति हजार हो गई थी।
  • 1951-1981: यह भारत में जनसंख्या विस्फोट का समय था। इस काल में भारत की जनसंख्या वृद्धि दर 20 प्रतिशत से भी अधिक पहुँच गई थी। इस काल में भारत की जनसंख्या में जितनी तीव्र गति से बढ़ोत्तरी हुई थी किसी समय में नहीं रेकॉर्ड की गई। इस अवधि के दौरान, भारत की जनसंख्या 1951 में 361 मिलियन से बढ़कर 1981 में 683 मिलियन हो गई। इस चरण के दौरान जनसंख्या में 322 मिलियन की वृद्धि हुई। इस अवधि में सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर चिकित्सा सुविधाओं का प्रावधान किया गया था जिसके कारण मृत्यु दर में तेजी से गिरावट आई। यह कहा जा सकता है कि इस अवधि के दौरान मृत्यु दर में तेज गिरावट आई जबकि जन्म दर में बहुत धीमी दर से गिरावट आई जिसके परिणामस्वरूप, इस चरण के दौरान देश में जनसंख्या विस्फोट हुआ।
  • 1981-अब तक: यह जनसंख्या वृद्धि दर में गिरावट का समय है। इस काल में जनसंख्या वृद्धि दर घाट कर 20 प्रतिशत से नीचे आ गई है। 2011 में यह केवल 17.7% रह गई है। अनुमानों के अनुसार 2050 तक भारत दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन जाएगा। इस चरण को धीमा होने के निश्चित संकेत के साथ जनसंख्या के उच्च वृद्धि की अवधि के रूप में भी जाना जाता है। 1981 के बाद जनसंख्या विकास दर में गिरावट शुरू हुई है।

भारत में जनगणना का इतिहास

भारत में अब तक पंद्रह जनगणनाएँ हुई हैं। भारत में जनगणना प्रत्येक 10 वर्षों में एक बार आयोजित की जाती है। आधुनिक काल में भारत में पहली बार जनगणना 1865-1872 में आयोजित की गई थी। जनगणना अपने वर्तमान वैज्ञानिक रूप में देश के विभिन्न हिस्सों में 1865 और 1872 के बीच गैर-निरंतर रूप (non synchronously) से आयोजित की गई थी। किन्तु भारत में जनगणना के शुरुआती लक्षणों को मौर्य शासन काल में कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ (321-296 ईसा पूर्व) में और बाद में मुग़ल काल में अबुल फ़ज़ल (1595-96) के ‘आइन-ए-अकबरी’ के लेखों में देखा जा सकता है।

हालांकि तत्कालीन ब्रिटिश भारत सरकार के प्रयासों के कारण अंततः 1872 में भारत में की गई जनगणना को भारत की पहली जनगणना माना जाता है। किन्तु 1881 में भारत की पहली निरंतर जनगणना सम्पन्न हुई जिसके बाद लगातार निरंतर रूप से देश में जनगणनाएँ आयोजित की गई। भारत में 1881 से जनगणनाओं की एक अटूट श्रृंखला चली आ रही है।

भारत में जनगणना का इतिहास

उल्लेख समय / Time
ऋग्वेद 800-600 ईसा पूर्व
अर्थशास्त्र 321-296 ईसा पूर्व
पहली व्यवस्थित जनगणना (non-synchronous) 1872 (1865-1872)
पहली निरंतर (Synchronous Census) जनगणना 1881
स्वतंत्र भारत की पहली जनगणना 1951
2011 की जनगणना 15वीं (1872 के बाद), आजादी के बाद सातवीं
कुल जनगणनाएँ 15

भारत में जनसंख्या जनगणना के संचालन की योजना प्रदान करने के लिए और जनगणना अधिकारियों के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को निश्चित करने के लिए 1948 में जनगणना अधिनियम (Census Act 1948) बनाया गया था।

भारत सरकार ने मई 1949 में जनसंख्या के आकार, उसकी वृद्धि, जनसंख्या के घनत्व इत्यादि पर आँकड़ों और जानकारियों के व्यवस्थित संग्रह के लिए कदम उठाने का निर्णय लिया और रजिस्ट्रार जनरल और ex-Official जनगणना आयुक्त, भारत के तहत गृह मंत्रालय में एक संगठन की स्थापना की।

इस संगठन को जनसंख्या सांख्यिकी और जनगणना सहित विभिन्न आंकड़ों पर डेटा बनाने के लिए जिम्मेदारी दी गई। बाद में देश में जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम (Registration of Births and Deaths Act, 1969 ) के क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी भी भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त के कार्यालय को दे दी गई। भारत में जनगणना का आयोजन एक विस्तारित डी फैक्टो कैनवसर विधि (extended de facto canvasser method) के द्वारा किया जाता है।

