chandrayaan-2 कब लांच किया गया था ?

Chandrayaan-2 अथवा चंद्रयान द्वितीय  इसरो अथवा Indian Space Research Organization (Isro) का एक मिशन था । चंद्रयान द्वितीय चंद्रयान प्रथम का दूसरा हिस्सा था जो कि भारत का पहला lunar mission था । chandrayaan-2  को 22 जुलाई 2019 को सतीश धवन स्पेस सेंटर से लांच किया गया था । चंद्रयान 30 अगस्त 2019 को चंद्रमा की कक्षा में पहुंचा । पहुंचने के तुरंत बाद इसने चंद्रमा का चक्कर लगाना शुरू कर दिया ।

इस के चक्कर लगाने का कारण यह था कि वह सही स्थिति में आना चाहता था ताकि विक्रम लेंडर को चंद्रमा  पर स्थापित किया जा सके । जिस जगह इसरो इसे स्थापित करना चाहती थी उसे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव का इलाका कहा जाता है । इसको चंद्रमा में उतारने के लिए 6 सितंबर 2019 की तारीख तय की गई परंतु दुर्भाग्यवश तकनीकी खराबी के कारण इसे चंद्रमा की जमीन पर नहीं उतारा जा सका ।  

chandrayaan 2 kab launch hua tha

अब जब आपको इस प्रश्न का जवाब मिल गया कि chandrayaan-2 कब लांच किया गया था  ? तो आगे बढ़ते हैं और जानते हैं चंद्रयान द्वितीय के  चार  प्रमुख भागो  के बारे में जिन्हें हम Launcher ,orbitor    प्रज्ञान  रोवर ,विक्रम लैंडर के नाम से जानते हैं।

Launcher :  chandrayaan-2 को पृथ्वी से लांच करने के लिए जीएसएलवी  के एक version  का उपयोग किया गया  जिसे GSLV MK-III  के नाम से जाना जाता है । जीएसएलवी को  जियोसिंक्रोनस सैटलाइट लॉन्च व्हीकल   के नाम से  भी जाना जाता है । यह 4 टन तक के अंतरिक्ष यान को उसकी कक्षा में स्थापित करने की क्षमता रखता है । Chandrayaan-2 के लिए इस व्हीकल की 3-stage तय की गई थी ।

Orbitor : चंद्रयान Orbitor के अंदर ही विक्रम लेंडर और प्रज्ञान रोवर रखे गए थे जिन्हें सॉफ्ट लैंडिंग के पश्चात चंद्रमा में ही रहना था । Orbitor पृथ्वी में इसरो के केंद्र से संपर्क साधने की क्षमता रखता था इसके साथ ही यह चंद्रमा की कक्षा में अपने आप को स्थापित रखने की क्षमता भी रखता था ।

विक्रम लेंडर : इसका वजन लगभग 1471 किलोग्राम था । इसका लक्ष्य था Orbitor  से निकलकर चंद्रमा  की धरती में सॉफ्ट लैंडिंग करना और इसके पश्चात अपने अंदर रखे हुए प्रज्ञान रोवर को बाहर निकालना । इसका नाम विक्रम , इसरो की नींव रखने वाले डॉ विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया था । वैज्ञानिकों के अनुसार इसे  चंद्रमा के 1 दिन के लिए कार्य करना था जो पृथ्वी के 14 दिन के बराबर होता है । परंतु दुर्भाग्यवश सॉफ्ट लैंडिंग नहीं हो पाई और विक्रम लेंडर अपना उद्देश्य पूरा नहीं कर पाया ।

प्रज्ञान रोवर : विक्रम लेंडर के अंदर ही प्रज्ञान रोवर रखा हुआ था जिसका वजन लगभग 27 किलोग्राम था । यह  6 पहियों वाला एक रोबोटिक रोवर था।  जो चंद्रमा में घूम कर इसरो के केंद्र को इस के वातावरण की जानकारी देता । क्योंकि हम पहले ही बता चुके हैं कि विक्रम लेंडर अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर पाया इसीलिए प्रज्ञान रोवर  कभी अपना काम शुरू ही नहीं कर पाया ।

chandrayaan-2 अपने मिशन के केवल अंतिम भाग को पूरा नहीं कर पाया उसके अलावा उसने अपने सारे उद्देश्य पूरे किए । और इसके साथ ही भारत उन देशों में शामिल हो गया जो चंद्रमा पर जाने का दावा कर सकते हैं । इसी अभियान के बाद भारत ने अंतरिक्ष में इंसान भेजने का निर्णय लिया है । हमें उम्मीद है कि चंद्रयान 2 के विषय में आपके सभी प्रश्नों के उत्तर मिल गए होंगे । ऐसे ही अन्य रोचक जानकारियों के लिए हमारे साथ बने रहे ।

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