कार्बन डाइऑक्साइड की खोज किसने की थी।

स्काटलैंड के चिकित्सक और रसायन वैज्ञानिक जोसेफ ब्लैक (Joseph Black) ने 11 जून, 1754 को सबसे पहले कार्बन डाइऑक्साइड की खोज की थी। कार्बन डाइऑक्साइड एक गंधहीन, रंगहीन गैस है, जो हल्की अम्लीय (Acidic) होती है। यह एक गैर-ज्वलनशील गैस है। अपने प्रयोगों के दौरान जोसेफ ब्लैक ने पाया कि यदि कैल्शियम कार्बोनेट को गर्म किया जाये तो उससे निकलने वाली गैस हवा की तुलना में अधिक भारी होती है। इसके अलावा उन्होने यह भी पता लगाया कि इस गैस (कार्बन डाइऑक्साइड) से आग बुझाई जा सकती है। यह गैस जलने के काम नहीं आती। इस कारण से जोसेफ ब्लैक ने इस गैस को “fixed air” का नाम दिया। जोसेफ ब्लैक का जन्म 16 अप्रैल, 1728 को बोर्डो, फ्रांस में हुआ था।

carbon dioxide ki khoj kisne ki thi

कार्बन डाइऑक्साइड का आणविक सूत्र (molecular formula) CO2 है। कार्बन डाइऑक्साइड के Molecule में एक कार्बन एटम के साथ दो ऑक्सीजन एटम होते हैं। हालांकि कार्बन डाइऑक्साइड मुख्य रूप से गैसीय रूप में पाई जाती है लेकिन -78C तापमान पर यह गैस ठोस रूप में परिवर्तित हो जाती है। तेज गंध और खट्टा स्वाद लिए कार्बन डाइऑक्साइड गैस, वायुमंडल में चौथी सबसे अधिक मात्रा में पाई जाने वाली गैस है। पृथ्वी के वायुमंडल में CO2  गैस 0.04 प्रतिशत मौजूद है। कार्बन डाइऑक्साइड को ठोस अवस्था में शुष्क बर्फ (Dry Ice) कहा जाता है। यह गैस पृथ्वी के कार्बन चक्र (carbon cycle) की प्रमुख घटक है। पेड़-पौधे, प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के द्वारा, हवा से कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करके अपने लिए भोजन का निर्माण करते हैं।

कार्बन डाइऑक्साइड कैसे बनती है?

कार्बन डाइऑक्साइड ज्वलन और जैविक प्रक्रियाओं से बनती है। कार्बन डाइऑक्साइड मुख्य रूप से कार्बन से बने पदार्थों और वस्तुओं के जलने से उत्पन्न होती है। इनमें कार्बनिक पदार्थों और जीवाश्म ईंधन का जलना जैसे कोयला, लकड़ी, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, गोबर, इत्यादि प्रमुख हैं। इसके अलावा यह गैस fermentation, जानवरों और मनुष्यों की श्वसन प्रक्रिया में भी बनती है। उदाहरण के लिए हमारे द्वारा छोड़ी गयी साँस की हवा में 4% कार्बन डाइऑक्साइड मौजूद होती है। यह प्रतिशत हमारे द्वारा सांस में ली गयी कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा से 100 गुना अधिक है। कैल्शियम ऑक्साइड (चूना, सीमेंट बनाने के लिए) का उत्पादन करने के लिए चूना पत्थर (मुख्य रूप से कैल्शियम कार्बोनेट) को जलाने से बड़ी मात्रा में CO2 का उत्सर्जन होता है। अमोनिया (NH3) और हाइड्रोजन का उत्पादन अन्य औद्योगिक गतिविधियाँ हैं जो बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का वातावरण में उत्सर्जन करती हैं। ज्वालामुखी से भी कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है।

