चिपको आंदोलन क्या था कब शुरू हुआ था ?

चिपको आंदोलन अथवा Chipko movement 70 के दशक का एक बहुत ही प्रसिद्ध आंदोलन है ।  इस आंदोलन ने न सिर्फ भारत में बल्कि पूरी दुनिया में लोगों को प्रकृति के प्रति जिम्मेदार होना सिखाया ।  अगर हम इस आंदोलन के शुरू  होने के सही वर्ष को जानना चाहते हैं, तो  उसका जवाब होगा कि चिपको आंदोलन 1973 से शुरू हुआ ।  आप जब आपको इस सवाल का जवाब मिल गया कि ,चिपको आंदोलन क्या था कब शुरू हुआ था ?  तो इस आंदोलन से जुड़े अन्य तथ्यों से आपको अवगत कराते हैं ।

चिपको आंदोलन की कहानी : 1970 में देश को आजाद हुए 23 साल ही हुए थे । इस समय तक महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांत लोगों के दिलों में जिंदा थे । तभी 1970 में चिपको आंदोलन की शुरुआत हुई जिसका आधार महात्मा गांधी के  द्वारा दिया गया अहिंसा का पाठ  था । इस आंदोलन का उद्देश्य जंगलों को तबाह होने से बचाना था । इस आंदोलन में भाग लेने वाले लोग कटने वाले पेड़ों से  जाकर चिपक जाते थे और पेड़ काटने वालों से कहते थे कि अगर उन्हें पेड़ काटना है तो इसके साथ उनको भी काटना पड़ेगा ।

chipko andolan kab aur kahan hua

इसी कारण इस आंदोलन का नाम चिपको आंदोलन पड़ा । इस आंदोलन की शुरुआत तब के उत्तर प्रदेश और आज के उत्तराखंड के चमोली जिले से  1973 में हुई थी । आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इस आंदोलन का नेतृत्व महिलाएं कर रही थी । इस आंदोलन की शुरुआत ग्रामीण महिलाओं ने की थी और धीरे-धीरे यह आंदोलन  तत्कालीन उत्तर प्रदेश से निकलकर पूरे देश में फैल गया और पूरे देश में इसका नेतृत्व महिलाएं ही कर रही थी  ।

एक समय ऐसा भी आया जब इस आंदोलन का नेतृत्व सुंदरलाल बहुगुणा कर रहे थे । जिन्हें हिमालय के क्षेत्र में प्रकृति के activist  के रूप में  प्रसिद्धी प्राप्त  थी । इस आंदोलन को सबसे बड़ी सफलता तब मिली जब तत्कालीन उत्तर प्रदेश की सरकार ने 1980 में यह आदेश पारित किया कि, अगले 15 वर्षो तक जंगलों में किसी तरह की कटाई नहीं की जाएगी ।  उत्तर प्रदेश की शुरुआत के बाद हिमाचल प्रदेश , कर्नाटक, राजस्थान, बिहार, पश्चिमी घाट और विंध्याचल के लिए भी ऐसे ही कानून बनाए गए ।

 आज जब हम Climate change एवं global warming की बात करते हैं तो हम यह भूल जाते हैं कि प्रकृति के प्रति समर्पण एवं इसके संरक्षण की शुरुआत भारत के चिपको आंदोलन से ही हुई थी । इसी आंदोलन ने यह समझाया कि जब तक प्रकृति एवं इंसानों के बीच का संतुलन बना रहेगा तब तक जीवन आसान रहेगा और जैसे ही यह संतुलन बिगड़ेगा इंसान का जीवन कठिन होता जाएगा ।  प्रकृति के प्रति नीरसता  के परिणाम स्वरूप ही आज हम चारों ओर प्रदूषण देख रहे हैं ।  वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले वर्षों में हर आठवीं मौत प्रदूषण के कारण होगी । 

अगर दुनिया ने चिपको आंदोलन से सीखा होता तो वह आज इस  जगह पर नहीं होते बल्कि एक प्रदूषण मुक्त वातावरण में अपनी अगली पीढ़ी को बड़ा कर रहे होते ।  हमें उम्मीद है कि चिपको आंदोलन से जुड़े हुए प्रश्नों के जवाब आपको मिल गए होंगे ।  ऐसी ही अन्य रोचक जानकारियों के लिए हमारे साथ लगातार बने रहे ।

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