दिल्ली के मुख्यमंत्री कौन हैं 2019 । Delhi Ke Mukhya Mantri

दिल्ली के वर्तमान मुख्यमंत्री बदलाव की राजनीति के प्रतीक और भ्र्ष्टाचार के खिलाफ जंग लड़ने का दावा करने वाली राजनीतिक दल आम आदमी पार्टी (AAP)  के मुखिया अरविंद केजरीवाल हैं। 2015 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव अरविंद केजरिवाल के नेतृत्व में विरोधी दलों को मात देते हुए AAP ने अप्रत्याशित जीत दर्ज की थी। इसके बाद अरविंद केजरीवाल ने 14 फरवरी 2015 को दूसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। तब से वह दिल्ली के मुख्यमंत्री पद पर बने हुए हैं।

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दिल्ली के मुख्यमंत्री “अरविंद केजरीवाल” के बारे में सामान्य जानकारी

हरियाणा के भिवानी जिले में 16 अगस्त 1968 को जन्मे अरविंद केजरीवाल 2013 राजनीति में आने से पहले सक्रिय RTI Activist हुआ करते थे और आयकर विभाग में कार्यकर्त थे। इनकी शुरुआती शिक्षा सोनीपत, हरियाणा में ही हुई थी। 1985 में ITT-JEE Exam में AIR 563 रैंक लाते हुए IIT College Kharagpur से अपनी Mechanical Engineering पूरी की। इसके बाद उन्होंने 1989 में Tata Steel कंपनी में नौकरी शुरू की।

1992 में इन्होंने अपनी पढ़ाई को फिर से शुरू करने के लिये नौकड़ी छोड़ दी। इसके बाद वह Civil Services Exam की तैयारी के लिए कोलकाता गए। इसी दौरान वह Mother Teresa से भी मिले और मिशनरी से जुड़ गए। 1995 में Civil Services Exam पास करते हुए बतौर IRS आयकर विभाग में Assistant Commissioner के पद पर नियुक्त हुए। इसके बाद साल 2000 से 2002 तक तक वह छुट्टी पर चले गए फिर इसके बाद भ्र्ष्टाचार विरोधी मुहिम से जुड़ने के कारण 2006 में अपने पद से त्यागपत्र दे दिया।

काम के दौरान ही केजरीवाल के साथी और दिल्ली के वर्तमान उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य लोगों ने 1999 मे भ्र्ष्टाचार के खिलाफ परिवर्तन नामक एक मुहिम की शुरुआत की। इसके बाद यह बड़ा रूप लेने लगा और केजरीवाल अन्य लोगों से भी जुड़ते गए।

आम आदमी पार्टी का गठन

भ्र्ष्टाचार विरोधी मुहिम को आगे बढ़ाते हुए केजरीवाल और उनके साथी 2010 में अन्ना हज़ारे से जुड़े और जनलोकपाल बिल की मांग को ले कर आंदोलन शुरू कर दिया। 2011 – 2012 में यह आंदोलन ज़ोर पकड़ने लगा। इसी आंदोलन के दौरान केजरीवाल और इस आंदोलन के मुखिया अन्ना हजारे में वैचारिक मदभेद हो गए।

अन्ना हज़ारे अपनी मुहिम को राजनीति से नही जोड़ना चाहते थे लेकिन अरविंद केजरीवाल समेत अन्य लोग इस लड़ाई को राजनीति में आ कर लड़ना चाहते थे। इसी को लेकर उपजे विरोध के बाद केजरीवाल Team Anna से अलग हो कर एक राजनीतिक पार्टी बनाने का फैसला किया और 02 अक्टूबर 2012 को आम आदमी पार्टी के गठन की घोषणा कर दी।

आम आदमी पार्टी ( AAP ) का राजनीतिक सफर

2013 में पहली बार चुनाव में उतरते हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में AAP ने सबको चौंकाते हुए 70 में से 28 सीट अपने नाम कर लिए। पहले नंबर पर 31 सीट के साथ BJP रही थी जबकि दिल्ली की सत्तारूढ़ पार्टी कॉंग्रेस 8 सीट ही जीत पाई। किसी को स्पष्ठ बहुमत न होने पर AAP ने कॉंग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई और पहली बार केजरीवाल मुख्यमंत्री बने। यह सरकार मात्र 49 दिन ही चल सकी।इसके बाद फिर 2015 में हुए चुनाव में आप ने 70 में से 67 सीट अपने नाम करते हुए अश्पष्ट बहुमत की सरकार बनाई और केजरीवाल ने दूसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

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