कार्बन डाइऑक्साइड से जुड़ीं पर्यावरणीय समस्याएं और ग्रीनहाउस प्रभाव

विश्व के तापमान में तेजी से हो रही बढ़ोतरी ने पृथ्वी की जलवायु में भी परिवर्तन करना शुरू कर दिया है। औद्योगिक क्रांति (1760 से अब तक) के बाद से दुनिया भर में कोयले और अन्य कार्बनिक पदार्थों और जीवाश्म ईंधन के प्रयोग ने वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर को बढ़ा दिया है। हवा में CO2 के बढ़ते स्तर के कारण पृथ्वी की सतह द्वारा अवशोषित की गयी सूर्य की गर्मी वातावरण में ही रह जाती है, क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड पृथ्वी की सतह द्वारा छोड़ी गयी इस ऊष्मा को अवशोषित कर लेती है। इस प्रकार पृथ्वी के वायुमंडल का तापमान बढ़ता जाता है।

ग्लोबल वार्मिंग के कारणों को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है-मानव जनित और प्रकृतिक। इनमें मानव-जनित कारणों में औद्योगिक क्रांति, खनिज का दोहन, वनों की कटाई इत्यादि मुख्य हैं। ग्लोबल वार्मिंग के परिणामस्वरूप होने वाले परिवर्तनों में उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों पर जमी बर्फ के पिघलने के साथ-साथ समुद्रों के जलस्तर का बढ़ना और तूफान की तीव्रता में बढ़ोत्तरी तथा अन्य गंभीर मौसम की घटनाओं में वृद्धि शामिल है। ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभाव ये हैं:

  1. महासागर अम्लीकरण,
  2. तापमान में बदलाव के कारण प्रजातियां का विलुप्त होना,
  3. भारी हिमपात ,
  4. सूखा,
  5. भयंकर गर्मी और लू का चलना,
  6. बाढ़ के साथ भारी वर्षा,
  7. कृषि उत्पादकता में गिरावट, इत्यादि

कार्बन डाइऑक्साइड के उपयोग

कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य ग्रीन हाउस गैसों के कारण ही पृथ्वी का तापमान मनुष्यों के रहने के योग्य बना हुआ है। यह गैस पृथ्वी के कार्बन चक्र में भी बहुत अहम भूमिका निभाती है। इसके अलावा समुद्रों में भी भारी मात्रा में CO2 मौजूद है। कार्बन डाइऑक्साइड के कई महत्वपूर्ण उपयोग हैं:

  • प्रकाश संश्लेषण के लिए पौधों द्वारा उपयोग
  • एक रेफ्रिजरेंट के रूप में
  • रबर और प्लास्टिक बनाने में
  • आग बुझाने के लिए अग्निशामक यंत्रों में
  • शीतल पेय, सोडा वॉटर और बीयर में
  • वेल्डिंग सिस्टम
  • पानी के ट्रीटमंट प्रक्रियाओं में
  • प्लास्टिक और पॉलिमर बनाने में
  • यूरिया बनाने में
  • भोजन को ठंडा रखने के लिए (शुष्क बर्फ के रूप में)
  • इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में सर्किट बोर्ड असेंबली के लिए, सतहों को साफ करने और सेमीकंडक्टर उपकरणों के निर्माण में
  • तेल के कुओं में से तेल निकालने में और तेल की Viscosity कम करने में

इसके अलावा इसका उपयोग कॉफी से कैफीन को अलग करने में तथा कई औद्योगिक प्रक्रियाओं के नियंत्रण में भी होता है।

वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर कितना है?

वैज्ञानिक शोधों से यह निष्कर्ष निकला है कि वर्तमान में वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर पिछले 800,000 वर्षों में किसी भी समय की तुलना में अधिक है। हिम युग के दौरान, कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर 200 भाग प्रति मिलियन (ppm) के आसपास था। 2013 में यह बढ़कर 400 ppm के स्तर को भी पार कर गया। वर्तमान में (2018 में ) यह 410 ppm के स्तर पर है। CO2 के स्तर में हुई यह बढ़ोत्तरी मनुष्यों के कारण ही हुई है।

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