दूसरा विश्व युद्ध कब और क्यों हुआ था।

मानव इतिहास के सबसे विनाशकारी माने जाने वाले युद्ध, द्वितीय विश्व युद्ध ने पूरे विश्व को ही बदल दिया था। यह युद्ध हर मायने में मानवता के खिलाफ रहा। करोड़ की संख्या में लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। इस विनाशकारी द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत 1 सितंबर 1939 को हुई थी। 1939 से शुरू हुआ खूनी खेल पूरे 6 साल 1 दिन तक चलता रहा। इसके बाद इस युद्ध की समाप्ति की घोषणा 2 सितंबर 1945 को की गई थी।

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द्वितीय विश्व युद्ध का कारण क्या था।

पहले विश्व युद्ध में मिली जीत के बाद गठबंधन सेना के सदस्य देशों की ताकत और बढ़ गयी और विश्व पटल पर इनका प्रभाव और बढ़ने लगा। जबकि हारने वाले देशों पर नई नई पाबंदियों के साथ साथ उसके अधिकार भी सीमित कर दिए गए। इन असमानता ने विश्व भर में उथल पुथल को  और बढ़ा ही दिया। विश्व युद्ध के कई प्रमुख कारण थे। इनमें से 1920 का Italian Fascism, 1930 में हुआ जापानी सैन्यवाद और चीन पर हमला प्रमुख रहा।

इन सब के अलावा सबसे प्रमुख भूमिका 1933 में जर्मनी पर Adolf Hitler का शासन और इसका आक्रमक विदेश नीति प्रमुख कारण रहा। इस युद्ध के हालिया कारण जर्मनी द्वारा 1 सितंबर 1939 को पोलैंड पर हमला तथा ब्रिटेन और फ्रांस का 3 सितंबर 1939 को जर्मनी के खिलाफ युद्ध का ऐलान, युद्ध प्रारंभ की भूमिका निभा गया।

द्वितीय विश्व युद्ध में भाग लेने वाले देश

जिस तरह पहले विश्व युद्ध में भाग लेने वाले देश दो दलों, गठबंधन देश और Central Power में बंट गए थे, ठीक उस तरह दूसरे युद्ध में भी विश्व के अनेक देश दो भाग मे बंट गए। इस युद्ध में भाग ले रहे देश Axis Power ( धुरी राष्ट्र ) और Allied Powers ( मित्र राष्ट्र ) में बंट गए थे। Axis Power की ओर से भाग लेने वाले कुछ प्रमुख राष्ट्र  जर्मनी, इटली और जापान थे। जबकि मित्र राष्ट्र की ओर से प्रमुख राष्ट्र यूनाइटेड किंगडम, यूनाइटेड स्टेट ( अमरीका ), सोवियत संघ के सदस्य देश तथा चीन थे।

इसके अलावा कुछ देश ऐसे भी थे जो कि इस दौरान Neutral रहे थे। दूसरे विश्व युद्ध में विश्व के अधिक्तर देशों ने किसी न किसी भी रूप में भाग लिया ही था। इस युद्ध में प्रत्यक्ष रूप से भाग लेने वाले देशों की संख्या 70 से 100 के बीच बताई जाती है।

दूसरे विश्व युद्ध में भारत की भूमिका

पहले विश्व युद्ध में भारत ने आंग्रेज़ी शासन से आज़ादी की आशा में ब्रिटिश सेना का साथ देने का फैसला किया था। इस दौरान भारत ने 10 लाख सैनिक भेजे जिसमें से 75 हज़ार को अपनी जान गवानी परा। आंग्रेज़ी हुकूमत का साथ देने का फायदा भारत को नही हुआ। इसके बावजूद विश्व युद्ध 2 में लगभग 20 लाख भारतीय सैनिकों ने आंग्रेज़ी सेना की ओर से भाग लिया।

दूसरे विश्व युद्ध का परिणाम

यह युद्ध अंत तक आते आते काफी विनाशकारी साबित हुआ। जापान को परमाणु हमले के कारण इसकी अभूतपूर्व कीमत चुकानी पड़ी। युद्ध में मित्र राष्ट्र द्वारा बड़ी मात्रा में वायु सेना का उपयोग किया गया। अन्तः जीत मित्र राष्ट्र ( Allied Power ) की जीत हुई।

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