दिल्ली के बारे में रोचक तथ्य – Delhi Facts

दिल्ली भारत का एक केंद्र शासित प्रदेश है जिसका आधिकारिक नाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली या NATIONAL CAPITAL TERRITORY OF DELHI है। दिल्ली का इतिहास उतना ही पुराना है जितना कि भारत का। केवल मुग़ल और ब्रिटिश भारत के समय में ही नहीं, बल्कि दिल्ली का उल्लेख महाभारत काल में भी मिलता है। तब इसे इंद्रप्रस्थ के नाम से जाना जाता था। यह वही शहर था जिसे कृष्ण की अगुवाई में पांडवों ने बसाया था।

आज आम बोलचाल की भाषा में जिस शहर को दिल्ली के नाम से जाना जाता है वह भारत का केन्द्र शासित प्रदेश है जिसमें भारत की राजधानी नई दिल्ली भी मौजूद है। नई दिल्ली एक जिला भी है।

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Facts about Delhi in Hindi

1. जब हम यह प्रश्न करते हैं कि दिल्ली कि राजधानी क्या है तो इसका मतलब होता है कि दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश या राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की राजधानी क्या है। आइए आज जानते हैं कि दिल्ली कि राजधानी क्या है। दिल्ली की राजधानी भी नई दिल्ली ही है। जी हाँ! आपने ठीक सुना। नई दिल्ली न केवल भारत देश की राजधानी है बल्कि यह केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली की भी राजधानी है।

नई दिल्ली में भारत और दिल्ली दोनों के कई महत्वपूर्ण सरकारी मंत्रालय और विभाग स्थित हैं। यह तो बात हुई दिल्ली की राजधानी की। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिल्ली का लाल किला पहले सफ़ेद था? आइए जानते हैं दिल्ली की राजधानी से जुड़ी कुछ ऐसी ही जानकरियाँ और तथ्य जो आपको हैरत में डाल देंगे।

2. यह तो हम सभी जानते हैं कि भारत में पहले 7 केंद्र शासित प्रदेश थे। लेकिन कश्मीर और लद्दाख के रूप में दो नए केंद्र शासित प्रदेश बना दिये जाने के बाद देश में अब कुल मिलकर 9 केंद्र शासित प्रदेश हो गए हैं। इन सभी Union Territories में पहले सिर्फ दिल्ली और पुडुचेरी में ही विधानमंडल हुआ करता था। यानि कि इन्ही दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में मुख्य मंत्री और लोगों द्वारा चुनी हुई सरकार हुआ करती थी। हालांकि अब कश्मीर भी ऐसा केंद्र शासित प्रदेश बन गया है जिसमें विधानमंडल होगा। लेकिन दिल्ली में मुख्य मंत्री का पद कब से बना है और यहाँ कि राजधानी नई दिल्ली कब बनी?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि (चौहत्तरवां संशोधन) विधेयक, 1991 जिसे संविधान (सत्तरवाँ संशोधन) अधिनियम, 1991 के रूप में अधिनियमित किया गया और जिसे 21 दिसंबर 1991 को राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त हुई थी, के द्वारा  दिल्ली को विशेष दर्जा प्राप्त हुआ है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 239AA ने संसद द्वारा 69वें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से वर्ष 1991 में केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के बीच दिल्ली को विशेष दर्जा प्रदान किया, जिससे दिल्ली में विधान सभा और मंत्रिपरिषद की स्थापना की गई। इसी अधिनियम के द्वारा दिल्ली का नाम 1 फरवरी, 1992 से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) दिल्ली रखा गया।

इसके अलावा Government of National Capital Territory of Delhi Act, 1991 के माध्यम से दिल्ली की सरकार और विधानसभा के बारे में मानदंड तय किए गए। 1956 में दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। 1952 में दिल्ली में एक विधानसभा का गठन किया गया था जिसे 1 नवम्बर 1956 को भंग कर दिया गया था। इसी दिन से दिल्ली में केंद्रीय शासन फिर से शुरू हुआ था।

