भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री कौन थे। First space traveller in India

भारत के प्रथम अंतरिक्ष यात्री कौन थे (first space traveller in india) यह जानना हमारे लिए गर्व की बात होगी क्योंकि भारत आज Isro के रूप में बहुत तेजी से अंतरिक्ष में अपने पैर पसार रहा है। जिस पर हर भारतीय को गर्व है इसलिए भारत के प्रथम अंतरिक्ष यात्री कौन थे उन्होंने यह यात्रा कब की थी इसके बारे में जानकारी होना चाहिए तो चलिए हम प्रथम भारतीय अंतरिक्ष यात्री के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं।

भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा थे। यही नहीं वे भारत के अब तक इकलौते भारतीय अंतरिक्ष यात्री हैं। अगर इसरो (Indian research space organization) के भविष्य के प्रोग्राम को सही माना जाए तो 2022 में भारत  का पहला मानव सहित मिशन अंतरिक्ष में जाएगा तब जाकर कोई दूसरा राकेश शर्मा के अलावा भारतीय अंतरिक्ष यात्री कहलाने का दर्जा प्राप्त कर पाएगा।

यहां पर यह स्पष्ट कर देना जरूरी है कि दुनिया में अंतरिक्ष यात्री के लिए जो शब्द प्रसिद्ध है वह है एस्ट्रोनॉट, परंतु राकेश शर्मा एस्ट्रोनॉट नहीं बल्कि कॉस्मोनॉट थे इसका कारण यह है कि अमेरिकी अंतरिक्ष प्रोग्राम में अंतरिक्ष यात्रियों को एस्ट्रोनॉट कहा जाता है वही तत्कालीन सोवियत संघ के अंतरिक्ष प्रोग्राम में अंतरिक्ष यात्रियों को कॉस्मोनॉट कहा जाता था और क्योंकि राकेश शर्मा सोवियत संघ के अंतरिक्ष प्रोग्राम का ही एक हिस्सा थे इसीलिए उनके लिए सही शब्द कॉस्मोनॉट होगा ना कि एस्ट्रोनॉट।

भारत के प्रथम अंतरिक्ष यात्री का प्रारंभिक  जीवन –

राकेश शर्मा का जन्म 13 जनवरी 1949 को  पंजाब के पटियाला में हुआ। उनकी शिक्षा तत्कालीन आंध्र प्रदेश के हैदराबाद में हुई जो कि आजकल तेलंगाना की राजधानी है। उन्होंने 18 वर्ष की उम्र में भारतीय एयरफोर्स जॉइन की। राकेश शर्मा  प्रशिक्षण के पश्चात 1970 में भारतीय एयरफोर्स  के पायलट बने।वैसे तो राकेश शर्मा ने भारतीय एयरफोर्स के कई तरह के विमान उड़ाए परंतु उनमें सबसे प्रमुख था  मिग । 1971  के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान राकेश शर्मा ने मिग में कई  सफल मिशन उड़ाए  जिनके लिए उन्हें युद्ध के पश्चात सम्मानित भी किया गया।

First space traveller अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा –

1982 आने तक राकेश शर्मा भारतीय एयरफोर्स में स्क्वाडर्न लीडर बन चुके थे। 1982 वही साल था जब भारतीय  स्पेस रिसर्च आर्गेनाईजेशन अथवा इसरो एवं सोवियत इंटर कॉसमॉस स्पेस प्रोग्राम ने एक  जॉइंट प्रोग्राम की घोषणा की जिसके तहत एक भारतीय को अंतरिक्ष में ले जाना तय हुआ। इस प्रोग्राम के लिए भारत की तरफ से 20 सितंबर 1982 को  राकेश शर्मा को चुना गया। उन्होंने तत्कालीन सोवियत रूस में प्रशिक्षण लिया। 2 अप्रैल 1984 को तत्कालीन सोवियत रूस का हिस्सा रहे कजाकिस्तान के बैकोनूर  से सोयूज़ T-11  रॉकेट उड़ा ,इस रॉकेट में  शिप कमांडर यूरी मलयेशेव एवं  फ्लाइट इंजीनियर गेनादी स्ट्रेकलोव के साथ राकेश शर्मा भी थे। यह रॉकेट सल्यूट 7 ऑर्बिटल स्टेशन की ओर जा रहा था।

राकेश शर्मा ने  7 दिन 21 घंटे और 40 मिनट  रॉकेट सल्यूट 7 ऑर्बिटल स्टेशन पर बिताए ।इस दौरान उन्होंने अपने साथियों के साथ कुछ वैज्ञानिक अध्ययन किया और लगभग 43    एक्सपेरिमेंटल सेशन पूरे किए। इन प्रयोगों के दौरान राकेश शर्मा के द्वारा संपन्न किए गए प्रयोगों का क्षेत्र बायोमेडिसिन एवं रिमोट सेंसिंग था। इस टीम ने  पहले  मास्को में अधिकारियों के साथ ज्वाइंट न्यूज़ कॉन्फ्रेंस की और इसके पश्चात तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ कॉन्फ्रेंस की। इसी कॉन्फ्रेंस के दौरान इंदिरा गांधी ने राकेश शर्मा से पूछा था कि अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है जिसके जवाब में राकेश शर्मा ने जवाब दिया था” सारे जहां से अच्छा” ।राकेश शर्मा के साथ भारत 14 वां  ऐसा देश बन गया था जिसका नागरिक अंतरिक्ष में गया था।

राकेश शर्मा के कैरियर का उत्तरार्ध

1984 में अंतरिक्ष मिशन पूरा करने के बाद राकेश शर्मा वापस air-force में आ गए।  वे 1987 में विंग कमांडर के पद के साथ भारतीय फौज से रिटायर हुए। 1987 में ही उन्होंने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड जॉइन कर ली जहां पर उन्हें चीफ टेस्ट पायलट का दर्जा दिया गया। वे इस पद पर लंबे समय तक रहे ,यही नहीं लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस के शुरुआती चरणों में भी  राकेश शर्मा ने अपना योगदान दिया है। राकेश शर्मा ने अपनी अंतिम उड़ान 2001 में भरी। हाल ही में जब किसी न्यूज़पेपर के एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि उनकी इच्छा क्या है तो उन्होंने कहा कि मेरे जीते जी अगर भारत का दूसरा कोई व्यक्ति अंतरिक्ष में जाएगा तो उन्हें बहुत खुशी होगी।

राकेश शर्मा को शांति काल में दिया जाने वाला सबसे ऊंचा पुरस्कार अशोक चक्र दिया गया है यही नहीं उन्हें हीरो ऑफ सोवियत यूनियन का सम्मान भी प्राप्त है।

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