भारत पाकिस्तान का युद्ध कब – कब हुआ था ?

भारत तथा पाकिस्तान विश्व के उन देशों में शामिल है जो कि पड़ोसी मुल्क होते हुए भी अब तक कई बार युद्ध लड़ चुके हैं। इस कारण भारत तथा पाकिस्तान विश्व के सबसे अशांत पड़ोसी मुल्कों में गिने जाते हैं। भारत पाकिस्तान के बीच इसके बंटवारे के बाद से ही तनाव की स्तिथि रही है। यही तनाव कई बार युद्ध का कारण भी बना है। दोनो देशों के बीच खराब रिश्ते होने का एक बड़ा कारण पाकिस्तान द्वारा की जाने वाली कायरतापूर्ण हरकत है। समय समय पर पाकिस्तान अपने यहां से आतंकियों को भारत, हमले के लिए भेजता रहा है। इस कारण दोनो देशों के बीच हमेशा तनाव की स्तिथि रही है।

bharat pakistan ke yudh ki jankari

भारत पाकिस्तान के बीच तनाव का सबसे बड़ा कारण कश्मीर को लेकर है। यही कारण है कि देश की आज़ादी तथा दोनो देशों के बंटवारे के तुरंत बाद ही दोनो देश युद्ध में आ गए थे। इस लेख में बात करेंगे कि भारत पाकिस्तान का युद्ध कब कब हुआ है तथा उस युद्ध में कौन सा देश विजयी रहा है। सबसे पहले बात करते हैं कि भारत पाकिस्तान में कब कब युद्ध हुए हैं।

भारत पाकिस्तान के युद्ध के बारे में जानकारी

भारत पाकिस्तान के बीच 5 मौके ऐसे आए जब तनाव इतने बढ़ गए कि यह युद्ध का कारण बना। जब भी भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध हुए हैं, उसमें एक बात यह रही है कि सभी युद्ध की शुरुआत पाकिस्तान द्वारा की गई थी। मजबूरी वश भारत को आत्मरक्षा के लिए पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देना पड़ा है। अब तक जो भी युद्ध हुए हैं, उसमें भारत के सर पर ही जीत का सेहरा बंधा है।

  1. भारत पाकिस्तान के बीच 1947 का युद्ध

अभी भारत पाकिस्तान की आज़ादी को कुछ ही महीने गुज़रे थे और भारत देश में चीज़ों को व्यवस्थित करने में लगा हुआ था। इसी बीच पाकिस्तान ने 1947 के अक्टूबर महीने में कश्मीर पाने की लालसा में कश्मीर पर हमला कर दिया। भारत तथा पाकिस्तान के बंटवारे के समय तक जम्मू कश्मीर एक आज़ाद राज्य था। उस समय कश्मीर एक मुस्लिम बहुल राज्य था। उस समय कश्मीर पर महाराज हरी सिंह का राज था।

जब दोनो देशों का बंटवारा हुआ था तब जम्मू कश्मीर के महाराजा के पास यह विकल्प था कि वह चाहे तो पाकिस्तान के साथ चले जाएं या भारत के साथ अपने राज्य का विलय कर लें या तो फिर आज़ाद ही रहे। आज़ादी के बाद तक यह स्तिथि बनी रही लेकिन अक्टूबर 1947 में पाकिस्तान को यह लगने लगा कि कश्मीर भारत में मिलने वाला है। इस कारण पाकिस्तान आर्मी समर्थित आतंकी संगठनों ने कश्मीर पर हमला कर दिया। इस हमले के तुरंत बाद ही कश्मीर के महाराजा को अपने एक ज़िले में हार का सामना करना पड़ा। इसके नाद हरी सिंह ने भारत से मदद की गुहार लगाई। इसके बदले भारत ने कश्मीर को भारत में शामिल करने की शर्त रखी।