3. दिल्ली जिले का गठन पहली बार सन 1819 में किया गया था जिसमें केंद्र में शहर था और इसमें उत्तर और दक्षिण के दो परगना शामिल थे। 1996 तक दिल्ली में सिर्फ एक ही जिला था। 1997 में पहली बार दिल्ली में 9 जिले बनाए गए। वैसे दिल्ली एक शहर के रूप में बहुत पुराना है लेकिन भारत की राजधानी बनने का गौरव इसे 1911 में प्राप्त हुआ। हालाँकि दिल्ली, भारत पर शासन करने वाले कई साम्राज्यों का वित्तीय और राजनीतिक केंद्र रह चुका था।

1911 से पहले ब्रिटिश भारत की आधिकारिक राजधानी कोलकाता हुआ करती थी। लेकिन प्रशासनिक सुविधा और दिल्ली के राजनैतिक-भौगोलिक महत्व को देखते हुए अंग्रेजों ने भी कोलकाता के बदले दिल्ली को भारत की राजधानी बना दिया। 12 दिसम्बर 1911 के दिन दिल्ली में लगे एक भव्य दरबार में भारत और ब्रिटेन के शासक जॉर्ज पंचम और उनकी रानी मैरी ने घोषणा की कि भारत की राजधानी कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित कर दी जाएगी। घोषणा के साथ ही उन्होने कोरोनेशन पार्क, किंग्सवे कैंप में आधारशिला भी रखी जो बाद में भारत में ब्रिटिश वायसराय का निवास स्थाना बना।

दिल्ली के लिए प्रारंभिक योजना और वास्तुकला तैयार करने का कार्य दो ब्रिटिश आर्किटेक्टों, हर्बर्ट बेकर और एडविन लुटियन द्वारा किया गया था। बाद में 13 फरवरी, 1931 को भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन ने नई दिल्ली का देश की नई राजधानी के रूप में उद्घाटन किया था। इस अवसर पर ब्रिटिश भारत में एक नए डाक टिकट को जारी किया गया था जिसमें जॉर्ज पंचम और सेक्रेटरियट बिल्डिंग की तस्वीर थी। इस डाक टिकिट का मूल्य एक रुपये था।

4. दिल्ली में एक तो नई दिल्ली है और एक है पुरानी दिल्ली। इसमें पुरानी दिल्ली का निर्माण मुग़ल सम्राट शाह जहां ने कराया था जो 1638 से मुग़ल शासन की राजधानी बनी। इसी कारण पुरानी दिल्ली को पहले शाहजहानाबाद कहा जाता था। शाहजहाँ ने जिस शहर को बसाया था वह दीवारों से घिरा था। किन्तु उस दीवार में स्थित 14 विशाल दरवाजों में से केवल 5 ही बचे हैं जिन्हे अजमेरी गेट, कश्मीरी गेट, लाहौरी गेट, दिल्ली गेट और तुर्कमान गेट के नाम से वर्तमान में जाना जाता है।

5. दिल्ली को इंग्लिश भाषा में देल्ही कहा जाता है। लेकिन दिल्ली का नाम देल्ही किसने रखा? जब भारत के वायसराय के रूप में लॉर्ड हार्डिंग ने रायसीना हिल पर नई दिल्ली की इमारत पर विचार किए थे तब उनके सामने दिल्ली के लिए अङ्ग्रेज़ी भाषा में कई नाम पेश किए गए। ये लॉर्ड हार्डिंग ही थे जिन्होने दिल्ली के लिए अङ्ग्रेज़ी भाषा में न्यू देल्ही नाम दिया है। हालांकि दिल्ली के नाम के ऊपर भी कुछ विवाद बना हुआ है।

आम बोलचाल की भाषा में इसे दिल्ली कहा जाता है लेकिन आधिकारिक नाम देल्ही है। कुछ लोगों की मांग है कि देल्ही का नाम बदलकर फिर से दिल्ली कर दिया जाए। हालांकि इस पर अभी कोई आमराय नहीं बनी है और ना ही कोई निर्णय लिया गया है।

