भारत में सिक्कों का प्रचलन कब शुरू हुआ ? जानिए पूरा इतिहास।

भारत में सिक्कों का प्रचलन कब शुरू हुआ इससे पहले यह जानना महत्वपूर्ण है कि सिक्को के आने से पहले व्यापार में किस तरह की व्यवस्था थी फिर हम  भारत में  सिक्कों के प्रचलन पर लौट चलेंगे। सिक्को के आने के पहले भी व्यापार होता था। भारत के अंदर ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी और उस दौरान  जो व्यवस्था प्रचलित थी उसे वस्तु विनिमय व्यवस्था अथवा barter system  कहते  हैं।

अगर आपको लगता है कि यह व्यवस्था खत्म हो गई है तो ऐसा नहीं है हाल ही में ईरान और भारत के बीच में तेल के बदले वस्तुओं के विनिमय का समझौता हुआ है ,इसका कारण यह था कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान पर कई प्रतिबंध लगा दिए हैं जिसके कारण ईरान की बैंकिंग व्यवस्था तक पहुंच कम हो गई है इसलिए भारत सीधे उसे पैसे नहीं दे पा रहा था परंतु ईरान और भारत ने तेल के बदले वस्तुओं के विनमय पर  संधि की। जो यह बताता है कि barter system आज भी प्रचलित है|

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चलिए अब सिक्कों के प्रचलन पर लौट चलते हैं। इतिहासकारों के अनुसार भारत में सिक्कों का प्रचलन तब चालू हुआ जब भारत में जनपद व्यवस्था थी। इतिहासकारों के अनुसार तत्कालीन भारत में 16 जनपथ  थे।यह सभी जनपद अपने अलग-अलग सिक्के जारी करते थे और इनमें से ज्यादातर सिक्के अलग-अलग तरह की खुदाई किए हुए चांदी के सिक्के हुआ करते थे, इन खुदाई वाले सिक्कों को punch mark coins भी कहा जाता है ।हर जनपद की अपनी एक अद्वितीय पहचान होती थी एवं उनके द्वारा जारी किए गए सिक्कों को देखकर यह सिक्के किस जनपद से आए हैं यह पता किया जा सकता था।सिक्के जारी करने वाले 16 जनपद कुछ इस तरह से थे :

  1. काशी:इसकी राजधानी बनारस थी, यह साम्राज्य गंगा एवं गोमती नदी के बीच में  स्थित था। सरल शब्दों में आज के वाराणसी के आसपास।
  2.  कौशल: इस राज्य की राजधानी सार्वस्ती थी । आज के भारत के संदर्भ में यह साम्राज्य पूर्वी उत्तर प्रदेश में स्थित था।
  3. अंग: इस साम्राज्य की राजधानी चंपा थी। आज के भारत के संदर्भ में यह इलाका बिहार के मुंगेर एवं भागलपुर के आसपास का है।
  4.  मगध:यह उस समय के भारत का सबसे बड़ा साम्राज्य था इसकी प्राचीन राजधानी राजगीर थी। इसके अंदर पटना, गया, शाहाबाद आदि के इलाके आते थे।
  5. विरजी: इसकी राजधानी वैशाली थी यह साम्राज्य बिहार में गंगा के उत्तरी मैदानों पर स्थित था।
  6. मल्ल:इसकी राजधानी कुशीनगर थी। आज के भारत  के संदर्भ में यह इलाका देवरिया, बस्ती ,गोरखपुर का इलाका है।
  7. चेदी : इस साम्राज्य की राजधानी सूक्तिमति थी । आज के भारत के संदर्भ में यह इलाका बुंदेलखंड के आसपास का इलाका था।
  8. वत्स: इसकी राजधानी कौशांबी थी, आज के भारत के संदर्भ में यह इलाका उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर एवं इलाहाबाद के आसपास का इलाका है।
  9. कुरु: इसकी राजधानी इंद्रप्रस्थ था, यह इलाका आज के हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश के सीमांत इलाकों वाला है।
  10. पंचाल: इस साम्राज्य की  दो राजधानियां थी पहली अच्छित्र एवं  दूसरी काम्पिल्य । इसका इलाका आज के भारत के रोहिलखंड का इलाका है।
  11.  मत्स्य: इस साम्राज्य की राजधानी विराटनगर थी। यह साम्राज्य आज के भारत के राजस्थान में  स्थित था।
  12.  सुरासेना: इस साम्राज्य की राजधानी मथुरा थी और इसका इलाका मथुरा के आसपास का इलाका था।
  13.  अस्सका: इस साम्राज्य की capital पोटली थी। यह इकलौता ऐसा साम्राज्य था जो विंध्य के दक्षिण में स्थित था इसलिए  इसे दक्षिण पद भी कहते हैं।
  14.  अवंती: इसकी  दो राजधानियां थी विंध्य के उत्तर में उज्जैन एवं विंध्य के दक्षिण में महिष्मति।
  15.  कंधार: इस साम्राज्य की राजधानी तक्षशिला थी जो आज का बल एवं रावलपिंडी के बीच मौजूद है इसके इलाकों में काबुल रावलपिंडी पेशावर  के इलाके आते थे।
  16. काम्बोजा :इसकी राजधानी राजगीर थी एवं यह आज के भारत के कश्मीर के आसपास के इलाकों में स्थित था।         

 इतिहासकारों के अनुसार भारत में जनपद  ईसा पूर्व 600 के आसपास उपस्थित थे इसीलिए इसी समय सिक्कों का प्रचलन चालू हुआ होगा।ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस समय तक एलेग्जेंडर का भारत पर आक्रमण नहीं हुआ था इस कारण इस तर्क का कोई मतलब नहीं बनता कि भारत में सिक्के बाहर से आए थे|

भारत में चांदी के सिक्कों का प्रचलन कब शुरू हुआ?

