पृथ्वी के इतिहास, गति, आकृति के बारे में पूरी जानकारी

earth information in hindiआज हम पृथ्वी के बारे में पूरी जानकारी आपको देने जा रहे हैं। अगर आपके दिमाग में भी पृथ्वी से सम्बंधित कोई प्रश्न है, तो आप पृथ्वी से जुड़ी जानकारी के इस लेख को पूरा जरूर पढ़ें। पृथ्वी वो ग्रह है, जहां हम सभी रहते हैं। सृष्टि के बारे में सभी के दिमाग में यही होता है कि इसका जन्म कैसे हुआ होगा और यहां सबसे पहले कौन रहता होगा।

पृथ्वी क्या है

दोस्तों, सबसे पहले आपको ये जान लेना चाहिए कि पृथ्वी आखिर है क्या। दोस्तों, सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने वाले जितने भी ग्रह होते हैं, वो सौर मंडल के ग्रह होते हैं। यानी हमारी पृथ्वी भी सौर मंडल का एक ग्रह है। ये सभी ग्रहों से अलग है। क्योंकि यहां पर जीव रहते हैं और किसी ग्रह पर जीव नहीं रहते। इस ग्रह की आकृति गोल है, जिसे समझने के लिए आपने कक्षाओं में ग्लोब को देखा ही होगा। तो आप ये तो समझ ही गए होंगे कि पृथ्वी क्या है।

पृथ्वी का जन्म कैसे हुआ

पृथ्वी के बारे में समझ लेने के बाद आपको ये जानना चाहिए कि इसका जन्म कैसे हुआ। 5 billion वर्षों पहले कई सारी गैसों का मिश्रण होने से अंतरिक्ष में एक धमाका हुआ था। इस धमाके से एक आग के गोले का निर्माण हुआ और ये आग का गोला सूर्य के नाम से जाना जाता है। जब ये धमाका हुआ तो धूल के कण इस गोले के आस-पास बिखर गए थे। धीरे-धीरे गुरुत्वाकर्षण बल से ये कण आपस में जुड़ते गए, इससे सौर परिवार बना। ये कण धीरे-धीरे धरती का रूप लेने लगे और ऐसे होते-होते गुरुत्वाकर्षण बल से धरती के चारों ओर गोले का निर्माण होता गया। 3.9 billion साल पहले धरती पर उल्का गिरे, इन उल्का से धरती पर धीरे-धीरे पानी जमा होने लगा और इससे यहां समुद्र का निर्माण हुआ। धीरे-धीरे धरती की सतह ठंडी होती रही और यहां का तापमान सही होता गया। चांद की वजह से धरती पर तूफान आना शुरू हुए, जिससे धरती पर उथल-पुथल होने लगी। धीरे-धीरे धरती से चांद दूर जाता गया और इससे यहां उथल-पुथल कम पड़ती रही। इसके बाद धरती पट द्वीपों का निर्माण हुआ। यहां पर कार्बन और एमिनो एसिड की मात्रा बढ़ती गई। इसके बाद पानी में कुछ केमिकल के मिलने से एक प्रक्रिया हुई, जिससे जीवन की शुरुआत हुई। कहने का मतलब बैक्टीरिया आदि यहां पनप चुके थे। ये बैक्टीरिया सूर्य की रोशनी से प्रकाश संश्लेषण की क्रिया से अपना पेट भरते रहे।

पृथ्वी की संरचना

पृथ्वी का आकार गोल है। जिस प्रकार प्याज की आंतरिक संरचना हुआ करती है, ठीक वैसे ही पृथ्वी की आंतरिक संरचना बनी हुई है। इसकी सबसे ऊपरी परत का नाम भूपर्पटी है, जो ठोस रूप में है। इसके अलावा सबसे मध्य में मैंटल परत है, जो गाढ़ी है। इसका बाह्य कोड तरल है जबकि आंतरिक ठोस रूप में है। यहां पर ऑक्सीजन गैस मुख्य रूप से जीवों के लिए सहायक होती है। यहां पर द्वीप और बड़े-बड़े समुद्र के अलावा स्थल बने हुए हैं।

पृथ्वी किस पर टिकी है

पृथ्वी गुरुत्वाकर्षण बल के कारण सौर मंडल में टिकी हुई है। ये चीज पर नहीं बल्कि हवा में टिकी हुई है। पृथ्वी अपनी धुरी पर 66.5° झुकी हुई है, जिसके कारण ही यहां ऋतु परिवर्तन होते हैं। गुरुत्वाकर्षण के कारण ही सौर मंडल में सारे ग्रह टिके रहते हैं।

पृथ्वी कितनी तेजी से घूमती है

इसके घूमने की गति 2 तरह की होती है। पहली घूर्णन और दूसरी परिक्रमण। घूर्णन गति को दैनिक और परिक्रमण को वार्षिक गति के रूप में समझा जाता है। इसकी दैनिक गति यानी घूर्णन गति 23 घंटे, 56 मिनट और 4 सेकेंड है। ये सूर्य की परिक्रमा करने में लगभग 365 दिन का समय लगाती है। इसकी औसत परिक्रमण गति 29.78 किमी/सै॰ है।

पृथ्वी के बारे में रोचक जानकारियां

दोस्तों, हमने पृथ्वी के बारे में सामान्य जानकारी जान ली है। लेकिन आपको इससे जुड़ी कुछ खास और रोचक जानकारियां भी जान लेनी चाहिए-

  1. पृथ्वी पर रेत का सबसे बड़ा रेगिस्तान सहारा रेगिस्तान है।
  2. पृथ्वी के 71 प्रतिशत भाग पर पानी भरा है और 29 प्रतिशत भाग पर स्थल बना हुआ है।
  3. एक बार पृथ्वी पर होका मिटीओराइड नाम का उल्कापिंड गिरा था।
  4. करोड़ो वर्ष पहले पृथ्वी के सारे महाद्वीप एक दूसरे से जुड़े हुए थे।
  5. पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण बल के कारण कोई भी वस्तु को ऊपर फेंकने पर वो नीचे आ गिरती है।

पृथ्वी का अंत कैसे होगा

दोस्तों, पृथ्वी के प्रलय को लेकर हमेशा सवाल बना रहता है। सभी अलग-अलग वर्ष बताते हैं। लेकिन आप भी जानते हैं कि जो चीज बनी है उसे एक दिन खत्म तो होना ही है। कहा जाता है कि एक दिन प्रलय से इस सृष्टि का भी विनाश होगा। इसका उल्लेख महाभारत में भी किया गया है कि बढ़ती गर्मी के कारण इस सृष्टि का विनाश होगा। ऐसा माना जाता है कि सूर्य का ताप वक्त के साथ-साथ इतना बढ़ जाएगा कि पानी का नाम निशान नहीं होगा और फिर से पृथ्वी एक आग के गोले के रूप में परिवर्तित हो जाएगी। कई जनों का ये मानना है कि यहां पर लगातार पानी बढ़ता जाएगा, जिससे कि यहां पर जल प्रलय आएगा जो सबकुछ तहस-नहस कर देगा। कुछ लोगों का मानना है कि एक आग का गोला पृथ्वी की ओर आकर इससे टकरा जाएगा या ये आग का गोला समुद्र में गिर जाएगा, जिससे सबकुछ जलके तबाह हो जाएगा।

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