भारत के सर्वप्रथम कार्यकारी प्रधानमंत्री कौन थे।

भारत मे कानूनी रूप से राष्ट्रपति का पद सबसे बड़ा पद होता है लेकिन राष्ट्रपति के पास अधिक्तर शक्तियां केवल नाममात्र  की ही होती है। संवैधानिक शक्तियों के मामले में भारत में सबसे अधिक शक्तिशाली व्यक्ति भारत का प्रधानमंत्री होता है। भारत को अंग्रेजी हुकूमत से आज़ादी मिलने के बाद ही पहला प्रधानमंत्री मिल गया था। आज़ादी के बाद से अब तक भारत में वर्तमान प्रधानमंत्री को मिला कर कुल 14 प्रधानमंत्री हो चुके हैं।

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भारत के अब तक के प्रधानमंत्री में से कुछ ने अपने पूरे कार्यकाल को सफलतापूर्वक पूरा किया जबकि कुछ ऐसे भी प्रधानमंत्री थे जो कि अपना कार्यकाल पूरा नही कर पाए। इन सब से अलग कुछ ऐसे भी प्रधानमंत्री हुए जो कि किसी विशेष परिस्थिति के कारण सिर्फ कुछ ही दिन के लिए देश के प्रधानमंत्री बनाए गए। विशेष परिस्थिति में बनाए गए प्रधानमंत्री को सामान्यतः कार्यकारी प्रधानमंत्री या कार्यवाहक प्रधानमंत्री ( Acting Prime Minister ) कहा जाता है।

भारतीय संविधान के हिसाब से भारत में प्रधानमंत्री का पद किसी भी हालत में खाली नही छोड़ा जा सकता है। तब इस स्तिथि में, जब चुने गए प्रधानमंत्री की कार्यकाल के दौरान ही मृत्यु हो जाये या किसी और कारण से उन्हें पद छोड़ना पर जाये तथा उनके स्थान पर नए प्रधानमंत्री के चुनाव में समय लगने की संभावना हो तब उस स्तिथि में कार्यवाहक प्रधानमंत्री चुनना पड़ता है। कार्यकारी प्रधानमंत्री कोई मौजूदा कैबिनेट का सदस्य या सदन का कोई सदस्य भी हो सकता है।

भारत में भी कुछ ऐसे मौके आएं जब देश को कार्यवाहक प्रधानमंत्री की ज़रूरत पड़ी। भारत में सबसे पहले कार्यवाहक  प्रधानमंत्री की ज़रूरत तब पड़ी जब देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु हुई। इसके बाद फिर जब लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु हुई तो भी देश को एक कार्यवाहक प्रधानमंत्री मिला था। भारत के सबसे पहले कार्यकारी प्रधानमंत्री गुलज़ारी लाल नन्दा थें। दूसरी बार भी जब लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु हुई, तब भी गुलज़ारी लाल ही कार्यवाहक प्रधानमंत्री चुने गए थे।

गुलज़ारी लाल नन्दा – भारत के पहले कार्यकारी प्रधानमंत्री

  • संक्षिप्त परिचय

गुलज़ारी लाल नन्दा का जन्म सियालकोट, पंजाब ( वर्तमान पाकिस्तान ) में 4 जुलाई 1898 को हुआ था। गुलज़ारी लाल अपने समय के बड़े अर्थशास्त्री  थे तथा यह मज़दूरों के हक़ की लड़ाई लड़ने के लिए जाने जाते थे। इसके साथ ही गुलज़ारी लाल उस समय Congress Party के बड़े नेताओं में गिने जाते थे।

भारत के कार्यकारी प्रधानमंत्री के रूप में सबसे पहली बार गुलज़ारी लाल नन्दा का चुनाव तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की 1964 में हुई आकस्मिक मृत्यु के बाद हुआ था। प्रधानमंत्री के रूप में गुलज़ारी लाल नन्दा ने 27 मई 1964 को शपथ ली तथा 9 जून 1964 को इस पद से हटे। इस तरह  कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में इनका कार्यकाल 13 दिन का रहा। गुलज़ारी लाल नन्दा के बाद देश के दूसरे प्रधानमंत्री के रूप में लाल बहादुर शास्त्री चुने गए।

देश के दूसरे प्रधानमंत्री के रूप में पद संभालने वाले लाल बहादुर शास्त्री भी अपना कार्यकाल पूरा नही कर पाए और रहस्यमयी तरीके से इनकी मृत्यु हो गयी। इनका कार्यकाल 9 जून 1964 से लेकर 11 जनवरी 1966 तक का रहा। इस तरह एक बार फिर देश को कार्यवाहक प्रधानमंत्री की आवश्यकता पड़ी। दूसरी बार भी गुलज़ारी लाल नन्दा ही चुने गए। इस बार भी इनका कार्यकाल 13 दिन का ही रहा था। दूसरी बार यह प्रधानमंत्री के पद पर 11 जनवरी 1966 से ले कर 24 जनवरी 1966 तक रहें। देश को अब तक सिर्फ दो बार ही कार्यवाहक प्रधानमंत्री की ज़रूरत पड़ी है और दोनो ही बार यह ज़िम्मेदारी गुलज़ारी लाल नन्दा ने ही निभाई है।

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