इसके बाद भारतीय सेना ने युद्ध में भाग लिया तथा पाकिस्तानियों को खदेड़ना शुरू कर दिया। भारतीय सेना के युध्द में शामिल होने के बाद अधिकारी रूप से पाकिस्तान की सेना भी इस युद्ध में शामिल हो गयी। पाकिस्तान की हालत धीरे धीरे खस्ता होने लगी। इसके बाद UN की मध्यस्थता से दोनो देशों के बीच 5 जनवरी 1949 को संघर्ष विराम की घोषणा की गई। इस युद्ध की समाप्ति तक भारत कश्मीर के कश्मीर घाटी, जम्मू तथा लद्दाख समेत दो तिहाई हिस्से पर कब्ज़ा कर चुकी थी। पाकिस्तान के हिस्से में एक तिहाई हिस्सा आया। यह युद्ध 1 साल 2 महीने तथा 2 सप्ताह तक चला। अंततः इसमें भारत की जीत हुई। इस युद्ध में भारत के 1104 सैनिक शहीद तथा 3154 सैनिक घायल हुए थे। इस युद्ध में पाकिस्तान के लगभग 6 हज़ार सैनिक मारे गए जबकि 14 हज़ार के आसपास घायल हुए थे। इस युद्ध को First Kashmir War के नाम से भी जाना जाता है।

  1. भारत पाकिस्तान के बीच 1965 का युद्ध

भारत पाकिस्तान के बीच दूसरी बार भी युद्ध का कारण भी कश्मीर ही बना था। पहले युद्ध में हार मिलने के बाद एक बार फिर पाकिस्तान ने कश्मीर पाने की कोशिश में कश्मीर में अपने आदमियों को भेजना शुरू कर दिया। इसका मुख्य काम कश्मीर में अशांति फैलाना था। इसे ऑपरेशन जिब्राल्टर के नाम से जाना जाता है। भारत को पाकिस्तान के इस मनसूबे की भनक लग गयी। भारत ने समय न गंवाते हुए अपने तीनों ही सेनाओं को इस युद्ध में उतार दिया। इसमें दोनो ही देश अपनी पूरी क्षमता से लड़ रहे थे। दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह विश्व में पहली बार ऐसा मौका था जब किसी युद्ध में इतने बड़े पैमाने पर लड़ाकू विमान, तोप तथा सेना का उपयोग किया जा रहा था। यह युद्ध 17 दिन तक चला। इसमें दोनो ही देशों की ओर से बड़ी संख्या में जान माल का नुकसान हुआ। पाकिस्तान का नुकसान भारत के मुकाबले कई गुणा अधिक था। अंततः 23 सितंबर 1965 को अमेरिका की मध्यस्थता से ताशकंद समझौते के तहत संघर्ष विराम की घोषणा की गई। तब तक पाकिस्तान को काफी नुकसान हो चुका था। इस युद्ध में भारत की एक बार फिर जीत हुई थी।

  1. भारत पाकिस्तान के बीच 1971 का युद्ध

भारत पाकिस्तान के बीच पहला मौका था जब युद्ध कश्मीर को ले कर नही हो रहा था। यह युद्ध मुख्यतः पूर्वी पाकिस्तान को एक नए देश, बांगलादेश के रूप में बनाने को ले कर लड़ा गया था। यूं तो इस युद्ध की शुरुआत पाकिस्तान के ही दो हिस्सों, पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बंगलादेश) तथा पश्चिमी पाकिस्तान (वर्तमान पाकिस्तान) के बीच था। इस युद्ध के दौरान लगभग एक करोड़ पूर्वी पाकिस्तान ( वर्तमान बंगलादेश ) के लोगों को भारत ने शरण दी थी। इससे पाकिस्तान ने बौखलाहट में भारत की सीमा से सटे कई हिस्सों में बम बरसाए।

इसके जवाब में भारत ने तुरंत जवाबी कार्यवाही करते हुए पूरी क्षमता से युद्ध में उतर गया। भारत की तीनों सेनाओं ने मोर्चा संभाल लिया। भारत ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देना शुरू कर दिया तथा पाकिस्तान के सिंध, पंजाब तथा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लगभग 15,010, वर्ग किलोमीटर के हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया। हालांकि भारत ने यह क्षेत्र फिर से 1972 में शांति के कदम के तहत 1972 में हुए शिमला समझौते के तहत वापस कर दिया था। इस युद्ध में भारतीय सेना के पराक्रम के आगे पाकिस्तानी सेना घुटने पर आ गयी। मात्र चंद दिनों में ही भारत ने पाकिस्तान के हज़ारों सैनिकों तथा असलहों को आसमान से ले कर ज़मीन तक नेस्तनाबूद कर दिया।

