भारत की पहली महिला पायलट कौन है।

महिला पुरुषों से किसी भी मामले में कम नही हैं, इसका जीता जागता उदाहरण यह है कि आज के समय में हर क्षेत्र में महिला पुरुषों से कंधे से कंधे मिला कर काम कर रही हैं। एक समय तक महिलाओं के लिए जो काम कभी असंभव माना जाता था, आज महिलाएं उसमें भी बढ़ चढ़ कर अपना योगदान दे रही हैं। इसी का उदाहरण उड़ान सेवा भी हैं।

bharat ki first woman pilot ka naam kya hai

एक समय इसे केवल पुरुषों से जोड़ कर देखा जाता था। लेकिन मौजूदा समय में पायलट के रूप में महिलाएं भी अपना योगदान दे रही हैं। भारत में पहली बार किसी महिला द्वारा जहाज़ 1936 में उड़ाया गया था। यह कारनामा सरला ठकराल ( Sarla Thakral ) नाम की महिला ने किया था। इसलिए भारत की पहली महिला पायलट होने का गौरव सरला ठकराल के नाम दर्ज है।

सरला ठकराल – भारत की पहली महिला पायलट

  • संक्षिप्त परिचय

सरला ठकराल का जन्म 1914 को नई दिल्ली में हुआ था। इनकी मृत्यु 15 मार्च 2008 को हुई थी। सरला ठकराल का संबंध एक ऐसे परिवार से था जिसमें 9 पायलट मौजूद थे। इनकी शादी भी एक पायलट से ही हुई थी। सरला की शादी 16 साल की उम्र में P D Sharma से हुई थी। P. D. शर्मा पायलट थे तथा Airmail Pilot License हासिल करने वाले पहले भारतीय थे। शर्मा कराची और लाहौर के बीच उड़ान भरते थे।

9 पायलट वाली Family से संबन्ध रखने वाली तथा एक पायलट की पत्नी होने के नाते सरला ठकराल को भी पायलट बनने की प्रेरणा मिली तथा उन्होंने इस ओर कदम बढ़ाना शुरू कर दिया। मेहनत के दम पर इन्हें 21 साल की उम्र में 1936 में Aviation Pilot License मिल गया। इसके बाद इन्होने पहली बार Gypsy Moth नाम के जहाज को उड़ाया। Gypsy Moth का पूरा नाम de Havilland DH.60 Moth था। यह एक दो सीट वाला जहाज़ था जिसका उपयोग 1920 के आसपास किया गया था। इसका उपयोग Training और पर्यटन में किया जाता था।  जब पहली बार सरला ठकराल ने जहाज़ उड़ाया तब तक वह मां भी बन चुकी थीं। लाइसेंस मिलने के समय इनकी एक 4 साल की बेटी भी थी।

इस प्लेन को उड़ाने के साथ ही वह भारत की पहली महिला पायलट बन गयी। तब तक सरला ठकराल को यात्री विमान उड़ाने के लिए License नही मिला था। Commercial Pilot हासिल करने के लिए उड़ान का 1000 घँटे से अधिक का अनुभव होना ज़रूरी था। सरला इस ओर अपने कदम बढ़ा ही रही थीं कि इनकी ज़िंदगी में एक बड़ी दुर्घटना घटी और इनके पति की मौत हो गयी। Captain P D शर्मा की Death एक विमान दुर्घटना में 1939 में हो गयी।

पति की मृत्यु के कुछ समय बाद सरला ठकराल ने Commercial Pilot License हासिल करने के उद्देश्य से फिर से ट्रेनिंग हासिल करने के लिए Application डाली। लेकिन सरला को इस समय कामयाबी नही मिली क्यों कि इस समय तक दूसरा विश्व युद्ध शुरू हो गया और Civil Training को Suspend कर दिया गया। इस स्तिथि में बच्ची की परवरिश और अन्य ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए इन्होंने Commercial Pilot बनने का सपना छोड़ दिया और लाहौर वापस आ कर Mayo School of Art से Fine Art में Diploma किया।

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