चन्द्रशेखर सिंह का जीवन परिचय – Chandra Shekhar Singh Biography In Hindi

  • श्री चन्द्रशेखर सिंह
  • कार्यकाल :- 10 नवंबर 1990 – 21 जून 1991
  • जन्म :- 1927
  • मृत्यु :- 2007
  • राजनीतिक पार्टी :- कॉंग्रेस, जनता दल
  • निर्वाचन क्षेत्र :- बलिया

Chandra shekhar singh biography in hindi

Young Turk के नाम से मशहूर चन्द्र शेखर Janata Party से संबंध रखने वाले ऐसे नेता थे जिन्हे आचार्या Narendr Dev (नरेंद्र देव) का करीबी माना जाता था। चंद्र शेखर भारत के 9th (नवें) प्रधानमंत्री थे। भारत की राजनीति में Chandra Shekhar पारंपरिक राजनीति से हटकर व्यावहारिक और विद्रोही भूमिका में नज़र आते हैं। प्रधानमंत्री के रूप में चंद्र शेखर का कार्यकाल संक्षिप्त था किन्तु उसमें Socialism (समाजवाद) की भावना गहराई से निहित थी। Socialism की इस भावना ने ही उनके political जीवन को एक अलग दिशा प्रदान की थी। चन्द्र शेखर भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे जिन्होंने इससे पहले केंद्र सरकार या किसी भी राज्य सरकार में कोई भी मंत्री पद नहीं संभाला था। वे भारत की राजनीति में सीधे प्रधानमंत्री बनने वाले पहले व्यक्ति थे।

चंद्रशेखर सिंह का प्रारम्भिक जीवन

1 जुलाई 1927 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिला के गाँव इब्राहिमपट्टी में जन्म लेने वाले श्री चन्द्र शेखर एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते थे। राजनीति के प्रति चंद्रशेखर सिंह का झुकाव student life से ही हो गया था। Allahabad University (इलाहाबाद विश्वविद्यालय) में रहते हुए ही आचार्य नरेंद्र देव के विचारों और समाजवाद से बहुत प्रभावित हुए। चन्द्र शेखर सिंह ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से सन 1950 में Political Science विषय में post graduation की डिग्री हासिल की थी।

राजनीति में आगमन

उस दौर में भारत में socialistic आंदोलन का प्रभाव बहुत था जिसके चलते देश के तमाम बुद्धिजीवी और छात्र समाजवादी thinking से जुड़ जाते थे। Chandra Shekhar भी इलाहाबाद विश्वविद्यालय से education पूरी करने के बाद इस समाजवादी आंदोलन में कूद पड़े। इस समय उन्हें आचार्य Naredra Dev के सानिध्य में रह कर उनके चिंतन को आत्मसात करने का मौका मिला। उन्हें जिला प्रजा सोशलिस्ट पार्टी की Balia (Uttar Pradesh) इकाई के Secretary के तौर पर मनोनीत किया गया।

भारतीय राजनीति में क्रांतिकारी और फायर-ब्रांड आदर्शवादी नेता की पदवी पा चुके चंद्रशेखर जल्द ही उत्तर प्रदेश की प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के संयुक्त सचिव चुन लिए गए। 1955-56 में वे इस पार्टी के उत्तर प्रदेश इकाई के महासचिव बना दिये गए। इस प्रकार राजनीति में चंद्रशेखर का ग्राफ़ तेज़ी से बढ़ता गया। 1962 में चंद्र शेखर को  उत्तर प्रदेश से राज्यसभा में सांसद के रूप में चयन किया गया। किन्तु जल्द ही सोशलिस्ट पार्टी में आपसी मतभेद के कारण दरार आ गयी और उसमें विभाजन हो गया। जनवरी 1965 में इस विभाजन के बाद चंद्र शेखर Congress Party में आ गए। उनके राजनैतिक कद के कारण काँग्रेस पार्टी में भी उन्हे महत्वपूर्ण पदों को संभालने की ज़िम्मेदारी दी गयी। इसी क्रम में चंद्र शेखर जी को 1967 में कांग्रेस संसदीय दल का महासचिव का पद दिया गया।

एक सांसद के रूप में चंद्र शेखर का प्रभाव बहुत व्यापक था। संसद में उन्होने समाज के पिछड़े और दलित तबके के लिए सामाजिक न्याय की बात उठाई। इसके साथ ही उन्होने देश में Money और Power के केन्द्रीयकरण के खिलाफ भी मुहिम शुरू की जिसके कारण वे कुछ particular लोगों के निशाने पर भी आए। एक तरफ देश में बड़े व्यापारिक और औद्योगिक घरानों की दौलत बढ़ती जा रही थी तो दूसरी तरफ गरीब और पिछड़े वर्ग के लोग हासिए पर आ चुके थे। ऐसे में Chandra Shekhar ने society में परिवर्तन के लिए उन नीतियों की माँग की जिससे सामाजिक न्याय (Social Justice) हासिल किया जा सके।