जनगणना 2011 इस निरंतर श्रृंखला में 1872 से पंद्रहवीं जनगणना है और भारत की आजादी के बाद सातवीं जनगणना है। भारत में जनगणना का इतिहास बहुत पुराना है। साहित्यिक उल्लेखों से पता चलता है कि भारत में वैदिक काल में भी जनगणना की गई थी। भारत एक विविधताओं वाला देश है और भारत के लोगों की समृद्ध विविधता वास्तव में जनगणना के द्वारा सामने आती है जो भारत को समझने और अध्ययन करने के लिए एक सशक्त माध्यम बन गई है।                                                                                                                                  

आइए एक नज़र डालते हैं भारत में जनगणना के इतिहास पर

  1. भारत में सबसे पहली बार किसी भी प्रकार की जनगणना का उल्लेख “ऋग्वेद” में प्राप्त होता है। दुनिया का सबसे प्राचीनतम साहित्य ग्रंथ ऋग्वेद बताता है कि भारत में 800-600 ईसा पूर्व के दौरान एक प्रकार की जनसंख्या की गणना की गई थी। जनगणना का ऋग्वेद में किया गया यह उल्लेख भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया का जनगणना का सबसे पुराना उल्लेख है।
  2. भारत में वैदिक काल के बाद जिस काल में जनगणना का उल्लेख मिलता है वह है मौर्य काल। मौर्य काल में लिखी गई विश्व-प्रसिद्ध रचना ‘अर्थशास्त्र’ देश में जनगणना की बात कहता है। तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में लिखित कौटिल्य के अर्थशास्त्र के अनुसार कराधान ( Taxation) के लिए राज्य नीति के उपाय के रूप में जनसंख्या के आंकड़ों का संग्रह निर्धारित करना चाहिए। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में कहा गया है कि राष्ट्र में प्रभावी रूप से करों के संग्रह के लिए यह आवश्यक है कि उस राज्य में रहने वाले लोगों की जनगणना के द्वारा नागरिकों की उपस्थिती का सही अंदाजा लगाया जाए। कौटिल्य का अर्थशास्त्र केवल व्यक्तियों की जनगणना की बात नहीं करता है बल्कि उसमें आर्थिक और कृषि जनगणना के संचालन के तरीकों का विस्तृत विवरण किया गया है।
  3.  मध्यकाल में भारत में मुग़ल शासन के दौरान एक बार फिर से विस्तृत रूप से जनगणना करने का उल्लेख मिलता है। मुग़ल काल में अकबर के शासन के दौरान जारी की गई प्रशासनिक रिपोर्ट ‘आइन-ए-अकबरी’ में जनसंख्या, उद्योग, धन, भूमि और कई अन्य विशेषताओं से संबंधित व्यापक आंकड़े और जनकारियाँ शामिल किए गए थे।
  4. भारत में निरंतर रूप से आधिकारिक जनगणना 1872 से शुरू हुई है। 2011 में अंतिम बार देश में जनसंख्या के लिए जनगणना कराई गई थी जो कि 1872 से लेकर पंद्रहवीं जनगणना थी और भारत की आजादी के बाद सातवीं जनगणना है।
  5. भारत की 16वीं जनगणना (Census 2021 of India, also the 16th Indian Census) 2021 में आयोजित की जाएगी। भारत की जनगणना 2021 देश की आजादी के बाद आठवीं जनगणना होगी और भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त (Office of the Registrar General and Census Commissioner, India under Ministry of Home Affairs, Government of India) के द्वारा सम्पन्न कराई जाएगी।

भारत में 1881 की जनगणना से लेकर 1941 तक की जनगणना तक जनगणना आयुक्त (Census Commissioners) हुआ करते थे जिनके अधीन जनगणना का आयोजन किया जाता था। 1949 से भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त नियुक्त किए गए।

भारत में जनगणना कराने की ज़िम्मेदारी किसकी होती है

भारत में प्रत्येक दस वर्ष पर जनगणना के संचालन की जिम्मेदारी भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त (Office of the Registrar General and Census Commissioner) के कार्यालय की होती है। रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करते हैं।

यद्यपि जनगणना अधिनियम केंद्रीय कानून का एक हिस्सा है, इसके क्रियान्वयन की योजना में राज्य सरकारों द्वारा सभी स्तरों पर राज्य पदानुक्रम की स्थापना की जाती है। भारत सरकार के केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत जनगणना संगठन (Census Organisation) 1961 से स्थायी रूप से कार्य कर रहा है और देश में जनगणना के कार्यक्रम को लागू करने और  योजना बनाने के लिए जिम्मेदार है।

भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त के नेतृत्व में जनगणना संगठन के पास देश के कुल तैंतीस (राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों) स्थानों में फील्ड कार्यालय हैं। ये स्थायी निदेशालय हैं जो जनगणना कार्यों के निदेशकों की अध्यक्षता में कार्य करते हैं। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच जनगणना के समन्वय के लिए राज्य सरकारें राज्य समन्वयक (State Co-ordinators ) की नियुक्ति करती हैं। भारत में जनगणना संघीय सूची का विषय है (अनुच्छेद 246) और संविधान की सातवीं अनुसूची के क्रम संख्या 69 में सूचीबद्ध है।

भारत में जनगणना की आवश्यकता क्यों है (Why Census?)