ईसा पूर्व 600 के आसपास भारत में जनपद व्यवस्था थी एवं तत्कालीन भारत में कुल मिलाकर 16 जनपद हुआ करते थे। ठीक इसी समय इतिहासकारों के अनुसार भारत में सिक्कों का प्रचलन शुरू हुआ एवं बनाए जाने वाले पहले सिक्के चांदी की धातु से बने हुए थे।चांदी एक ऐसी धातु मानी जाती थी  जिसका मूल्य न सिर्फ भारतीय व्यापारी करते थे बल्कि भारत से व्यापार करने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापारी भी चांदी के महत्व को समझते थे इसीलिए चांदी को सिक्को  की धातु के रूप में चुना गया था, यह बात अलग है कि बाद में चांदी के अलावा कई अन्य धातुओं के सिक्के बनना शुरू हो गए परंतु जब  सिक्को की शुरुआत हुई तो चांदी उनकी मूल धातु हुआ करती थी|

भारत में सोने के सिक्कों का प्रचलन कब शुरू हुआ ?

इतिहासकारों के अनुसार भारत में सोने के सिक्कों का प्रचलन कुषाण सम्राट  विमा कडपसिस के शासनकाल में शुरू हुआ था । कुषाण साम्राज्य तजाकिस्तान ,उज़्बेकिस्तान से लेकर वर्तमान पाकिस्तान एवं उत्तर भारत तक में फैला हुआ था। इसी साम्राज्य के दौरान 100 ईसवी  के आसपास  सोने के सिक्कों का प्रचलन शुरू  होना माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार उस समय भारत में बड़ी मात्रा में सोना मौजूद था जबकि चांदी की कमी थी शायद इसी कारण कई इतिहासकार यह भी कहते हैं कि सोने के 10 सिक्को के बराबर चांदी के 1 सिक्के का मूल्य हुआ करता था, जबकि आज की स्थिति बिल्कुल ही अलग है।

इसके अलावा भारतीय माइथोलॉजी  में ऋग्वेद में गाय एवं सोने (Gold) के सिक्के उपहार के रूप में देने का जिक्र आता है, परंतु इसकी ऐतिहासिक विश्वसनीयता  साबित करना कठिन है इसीलिए भारत में सोने के सिक्कों का प्रचलन 100 ईसवी के आसपास मानना ही उचित होगा।

भारत में सिक्के कहां बनाए जाते हैं ?

 सिक्के बनाने की जगह को  सिक्कों की टकसाल या coin mint कहते हैं। भारत में एक नहीं बल्कि 4  कॉइन  मिंट  है।महाराष्ट्र में मुंबई, पश्चिम बंगाल में कोलकाता, तेलंगाना में हैदराबाद और उत्तर प्रदेश में नोएडा यह चार कॉइन मिंट है। रिजर्व बैंक के आदेश अनुसार इन चारों जगहों पर सिक्के बनाने का कार्य होता है। कौन सा सिक्का किस मिंट से आया है इसे आसानी से पहचाना जा सकता है क्योंकि हर एक मिंट का अपना एक अलग symbol  होता है  और यह कुछ इस तरह से हैं :

  1. मुंबई  मिंट : यहां बने सिक्कों पर आपको  सिक्के जारी करने के वर्ष के नीचे B   या M   बना हुआ दिखाई देगा|
  2. कोलकाता मिंट: यहां बने सिक्कों पर आपको सिक्के जारी करने के वर्ष के नीचे “c”  बना हुआ दिखाई देगा|
  3. हैदराबाद मिंट: यहां बने सिक्के पर आपको जारी करने के वर्ष के नीचे  स्प्लिट डायमंड और इसके अंदर एक डॉट बना दिखाई देगा|
  4. नोएडा मिंट: यहां बने सिक्कों पर आपको जारी करने के वर्ष के नीचे डॉट बना हुआ दिखाई देगा।

भारत में चमड़े के सिक्के किसने चलाए थे ?

 भारत में चमड़े के सिक्के मोहम्मद बिन तुगलक ने चलाए थे|  मोहम्मद बिन तुगलक के बारे में कहा जाता था कि युद्ध के दौरान वह सबसे बेहतरीन योद्धा था परंतु युद्ध के बाहर  वह   उतना समझदार नहीं था| चमड़े के सिक्के जारी करने, राजधानी को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने जैसे  निर्णयों  के लिए वह याद किया जाता है |चमड़े के सिक्के जारी करने के पीछे तर्क दिया गया था कि इतनी बड़ी मात्रा में चांदी एवं सोने  की धातु मौजूद नहीं है, इसीलिए व्यापार को  जारी रखने के लिए  चमड़े के सिक्के बाजार में लाए जा रहे हैं परंतु उससे भी बड़ी गलती मोहम्मद बिन तुगलक ने यह की कि उसने चमड़े के सिक्कों का मूल्य सोने, चांदी के सिक्कों के बराबर ही  रखा |

मोहम्मद बिन तुगलक ने 1324 से 1351 तक राज किया। उसका सारा कार्यकाल विद्रोह दबाते ही बीत गया। मोहम्मद बिन तुगलक ने वैसे तो कई युद्धों में विजय प्राप्त की, परंतु मोहम्मद बिन तुगलक अपनी  गलतियों के लिए ज्यादा मशहूर है इनमें सबसे प्रमुख  राजधानी को दिल्ली से दौलताबाद ले जाने का निर्णय  और चमड़े के सिक्के चलाने का निर्णय  है।

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  1. Shiva June 12, 2019

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