चंद्रशेखर को Young Turk”(यंग तुर्क’) नेता के रूप जाना जाता है क्योंकि उन्होने निहित और individual profit के खिलाफ आवाज उठाई तथा integrity, साहस और honesty के साथ बिना किसी से डरे अपना पक्ष रखते रहे। राजनैतिक जीवन के साथ साथ चंद्र शेखर ने अपनी कलम से भी लोगों के बीच पहुँचने की कोशिश की। उन्होने 1969 में दिल्ली में  Young Indian (“यंग इंडियन “) नाम के एक Weekly (साप्ताहिक पत्र) का प्रकाशन किया तथा उसके Editor (संपादक) के रूप में देश और समाज के ऊपर अपनी राय प्रकाशित करते रहे। Young Indian में प्रकाशित होने वाला Chandra Shekhar जी के द्वारा लिखा गया Editorial (संपादकीय) उस समय का सबसे ज्यादा उद्धृत किये जाने वाले लेखों में से एक हुआ करता था।

जून 1975 से मार्च 1977  के बीच इन्दिरा गांधी द्वारा लगाई गयी इमरजेंसी के दिनों में प्रैस के ऊपर पाबंदी लगा दी गयी थी, जिसके चलते यंग इंडियन पत्र को भी बंद करना पड़ा। किन्तु 1989 में इसके नियमित प्रकाशन पुनः प्रारम्भ हो गया। किन्तु चंद्रशेखर के विचारों में व्यक्तिवादी राजनीति के लिए कोई स्थान नहीं था। इसी कारण इन्दिरा गांधी के अत्यधिक शक्ति के केन्द्रीकरण और सत्तावादी नीतियों से वे व्याकुल हो उठे। इन्दिरा गांधी से मतभेदों के चलते उन्हे कांग्रेस पार्टी के भीतर असंतोष का केंद्र बिंदु माना जाने लगा। काँग्रेस से बढ़ते मतभेदों के बीच वे अपनी Idealistic राजनीति और विचारधारा के कारण Jai Prakash Narayan से बहुत प्रभावित हुए। किन्तु Congress Party में उनके रहने से असंतोष बढ़ता जा रहा था। उनके द्वारा Democratic (लोकतांत्रिक) मूल्यों और सामाजिक परिवर्तन के लिए आवाज उठाने के कारण इन्दिरा गांधी ने जब 25 June, 1975 को Emergency (आपातकाल) घोषित किया, तो उन्हें आंतरिक सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया। इन्दिरा गांधी का यह कदम लोकतान्त्रिक रूप से अप्रत्याशित था क्योंकि Chandra Shekhar उस समय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति और Working Committee के सदस्य बने हुए थे।

प्रधानमंत्री श्री चंद्रशेखर

जब V. P. Singh (विश्वनाथ प्रताप सिंह) ने प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया तो चंद्रशेखर ने Communist पार्टियों और BJP (भाजपा) के साथ मिलकर सरकार बनाई। इसमें काँग्रेस पार्टी ने उन्हे बाहर से समर्थन भी दिया। चंद्र शेखर ने 10 नवम्बर 1990 के दिन भारत के नौवें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। किन्तु जल्द ही काँग्रेस पार्टी ने चंद्रशेखर के ऊपर Congress के नेता श्री Rajiv Gandhi के ऊपर Spying (जासूसी) करने का आरोप लगा कर उनकी सरकार से Support (समर्थन) वापस ले लिया। काँग्रेस द्वारा समर्थन वापस लेने के बाद चंद्रशेखर ने 6 मार्च, 1991 को अपना इस्तीफा दे दिया। वे 21 जून 1991 तक भारत के प्रधानमंत्री के पद पर बने रहे।

एक सांसद के रूप में चंद्रशेखर का संसदीय क्षेत्र, उत्तर प्रदेश का बलिया जिला था। बलिया से चंद्रशेखर 1977 के चुनावों से लेकर 8 बार लोक सभा सांसद रहे। उन्हे लोक सभा चुनावों में केवल एक बार पराजय का मुंह देखना पड़ा था जब 1984 के चुनावों में उन्हे कांग्रेस (I) के श्री जगन्नाथ चौधरी ने हराया था। चंद्र शेखर को संसदीय मर्यादा और प्रथाओं का पालन करने वालों में गिना जाता है। संसदीय गरिमा को बनाए रखने के कारण ही उन्हे 1995 में आउटस्टैंडिंग सांसद के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

जीवन के अंतिम दिनों में चंद्रशेखर एक प्रकार के कैंसर से पीड़ित हो गए थे। 80 वर्ष की उम्र में 8 जुलाई, 2007 को नई दिल्ली में चंद्रशेखर का निधन हो गया। उनके दो पुत्र हैं।

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