चंद्रशेखर आज़ाद की मृत्यु कैसे हुई थी।

23 जुलाई 1906 को मध्यप्रदेश के भुवरा गाँव में जन्मे चंद्रशेखर आज़ाद के बचपन का नाम चंद्रशेखर तिवारी था। यह आज़ाद के नाम से भी जाने जाते थे। चंद्रशेखर आज़ाद को दुनिया उनकी वीरता और बहादुरी के लिए जानती है। आज़ादी की लड़ाई में इनका सराहनीय योगदान रहा था। इनकी बढ़ती लोकप्रियता और क्रांतिकारी विचार अंग्रेज़ो के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर रहा था। इसी कारण अंग्रेजी सरकार ने इनको ज़िंदा या मुर्दा पकड़ने की घोषणा कर दी थी।

chandra aajad ki death kaise hui thi

चंद्रशेखर आज़ाद के पीछे हर पल अंग्रेज़ी सरकार नज़र बनाए हुए थी और इन्हें हर हाल में आज़ाद को पकड़ना चाहते थे। इसी क्रम में 7 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के Alfred Park आज़ाद अपने एक मित्र के साथ बैठ कर कुछ बाते कर रहे थे। आज़ाद के इस Park में मौजूद होने की खबर किसी ने अंग्रेज़ी हुकूमत को दे दी। पुलिस ने आज़ाद को Park में ही चारो ओर से घेर लिया फिर लंबी गोली बारी के बाद अंतिम गोली बचने पर खुद को देश के लिए शाहिद कर लिया था।

क्या हुआ था उस दिन Alfred Park में ?

चंद्रशेखर आज़ाद उस समय तक एक बड़े क्रांतिकारी बन चुके थे। इन्होंने अंग्रेज़ी सरकार में खिलाफ मुहिम तेज़ कर दी थी और कई बड़े कारनामे अंजाम दे चुके थे। आज़ाद की कोशिशों ने क्रांतिकारीयों में एक नया जोश भड़ दिया था। उस दौरान ही 27 फरवरी 1931 को चंद्रशेखर आज़ाद अपने एक दोस्त सुखदेव राज के साथ Alfred Park में बैठ कर बाते कर रहे थे। इनकी पार्क में मौजूदगी की खबर पुलिस को लगते ही पुलिस ने धावा बोल दिया।

पुलिस और आज़ाद के बीच मुठभेड़ शुरू हो गयी। इस दौरान आज़ाद ने अपने मित्र सुखदेव राज को वहां से जाने के लिए कहा और वह खुद उनके आगे आ कर पुलिस से मुकाबला करते हुए तीन पुलिस वालों को अकेले ही मौत के घाट उतार दिया साथ ही कई अन्य पुलिस वाला बुरी तरह घायल हो गया। इसका फायदा उठाते हुए आज़ाद के मित्र वहां से निकलने में कामयाब हुए।

सुखदेव राज को बचाने के दौरान ही आज़ाद घायल भी हो गए। इसके बाद भी आज़ाद पेड़ के पीछे से लगातार गोलियां चलाते रहे। जब एक गोली इनके पास बची तो इन्होंने वह गोली अपने आप को मार ली। ऐसा उन्होंने इस लिये किया था क्यों की इन्होंने प्रण लिया था की अंग्रेज़ी हुकूमत इन्हें कभी ज़िंदा नही पकड़ पाएगी। खुद की ज़िंदगी को देश के नाम करते हुए हुए आज़ाद वीरता और बहादुरी का उत्कृष्ट नमूना पेश कर गए।

किसने अंग्रेजों को आज़ाद के पार्क में मौजूद होने खबर दी थी?

इस बारे में कोई आधिकारिक सूचना मौजूद नही हैं। अंग्रेजों ने अपने ख़बरीयों की जानकारी सार्वजनिक नही की। इसके बावजूद कुछ श्रोतों से उनके बारे में पता चलता है, हालांकि वह प्रमाणित नही है। उन दिनों ब्रिटिश सरकार के Secret Service में काम करने वाले धर्मेंद्र गौड़ के लेखों से पता चलता है की चन्द्रशेखर आज़ाद के Alfred Park में मौजूद होने की सूचना वीरभद्र तिवारी और यशपाल नाम के व्यक्ति ने दी थी। ये दोनो अंग्रेजों के लिए मुखबिरी का काम किया करते थे।

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