रसायन शास्त्र (Chemistry) के जनक कौन थे। father of chemistry

क्या आप जानते है की रसायन शास्त्र के जनक कौन है क्योंकि हम अक्सर तरल, ठोस तथा गैस के बारे में चर्चा करते है। जिनका वर्णन अक्सर रसायन शास्त्र विषय मे किया जाता है। यह विषय विज्ञान की एक अहम शाखा है। जिसको हम एक मुख्य विषय के रूप में अपने शुरुआती दिनों से पढ़ते आते है। एक student होने के नाते आपको इस विषय की जानकारी होनी चाहिये, कि यह वास्तव में क्या है? एवं उसमे किस बातों का समावेश है। यह वह विषय है, जिसमे पदार्थों के संघटन, संरचना , कणों के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया के दौरान उनमें ऊर्ज़ा परिवर्तनो का अध्ययन शामिल है।

chemistry ke janak kaun hai

सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि यह इस विषय के अंतर्गत नाभिकीय क्रियाओं से लेकर परमाणु तक के रोचक तथ्य, जानकारी तथा अहम पहलू होते है। लेकिन बात यहाँ आकर रुक जाए है कि उनका जनक कौन होगा ? इसने इन सब बातों की खोज किस कारण की थी एवं वर्तमान मे उनका महत्व क्या है। वह महान इंसान कौन था , जिसने सबसे पहले इस सब को जाना। इन्ही सब प्रश्नों के उत्तर हम इस article मे जानेंगे कि कोशिश करेगे।

रसायन शास्त्र के जनक का नाम क्या है

विज्ञान की इस मुख्य शाखा के जनक “एंटोनी लॉरेंट लेवईजिएयर” को माना जाता है। उनका पूरा नाम Antoine Laurent De Lavoisier था। विज्ञान की तीन मुख्य शाखायो में देखा जाये तो जीवविज्ञान मे अरस्तू, भौतिकी मे सर आइज़क न्यूटन का एवं  रसायन शास्त्र में एंटोनी का योगदान समतुल्य है। तीनों व्यक्ति इन तीनों विषय के परिपेक्ष्य में लगभग समान थे। लॉरेंट के द्वारा लिखी गई एक किताब “तत्वों के रसायन ” के कारण उनको आधुनिक रसायन शास्त्र का पिता कहा जाने लगा। लॉरेंट ही वह प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने बताया कि, हमारे वायुमंडल में व्याप्त हवा के दो मुख्य घटक ऑक्सीजन एवं नाइट्रोजन है।

रसायन शास्त्र के जनक ‘लॉरेंट” का संक्षिप्त परिचय

“एंटोनी लॉरेंट लेवईजिएयर” का जन्म 26 अगस्त 1743 को फ्रांस के पेरिस जैसे खूबसूरत शहर में हुआ था। उनका पिता पेशे से एक वकील थे, इसलिए उनके घर की आर्थिक स्थिति बेहतर थी। जब लॉरेंट 5 वर्ष के थे तभी उनकी माता का निधन हो गया था। पिता की तरह बनने के लिए उन्होने पहले तो कानून (law) की डिग्री ले ली परंतु अपने कॉलेज के दौरान विज्ञान के प्रति उनके प्रेम ने उन्हें इस रोचक विषय के तरफ मोड़ दिया। पहले तो उन्होंने कई सरकारी पदों पर काम किया औऱ 1764 मे Royal Academy of Science के लिए चुने गये।

उसके बाद 1775 मे उन्होंने पेरिस मे अपनी एक प्रयोगशाला स्थापित की, जिसमे वह अपने कई महत्वपूर्ण खोज करते रहते थे। फ्लॉजिस्टन सिद्धांत को गलत मानने वाले लॉरेंट यह भी बताया कि दहन क्रिया मे ऑक्सीजन प्रमुख भूमिक निभाता है। लॉरेंट ने तत्वों को अलग करने तथा रासायनिक यौगिको को तोड़ने में बहुत समय बिताया। बाद मे उन्होंने ही हाइड्रोजन को नाम दिया।

उन्होंने इस सत्य को भी दुनिया के सामने प्रकट किया कि सल्फर एक तत्व है ना कि एक यौगिक। तथा पानी हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन से बना एक यौगिक है। जिसको सारे वैज्ञानिक एक तत्व बताते थे। इस सब के अलावा भी उन्होंने कई वर्षों तक फ्रांसीसी गनपाउडर आयोग के आयुक्त के रूप में कार्य किया। 1789 मे शुरू हुई फ्रांसीसी क्रंति के चलते उनकी 8 मई 1794 में 50 वर्ष की आयु में मौत हो गई। जिनको बाद में Catacombs of Peris मे दफनाया गया।

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