किसी भी देश में योजनाएँ और कार्यक्रम प्रमुख रूप से उस देश के नागरिकों के लिए बनाए जाते हैं। देश में रहने वाले व्यक्तियों की विशेषताओं को जाने बिना ना तो प्रभावी रूप से नीतियों को बनाया ही जा सकता है और ना ही उनका प्रभावी रूप से क्रियान्वयन ही किया जा सकता है। श्री गोविंद बल्लभ पंत के अनुसार “वास्तव में इन दिनों में आप जनगणना रिपोर्ट का हवाला दिए बिना कोई गंभीर प्रशासनिक, आर्थिक या सामाजिक कार्य नहीं कर सकते हैं, जो हर अध्ययन की हर जांच का एक अनिवार्य हिस्सा है।

“ जनगणना रिपोर्ट के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होने आगे कहा था कि यहां तक कि “देश में छोटी समस्याओं के समाधान के लिए भी आपको अक्सर जनगणना रिपोर्ट से परामर्श करना होगा “।

जनगणना के कुछ मुख्य उपयोग और जनगणना से होने वाले फायदे नीचे दिये गए हैं:-  

  • देश की आबादी के आकार, वितरण और सामाजिक-आर्थिक, जनसांख्यिकीय और अन्य विशेषताओं के बारे में जनगणना के माध्यम से एकत्र किए गए डेटा का उपयोग देश में कुशल प्रशासन, प्रभावी योजना और नीति बनाने के साथ-साथ सरकार, गैर सरकारी संगठनों (NGOs), शोधकर्ताओं, वाणिज्यिक, विदेशी सरकारों और निजी उद्यमों, आदि द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों के प्रबंधन और मूल्यांकन के लिए किया जाता है।
  • इसके अलावा जनगणना के आंकड़ों के द्वारा छात्र और नागरिक अपने देश की आबादी की विशेषताओं से परिचित होते हैं।
  • जनगणना के आंकड़ों का उपयोग संसद, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के चुनावों के निर्वाचन क्षेत्रों के सीमांकन ( Delimitation) के लिए भी किया जाता है।
  • शोधकर्ता जनसांख्यिकी विकास और जनसंख्या के रुझानों का विश्लेषण करने और अनुमान लगाने के लिए जनगणना डेटा का उपयोग करते हैं।
  • देश में स्थित व्यावसायिक घरानों और उद्योगों के लिए जनगणना के आंकड़े भी बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, जो इन्हे अपने चुने हुए क्षेत्रों में पैठ बनाने, अपने व्यवसाय को मजबूत करने और योजना बनाने के लिए सही और पूर्ण जानकारियाँ प्रदान करते हैं।
  • जनगणना के आंकड़ों का उपयोग अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं जैसे संयुक्त राष्ट्र (United Nations), विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोश, विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व व्यापार संगठन, दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन इत्यादि अपनी नीतियों को बनाने में करते हैं।  

