विश्व का सबसे ऊँचा जलप्रपात कौन सा है ?

हमारी पृथ्वी अनेकों प्राकृतिक धरोहरो का समावेश है, जिसके अंदर कई सारे महासागर, नदियां, झीले तथा सघन वन पाये जाते है। जो प्रकृति को एक नया स्वरूप प्रदान करते है। इसी कड़ी में एक नाम जलप्रपात का भी होता है, जो जल की अथक धारा होती है। इस आर्टिकल में हम इसी के बारे में विस्तार से जानेंगे कि जलप्रपात होता क्या है ? एवं दुनिया का सबसे ऊंचा जलप्रपात कौन सा है?

जलप्रपात क्या होता है ?

विशालकाय चट्टानों तथा बड़े-बड़े पर्वत – पठारो के मध्य से गुजरकर नीचे गिरने वाले जल का जो अनूठा संगम बनता है, उसको जलप्रपात कहते है। जल की धारा जलप्रपात का परिमाप दर्शाती है। अगर जल की धारा अधिक ऊंचाई से गिरती है, तथा विशाल जलप्रपात बनाती है तो उसे, महा जलप्रपात कहा जाता है।

duniya ka sabse uncha jalprapat

विश्व का सबसे ऊंचा जलप्रपात

दुनिया मे भारी मात्रा में जलप्रपात पाये जाते है। जो बेहद ऊँचाई से गिरकर सुंदर तथा आकर्षक जलप्रपात का निर्माण करते है। दुनिया का सबसे ऊंचा जलप्रपात “एन्जिल जलप्रपात” (Angel Waterfall) है।  यह जलप्रपात कानाईमा राष्ट्रीय उद्यान में ऑयनटेपुई (Auyantepui) नामक पर्वत से गिरता है।

जो दक्षिण अमेरिकी के वेनेजुएला देश के बोलिवर राज्य में ग्रान सबाना में स्थित है। इस जलप्रपात की कुल ऊंचाई 979 मीटर है, अर्थात 3,212 फीट जबकि इसकी गहराई 807 मीटर है, जो फुट में 2,648 होती है। यह जलप्रपात बोलिवर राज्य के गुआना हाइलैंड्स का एक जलप्रपात है, जो चुरू नदी पर वेनेजुएला के दक्षिण-पूर्व में, कैरोनी की सहायक नदी से 260 किमी सिउदाद बोलिवर के दक्षिण-पूर्व में स्थित है। 3,212 फ़ीट की ऊँचाई से गिरने के कारण इस जलप्रपात का जल धरा तक आने के दौरान ही भारी मात्रा में वाष्प में परिवर्तित हो जाता है।

जो पर्यटको के लिए एक मनमोहक तथा दर्शनीय दृश्य की छटा बिखेरता है। जिस जगह यह प्रपात गिरता हैं, उसे “शैतान घाटी” के नाम से जाना जाता हैं।

इसका Waterfall का नाम एन्जिल क्यों पड़ा।

दुनिया के इस सबसे बड़े जलप्रपात के नामकरण की कहानी बेहद दिलचस्प है। इसका नाम एन्जिल जलप्रपात एक हवाई जहाज के विमान चालक के नाम पर रखा गया हैं, जिनका नाम जिमी एंजेल (Jimmie Angel) था। दरसअल जिमी ही वह पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने इस प्रपात के ऊपर से उड़ान भरी थी तथा लोगो को इसके बारे में अवगत कराया था।

वर्ष 2009 में भी इसके नाम को बदलने के लिए बातें चर्चा में आई थी, लेकिन इसकी प्राचीनता तथा प्रसिद्धि के कारण इसको नही बदला गया। इस जल-प्रपात को “सैल्टो ऑन्गेल” या “स्वदेशी केरेपुपाई-मेरु” के नाम से भी पहचान जाता है, जबकि इसका स्वदेशी नाम पेमोन नेटिव है, जिसका अर्थ होता हैं “सबसे गहरी जगह से गिरना”। यह जलप्रपात यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में शुमार हैं, जो इसका ऐतिहासिक तथा प्राचीन महत्व बतलाती है।

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