5. मध्यकाल में दिल्ली को पहली बार कब राजधानी बनाया गया इस पर भी मतभेद है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण या ASI के द्वारा प्रकाशित पुस्तक दिल्ली एंड इट्स नेबरहुड के अनुसार दिल्ली का पहला मध्ययुगीन शहर जिसे तोमर शासकों द्वारा स्थापित किया गया था, ढिल्ली या ढिल्लिका कहलाता था। 11वीं  शताब्दी के तोमर शासक अनंगपाल ने इस शहर में एक किले का निर्माण करवाया था और यहाँ से अपना राज्य चलाया था। किन्तु ज्ञात अभिलेखों में ढिल्लिका का उल्लेख पहली बार बिजोलिया, जिला उदयपुर के 1170 इसवीं के शिलालेख में प्राप्त होता है

इसी शिलालेख से हमें दिल्ली पर चहमानों के कब्जा करने के बारे में भी पता चलता है। दिल्ली में शासन करने वाले मामलुक वंश के नौवें सुल्तान गियासुद्दीन बलबन के शासनकाल के दौरान बनाए गए 1276 के पालम बाउली शिलालेख में भी इस शहर को ढिल्ली के नाम से पहचाना गया है। हालांकि 1328 में मोहम्मद तुग़लक के समय का प्राप्त हुआ एक शिलालेख भी इस शहर को ढिल्लिका के नाम से ही बताता है। यानि कि एक बात तो निश्चित थी, पूरे मध्यकाल के समय इस शहर को ढिल्ली या ढिल्लिका के नाम से ही जाना जाता था।

उर्दू भाषा या रेख़ता के मशहूर शायर मिर्ज़ा मुहम्मद असदुल्लाह खान ग़ालिब या मिर्जा ग़ालिब ने अपनी शायरी में अपने शहर को दिल्ली कहा है। दिल्ली के प्राचीन नाम की बात करें तो कुछ किंवदंतियों और विद्वानों के अनुसार इसका नाम ढिल्लू नामक एक राजा के नाम पर रखा गया था जिन्होंने इस क्षेत्र पर 50 ईसा पूर्व में शासन किया था। कुछ विद्वान दिल्ली के तोमर शासकों के समय प्राचीन प्राकृत भाषा में उपयोग होने वाले एक शब्द के ऊपर इस शहर का नाम रखा जाने की बात कहते हैं।

6. इसी प्रकार कुछ विद्वानों द्वारा भारत के प्राचीन ग्रंथ महाभारत में वर्णित इंद्रप्रस्थ शहर को वर्तमान दिल्ली के रूप में पहचाना जाता है। इंद्रप्रस्थ पांडवों की राजधानी थी। महाभारत इंद्रप्रस्थ नामक एक शहर के बारे में बताता है जो यमुना नदी के किनारे पर वर्तमान फ़िरोज़ शाह कोटला और हुमायूँ मकबरे के बीच में स्थित था। लेकिन दिल्ली के साथ इस शहर की पहचान करने के लिए कोई प्रत्यक्ष ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है।

दूसरी शताब्दी के दौरान भारत का दौरा करने वाले प्रसिद्ध भूगोलवेत्ता ए डी टॉलेमी ने एक मानचित्र में एक जगह का उल्लेख किया है, जिसका नाम ददैला है जो इंद्रप्रस्थ के करीब स्थित था और वर्तमान मथुरा और थानेसर के बीच में स्थित था। हालाँकि 326 ईसा पूर्व में भारत पर आक्रमण करने वाले सिकंदर महान पर लिखे यूनानी लेखकों के किसी भी कार्य में इंद्रप्रस्थ या दिल्ली नामक किसी भी शहर का उल्लेख नहीं है। यहां तक कि चीनी तीर्थयात्री हुआन त्सांग ने भी अपने संस्मरण में इस शहर का कोई उल्लेख नहीं किया है। किन्तु बाद में ब्रिटिश वाइसरॉय लॉर्ड कनिंघम ने इस मत को स्वीकार किया था कि दिल्ली का नाम राजा ढिल्लू या ढिल्लू के नाम पर ही रखा गया था लेकिन उस राजा के शासनकाल का समय निश्चित ज्ञात नहीं है।