जनसंख्या के बारे में कुछ विशेष तथ्य

  1. भारत की कुल जनसंख्या विश्व की जनसंख्या का लगभग छठवाँ भाग है। भारत में विश्व के भूभाग का केवल 2.4% ही है जबकि भारत में विश्व की कुल जनसंख्या का 17.31% भाग रहता है।
  2. 2011 में भारत की जनसंख्या 1 अरब 21 करोड़ थी जो संयुक्त राज्य अमेरिका, इंडोनेशिया, ब्राजील, पाकिस्तान, बांग्लादेश और जापान की कुल आबादी (1214.3 millions) के लगभग बराबर थी।
  3. भारत की जनगणना 2011 विश्व में अब तक के सबसे बड़े शांति काल अभियानों में से एक थी।
  4. भारत के राज्य उत्तर प्रदेश की जनसंख्या ही 20 करोड़ से अधिक है जो ब्राज़ील की जनसंख्या से भी अधिक है।
  5. मुंबई की लोकल ट्रेनों में रोजाना 75 लाख से अधिक लोग सफर करते हैं। यह न्यूजीलैंड और बुल्गारिया सहित कई देशों की आबादी से भी अधिक है।
  6. 2011 में भारत में 31 करोड़ से अधिक छात्र थे जो रूस की जनसंख्या से लगभग दोगुना है।
  7. एक समय अँग्रेजी शासन का गुलाम रहे भारत में आज अँग्रेजी बोलने वालों की संख्या यूनाइटेड किंगडम की कुल जनसंख्या से भी अधिक है।
  8. भारत में एशिया का सबसे बड़ा स्लम या गंदी बस्ती भी स्थित है। भारत में कुल मिलकर 6.5 करोड़ से अधिक व्यक्ति स्लमों में रहते हैं। यह संख्या थाइलैंड की जनसंख्या के बहुत करीब है।
  9. दुनिया का सबसे बड़ा मानव मेला कुम्भ मेला है जो भारत में ही प्रयागराज में हर 12 वर्षों के बाद लगता है। 2013 में हुए कुम्भ मेले में 12 करोड़ श्रद्धालु आए थे जो मेक्सिको की जनसंख्या के बराबर है।
  10. 2001 से 2011 के बीच भारत की जनसंख्या में जो बढ़ोत्तरी हुई है वह पाकिस्तान की कुल जनसंख्या के लगभग बराबर है। यह विश्व के 5वें सबसे अधिक आबादी वाले देश ब्राज़ील की जनसंख्या थोड़ा सा कम है।
  11. भारत में 2001-2011 पहला दशक है (1911- 1921 के अपवाद के साथ) जिसमें पिछले दशक की तुलना में कम जनसंख्या बढ़ी है।
  12.  2011 में भारत के उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र राज्यों की कुल जनसंख्या 31.2 करोड़ थी जो संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) की आबादी से भी अधिक है।

1872 के बाद से भारत में की जाने वाली भारतीय जनगणना देश में जनसांख्यिकी, आर्थिक गतिविधि, साक्षरता और शिक्षा, आवास और घरेलू सुविधाएं, शहरीकरण, प्रजनन और मृत्यु दर, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, भाषा, धर्म, प्रवासन, विकलांगता और कई अन्य सामाजिक-सांस्कृतिक पर जानकारी का सबसे विश्वसनीय स्रोत मानी  जाती है।

जनगणना के माध्यम से देश में विकास के लिए नई नीतियों को तैयार करने में सहायता मिलती है। इसके अतिरिक्त देश में लागू किए गए सरकारी कार्यक्रम, योजनाएँ, नीतियाँ और अन्य विकासोन्मुख कदम कितने प्रभावी रहे हैं तथा उन क्षेत्रों और समुदायों की पहचान करने में जिन्हें सहायता की आवश्यकता, जनगणना बहुत मदद करती है।

दूसरे शब्दों में भारत के लोगों की विभिन्न विशेषताओं पर विभिन्न सांख्यिकीय जानकारी का सबसे बड़ा एकल स्रोत भारतीय जनगणना होती है। आधुनिक समय में भारतीय जनगणना का इतिहास 130 वर्षों का है जो जनसांख्यिकी, अर्थशास्त्र, नृविज्ञान, समाजशास्त्र, सांख्यिकी और कई अन्य विषयों में विद्वानों और शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े और सामाग्री उपलब्ध कराती है। भारत में जनगणना का आयोजन जनगणना अधिनियम, 1948 के अंतर्गत किया जाता है।

बाद में जनगणना नियम, 1990 भी जारी किए गए। ‘जनगणना’ (‘Census’) शब्द लैटिन भाषा के शब्द ‘सेंसेरे’ (‘Censere’) से लिया गया है जिसका अर्थ है ‘मूल्यांकन या दर’।

26 Comments

  1. lakhan kumar bheel July 5, 2018
    • neelesh July 5, 2018
  2. Dhiraj SHARMA October 10, 2018
    • Arvind Patel October 10, 2018
  3. Ayush Thakur November 2, 2018
    • Arvind Patel November 3, 2018
  4. amarjeet November 28, 2018
  5. Dindyal tandan November 28, 2018
  6. Vikash kumar November 30, 2018
  7. MD Naseem January 8, 2019
  8. kuldeep singh February 4, 2019
  9. Sachin Barnwal February 22, 2019
  10. pragati singh February 24, 2019
    • Arvind Patel February 24, 2019
  11. Dharmesh kumar February 28, 2019
    • Arvind Patel March 1, 2019
  12. mtkesh atoriya March 17, 2019
  13. anshu tiwari April 2, 2019
  14. umesh meena May 5, 2019
    • Arvind Patel May 6, 2019
      • Kamlesh August 18, 2019
        • Arvind Patel August 18, 2019
  15. RINKU.. Singh June 13, 2019
  16. K.d bhai August 12, 2019
  17. Rajnath Bhardwaj October 20, 2019

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