बल्ब का आविष्कार किसने और कब किया था। Who invented Bulb

विज्ञान ने हमे अपने अविष्कार और अविश्वासनीय निर्माणों के द्वारा अनगिनत सुख – सुविधाओं के साधन प्राप्त करवाएं हैं। आज मानव ने तरक्की के नए-नए आयामों को छुआ है इन्हीं सब आविष्कारों में से बल्ब का आविष्कार बहुत ही महत्वपूर्ण था क्योकि बल्ब की बदौलत ही आज हम रात में भी दिन की तरह देख सकते हैं। प्राचीन समय में हमारे पूर्वज उजाले के लिए आग का उपयोग किया करते थे परंतु आज बल्ब ने इस दिक्कत को दूर कर दिया है जिससे हम रात में भी वह काम बड़ी ही आसानी से कर लेते हैं जिन्हें एक समय पर सोचा नहीं जा सकता था यहां तक कि आज क्रिकेट भी रात में बड़ी आसानी से खेली जा सकती है और अगर हम रात में travel कर पाते हैं तो इसमें भी बल्ब का बहुत बड़ा योगदान है क्योंकि अगर गाड़ियों में light ही ना होगी तो किसी भी वाहन से ट्रेवल करना बिल्कुल भी आसान नहीं है।

bulb ka avishkar kisne kiya tha

यह तो बात हुई कि बल्ब हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है परंतु बल्ब का आविष्कार किसने किया इसकी जानकारी बहुत ही कम लोगों को पता होगी इसलिए आज की इस लेख में हम यह जानेंगे कि bulb ka avishkar kisne kiya और साथ में ही बल्ब के आविष्कारक व्यक्ति के बारे में अवगत कराएंगे जिसने हमें बल्ब से अवगत कराया था।

बल्ब का आविष्कार किसने किया

बल्ब का आविष्कार थॉमस अल्वा एडिशन एवं जोसफ स्वान के द्वारा किया 14 अक्टूबर 1878 में किया गया था यहीं वो नाम है जिन्होंने मानव को रोशनी से अवगत कराया था।

थॉमस अल्वा एडिसन के बारे में सामान्य जानकारी

थॉमस अल्वा एडिसन एक महान एवं Successful विज्ञानिक और विख्यात व्यवसाई थे। उन्होंने अपने जीवन में लगभग 1093 आविष्कार किए यह सिर्फ वही आविष्कार थे जिनका उन्होंने पेटेंट अपने नाम करवाया था।

थॉमस अल्वा एडिसन का जन्म 11 फरवरी 1847 में अमेरिका के मिलान नामक स्थान पर हुआ था जो वर्तमान में अमेरिका की ओहायो राज्य में स्थित है। इस राज्य का गठन मार्च 1803 में किया गया था जिसकी राजधानी कोलंबस है। थॉमस में बचपन से ही intelligent थे इसीलिए उन्होंने तरह-तरह के एक्सपेरिमेंट बचपन से ही किया करते थे। अपने जीवन में बहुत से सक्सेसफुल आविष्कार किए और लगभग उन्होंने अपने जीवन में 14 कंपनियों का भी निर्माण किया जिनमें से कुछ अभी तक चलती आ रही है।

इस महान हस्ती ने 18 अक्टूबर 1931 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया लेकिन इनके आविष्कारों की बदौलत और उनके काम की बदौलत आज भी नहीं पूरी दुनिया बहुत ही सम्मान के साथ याद करती है।

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