भारत ने लगभग 90 हज़ार पाकिस्तानी सेना को अपने कब्जे में ले लिया। दूसरे विश्व युद्ध के बाद पहली बार इतनी संख्या में किसी देश ने युद्ध बंदी बनाए थे। इसके बाद पाकिस्तान ने ढाका (अब बंगलादेश की राजधानी) में  16 दिसंबर 1971 को भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के समक्ष समर्पण कर दिया। इस समर्पण के साथ ही बंगलादेश को पाकिस्तान से आज़ादी मिल गयी। इस युद्ध में पाकिस्तान को अभूतपूर्व क्षति उठानी पड़ी थी। इस युद्ध की शुरुआत 3 दिसंबर 1971 को हुई तथा 16 दिसंबर 1971 तक चला। इस तरह यह युद्ध इतिहास का सबसे कम दिन तक चलने वाला युद्ध भी है। हालांकि इस युद्ध में इतने ही दिनों में काफी जान माल की क्षति देखी गयी थी।

  1. कारगिल युद्ध 1999

भारत पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर यह तीसरी बार युद्ध हो रहा था। इस युद्ध की शुरुआत 3 मई को हुई थी तथा 2 महीने 3 सप्ताह और 2 दिन तक चलने के बाद 26 जुलाई 1999 को यह युद्ध समाप्त हुआ। इस युद्ध का कारण यह था कि पाकिस्तान ने एक बार फिर अपनी नापाक चाल के तहत अवैध तरीके से जम्मू कश्मीर के कारगिल में अपने आदमियों को घुसाना शुरू कर दिया। इसका मकसद कश्मीर पर कब्जा करना था। इसकी भनक जल्दी ही भारत को लग गयी। भारत की ओर से जल्द ही इसका मुंह तोड़ जवाब दिया गया। जल्द ही भारत ने एक बार फिर कुछ ही समय बाद सभी क्षेत्र को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद एक बार फिर अमेरिका की मध्यस्थता से संघर्ष विराम की घोषणा की गई।

युद्ध विराम की घोषणा होने तक पाकिस्तान को काफी नुकसान हो चुका था। पाकिस्तानी सेना को 1999 के कारगिल युद्ध में मिली हार इतिहास के करारी हारों में से एक गिनी जाती है। इस युद्ध में पाकिस्तान लंबे समय तक अपने मारे गए सैनिकों की संख्या को छुपाता रहा था। लेकिन कुछ समय बाद नवाज़ शरीफ़ ने स्वीकार किया था कि इस युद्ध में लगभग 4 हज़ार पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे। इस युद्ध में भारत के भी 527 वीर सैनिकों ने भी अपनी शहादत दी थी। इसके अलावा 1363 जख्मी हुए थे।

  1. सियाचिन युद्ध

सियाचिन ग्लेशियर विश्व को सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। जब भारत पाकिस्तान का बंटवारा हुआ तब यह फैसला नही हो सका था कि यह ग्लेशियर किसके हिस्से में जाएगा। ऐसी मान्यता थी कि इतनी ऊंचाई पर स्थित होने तथा बेहद ही ठंडे स्थान में से एक होने के कारण यहां दोनो देश में से कोई भी देश इसको लेकर नहीं लड़ेंगे। लेकिन समय के साथ पाकिस्तान ने अपने सेना को यहां जमाना शुरू कर दिया।

भारत के भनक लगते ही भारत ने ऑपरेशन मेघदूत शुरू किया तथा जल्द ही इस पूरे इलाके को अपने कब्जे में ले लिया। इस ऑपरेशन की शुरुआत 13 अप्रैल 1984 को हुई थी। इसके बाद समय समय पर ऑपरेशन होते रहे थे। 25 नंवबर 2003 को इस क्षेत्र पर संघर्ष विराम की घोषणा की गई थी। इस युद्ध में भी जीत का सेहरा भारत के ही सर बंधा था। यह एक ऐसा इलाका है जहां युद्ध से अधिक, मौसम की वजह से दोनो देशों के सैनिक मरते रहे हैं।

इन 5 बड़े युद्धों के अलावा कई बार ऐसे मौके आए जब भारत पाकिस्तान के बीच तनाव चरम सीमा तक गया और लगा कि अब युद्ध होने वाला है। लेकिन युद्ध टलता रहा है। लगातार युद्धों में भारत के हाथों हार झेलने के बाद भी पाकिस्तान भारत के खिलाफ साजिश करता ही रहा है। जिसका भारत ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया है तथा कई मौके आये हैं जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान में घुस कर भी आतंकी ठिकानों पर हमला किया है तथा आतंकियों को मारा हैं।

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