बायनरी नंबर प्रणाली में कितने अंक होते हैं ?

बायनरी नंबर प्रणाली में दो अंक होते हैं। इस प्रणाली के तहत केवल  “0” (zero) तथा “1” (one) ही आते हैं। बस इन्हीं दो नंबर पर ही पूरा बायनरी नंबर सिस्टम आधारित है। बायनरी नंबर प्रणाली को सामान्यतः Base – 2 numeral system या Binary numeral system के नाम से जाना जाता है। बायनरी नंबर प्रणाली का उपयोग सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में किया जाता है। यानी कि विशाल कंप्यूटर से ले कर अधिक्तर कंप्यूटर आधारित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में बायनरी नंबर का ही उपयोग किया जाता है।

इलेक्ट्रॉनिक उपकरण केवल 2 ही अंक समझते हैं। यह अंक 0 तथा 1 है। इसी आधार पर पूरी प्रोग्रामिंग  होती है। इसके उपयोग के लिए इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में Logic gates का उपयोग किया जाता है।

वर्तमान समय में भले ही पूरा कंप्यूटर सिस्टम ही बायनरी नंबर पर आधारित हो, लेकिन बायनरी नंबर सिस्टम का  इतिहास नया नही है।  बायनरी नंबर सिस्टम की शुरुआत  16वीं – 17वीं शताब्दी की ही मानी जाती है। इसकी शुरुआत सबसे पहले यूरोपीय देशों में हुई थी। बायनरी नंबर सिस्टम के इतिहास की जड़े कई अन्य सभ्यताओं से जुड़ी हुई मिलती है। इसमें मिश्र, चीन तथा भारत का इतिहास भी शामिल है।

बायनरी नंबर सिस्टम का उपयोग कंप्यूटर प्रोग्रामिंग में होने से पहले इसका उपयोग गणित में बड़े स्तर पर किया जाता था। शुरू से ही यह गणित का ही हिस्सा रहा था। वर्तमान समय में भी बायनरी सिस्टम गणित का हिस्सा है। लेकिन अब यह गणित की बजाय इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र का अधिक करीबी हिस्सा बन गया है।

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