8. एक शहर के रूप में दिल्ली कम से कम सात बार बनी और उजड़ी है। दिल्ली का पहला शहर लालकोट था जिसका निर्माण तोमर शासक अनंगपाल ने 1060 इसवीं में कराया था। बाद में यह सबसे प्रसिद्ध राजपूत राजा पृथ्वीराज चौहान द्वारा विकसित किया गया था और इस किले का नाम राय पिथोरा रखा गया था।

9. दिल्ली के पहले मुस्लिम राजा कुतुब-उद-दीन-ऐबक ने हिंदू किले राय पिथोरा के किनारे पर दिल्ली की पहली मस्जिद कुव्वत-उल-इस्लाम का निर्माण किया और कुतुब मीनार की नींव रखी। दिल्ली का दूसरा शहर सिरी को अलाउद्दीन-खिलजी द्वारा 14 वीं शताब्दी के शुरुआती भाग में बनाया गया था।

10. दिल्ली का ना सिर्फ ऐतिहासिक महत्व है बल्कि इस समय भी दिल्ली भारत का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण शहर है। इसकी 97.5% जनसंख्या शहरी है और इसका क्षेत्रफल 1483 वर्ग किलोमीटर है। एशिया का सबसे बड़ा मसालों का थोक बाज़ार खड़ी बाओली भी दिल्ली में ही स्थित है। इसी तरह एशिया की सबसे बड़ी फलों और सब्जियों की मंडी भी दिल्ली में ही मौजूद आजादपुर मंडी है।

11. भारत की सबसे बड़ी मस्जिद जामा मस्जिद भी दिल्ली में ही स्थित है जिसका निर्माण  मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने कराया था। बहाई संप्रदाय का एशिया में स्थित एकमात्र मंदिर लोटस टैम्पल भी दिल्ली में ही स्थित है। भारत की सबसे ऊंची ईंटों से बनी इमारत कुतुब मीनार भी दिल्ली में ही है। 

12. दिल्ली का लाल किला पहले अधिकतर सफ़ेद था और इसे सफ़ेद और लाल पत्थरों से बनवाया गया था। लेकिन अंग्रेजों के समय में 19वीं शताब्दी के बीच में लाल रंग से रंग दिया गया था। इतना ही नहीं भारतीय सर्वेक्षण विभाग के अनुसार दिल्ली के प्रसिद्ध जंतर मंतर भवन का रंग भी पहले सफ़ेद ही था।

13. दुनिया में नैरोबी शहर के बाद दूसरी सबसे अधिक पक्षियों की प्रजातियाँ दिल्ली में स्थित हैं। दिल्ली रिज में बड़ी संख्या में पक्षियों की अलग-अलग प्रजातियों का निवास है। हर साल यहाँ दूर-दूर से पक्षी प्रेमी उन्हे देखने के लिए आते हैं।

14. दिल्ली की हवा दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में गिनी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिल्ली के कुल क्षेत्रफल का लगभग 20 प्रतिशत भाग जंगल से घिरा है। यहाँ पेड़ पौधों और बगीचों की भी कमी नहीं है। दिल्ली में प्रदूषण से बचाव के लिए दिल्ली की पूरी सार्वजनिक परिवहन प्रणाली सीएनजी गैस पर चलती है।

15. दिल्ली जापान के टोक्यो के बाद दुनिया का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला शहर है। 2018 में प्रकाशित हुई संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार 2028 तक दिल्ली के दुनिया के सबसे अधिक जनसंख्या वाले शहर बन जाने की संभावना है। संयुक्त राष्ट्र के डिपार्टमेंट ऑफ इकनॉमिक एंड सोशल अफेयर्स के जनसंख्या प्रभाग द्वारा जारी की गई विश्व शहरीकरण संभावनाएं 2018 नामक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली की और इसके आस-पास के क्षेत्र की आबादी अब अनुमानित रूप से 29 मिलियन या 2.9 करोड़ हो चुकी है जो टोक्यो के 3.7 करोड़ लोगों की आबादी के बाद दूसरे स्थान पर है।

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  1. Sangisathi Charitable Foundation October 23, 2019

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