भारत की सबसे ऊंची चोटी कौन सी है।

हिमाचल पर्वत श्रेणी दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखला है और दुनिया के सबसे ऊंचे 10 शिखर हिमालय पर ही स्थित है। इन चोटियों में से एक है कचंनजंघा जो कि भारत की सबसे ऊंची चोटी है। इस शिखर की समुद्र तल से ऊँचाई 8,586 मीटर है, जो कि यह विश्व का तीसरा सबसे ऊंचा शिखर है।

bharat ki sabse unchi choti koun si hai

मांऊट एवरेस्ट की लम्बाई के ज्ञात ना होने तक कचंनजंघा को विश्व की सबसे ऊंची चोटी माना जाता था, परन्तु 1852 में जब मांऊट एवरेस्ट की ऊंचाई को मापा गया, तब शोधकर्ताओं ने पाया कि कचंनजंघा मांऊट एवरेस्ट शिखर की ऊंचाई से कम है। इसके पश्चात 1856 में एक ऑफिशियली घोषणा के तहत दुनिया को बताया गया कि कचंनजंघा दुनिया का पहला नहीं बल्कि तीसरा सबसे ऊंचा पर्वत शिखर है।

यह चोटी सिक्किम व नेपाल की सीमा पर स्थित है, जो कि तिब्बत एवं भारत की जलविभाजक रेखा के दक्षिण में स्थित है।

कंचनजंगा तिब्बती भाषा का शब्द है जो तिब्बती मूल के चार शब्दों कांग-छेन-दजों-गा से मिलकर बना है। इसका अर्थ – “महान्‌ हिमानियों के पाँच अतिक्रमण” है। इसके दूसरे नाम कोंगलोचु तथा कुंभकरन लंगूर भी है।

कंचनजंगा का पहला परिपथात्मक मानचित्र 19 वीं शताब्दी के मध्य में एक विद्वान अन्वेषणकर्ता रीनजिन ने तैयार किया था। हालांकि किसी भी प्राथमिक सर्वेक्षण से सदियों पूर्व इस पर्वत की ढलाने चरवाहों और व्यापारियों के लिए जानी-पहचानी थी। इस शिखर पर पहला सफल पर्वतारोहण भारतीय डोंगरा रेजिमेंट के “कर्नल प्रेमचंद” ने किया था। प्रेमचंद के पूर्व भी शिखर पर चढ़ाई हेतु असफल प्रयास किए गए परन्तु सफलता नहीं मिली। 1977 में प्रेमचंद विश्व के सर्वप्रथम पर्वतारोही बने, जिन्होंने कचंनजंघा शिखर फतेह किया। प्रेमचंद को लोग “द माऊंटेन मैन”, दा स्नो टाइगर और दा हीरो ऑफ कंचनजंघा के नाम से भी जानते हैं।

कर्नल प्रेमचंद को पर्वतों से बेहद लगाव रहा है, वे पहाड़ियों पर चढ़ने का प्रशिक्षण भी देते हैं। इन्होंने एवरैस्ट पर चढ़ाई करने वाली पहली भारतीय महिला बिछेंद्री पाल को भी प्रशिक्षित किया था।

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