दिल्ली की स्थापना कब और किसने की थी।

दिल्ली भारत का एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक केन्द्र है। दिल्ली भारत का केंद्र शासित प्रदेश है, भारत की राजधानी “नई दिल्ली” भी इसमें शामिल हैं। 1947 को भारत की स्वतंत्रता के पश्चात इसे भारत की राजधानी घोषित किया गया था। यमुना नदी के किनारे बसा हुआ यह शहर क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे विशाल महानगर है, जो लगभग 1484 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।

delhi ki stapna kisne ki thi

दिल्ली का इतिहास बहुत पुराना है। 1450 ई. पू. महाभारत काल में दिल्ली का नाम इन्द्रप्रस्थ था जिसका निर्माण पाण्डवों ने करवाया था । दिल्ली का इतिहास सिन्धु सभ्यता से जुड़ा हुआ है। लगभग 300 ई. पू. मौर्य काल के आरम्भ से यहां नगरों का विकास होना आरम्भ हुआ था। प्राचीन काल से ही दिल्ली राजनैतिक उथल-पुथल का केंद्र रही है। दिल्ली पर अनेक मौर्य, खिलजी, तुगलक और मुस्लिम शासकों ने शासन किया है। कहा जाता है कि दिल्ली सात बार बसी और उजड़ी है। दिल्ली को तोमर राजा अनंगपाल और राजपूत शासक पृथ्वीराज चौहान की दिल्ली कहा जाता है। दिल्ली पृथ्वीराज चौहान की राजधानी थी, जिसका नाम पिथौरागढ़ था। इन्हीं के दरबारी कवि चंद बरदायी ने अपने साहित्य “पृथ्वीराज रासो” में तोमर राजा “अनंगपाल” को दिल्ली का संस्थापक कहा है। दिल्ली पर 900 से 1200 ई. तक तोमरो का शासन था।

दिल्ली के विषय में प्राचीन काल से ही यह कहावत रही है, कि दिल्ली पर शासन जिसका भारत पर हुकूमत उसकी। इसीलिए राजाओं ने दिल्ली को अपना बनाने के लिए आपस में संघर्ष किए। वर्तमान में भी यह बात कायम है। क्योंकि भारत सरकार की समस्त शक्तियां केंद्र सरकार के पास है, और दिल्ली भारत की राजधानी होने के कारण केंद्र सरकार के मुख्यालय दिल्ली में ही स्थित है। दिल्ली के विकास में सबसे प्रमुख कारण उसकी भौगोलिक स्थिति रही है। प्राचीन काल से ही दिल्ली का मध्य एशिया, उत्तर-पश्चिमी सीमांत क्षेत्र और देश के बाकी क्षेत्र के साथ हमेशा सुविधाजनक संपर्क रहा है। यह प्राचीन समय में गंगा के मैदान से होकर जाने वाले वाणिज्य पथों के रास्ते में पड़ने वाला मुख्य पड़ाव था। व्यापारी मुख्यतः बरसात आने पर यमुना नदी के किनारे दिल्ली में ही अपना बसेरा बनाते थे। प्रसिद्ध मौर्य शासक अशोक के शिलालेख के अनुसार दिल्‍ली मौर्यों की उत्‍तरी राजमार्ग पर अवस्थित थी और यही उनकी राजधानी पाटलिपुत्र को तक्षशिला से जोड़ती थी। तथा बौद्ध भिक्षु इसी मार्ग से तक्षशिला आते जाते थे, इस लिहाज से दिल्ली को महत्वपूर्ण स्थान मिला।

इस नगर का नाम “दिल्ली” कैसे पड़ा इस बिषय में अनेक मत दिए गए है। दिल्ली शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम उदयपुर में प्राप्त शिलालेखों पर पाया गया। इस नाम के संदर्भ में सबसे व्यापक मत यह दिया जाता है कि दिल्ली नाम प्राचीन राजा “ढिल्लू” के नाम का अपभ्रंश रूप है।

दिल्ली भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक नगर है। यह एक ऐतिहासिक नगरी है। जिसमें भारत सरकार के प्रमुख कार्यालय संसद भवन, राष्ट्रपति भवन तथा इंडिया गेट, राजपथ, लाल किला, कुतुबमीनार, जामा मस्जिद, लोह स्तंभ आदि भारत की राष्ट्रीय धरोहरें भी स्थित है।

Leave a Reply