पहला विश्व युद्ध कब और क्यों हुआ था।

पृथ्वी पर युद्ध का इतिहास काफी पुराना है। इस पर मनुष्यों के विकास के बाद ही हर दौर में लड़ाइयां और युद्ध होते रहे थे। समय के बदलने के साथ साथ युद्ध का दायरा भी बढ़ता गया। एक ऐसा समय भी आया जब विश्व के अधिकांश हिस्से युद्ध क्षेत्र में बदल गए। प्रथम विश्व युद्ध इसका अच्छा उदाहरण है। बढ़ते उद्योगिक प्रतिस्पर्धा के कारण ही प्रथम विश्व युद्ध का आगाज़ हुआ। प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत 28 जुलाई 1914 को हुई थी। विश्व के कई देशों के बीच यह भीषण युद्ध 52 महीने तक  चला। इस युद्ध के समाप्ति की घोषणा 11 नंवबर 1918 को की गयी थी।

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प्रथम विश्व युद्ध के बारे में सामान्य जानकारी

19वी सदी के बाद विश्व में बढ़ते उद्योगीकरण के कारण विश्व में व्यापारिक प्रतिस्पर्धा बढ़ने लगी। जिस कारण विश्व के कई बड़े देश इस क्षेत्र में अपनी धमक बनाने की कोशिश में एक दूसरे को अपना गुलाम यानी उपनिवेश बनाना चाहते थे। उपनिवेश बनाने का बड़ा कारण अपने बाज़ार को बढ़ाना था। बड़े देश अपने से अपेक्षाकृत कमज़ोर देशों को गुलाम बना कर इन देशों से कच्चा माल प्राप्त कर इन्हें अपने देश में ले जाना और अपने देश में बने माल को दूसरे देशों में बेचना था।

इस युद्ध में विश्व के कई देशों ने भाग लिया। ये देश दो धरों में बंट कर इस युद्ध में भाग ले गए थे। एक ओर गठबंधन सेना थी। इसमें ब्रिटेन, फ्रांस, अमेरिका, रूस और इटली समेत कुछ अन्य देश भी शामिल थे। युद्ध में भाग ले रहे दूसरे दल, सेंट्रल पॉवर में ऑस्ट्रिया, हंग्री, जर्मनी, खिलाफत ए उस्मानिया और बल्गारिया समेत कुछ अन्य देश थे। यह युद्ध तीन महाद्वीप यूरोप, एशिया और अफ्रीका में लड़ा गया था। इस युद्ध में भाग ले रही देशों की तीनो सेनाओं ने भाग लिया था। इस युद्ध में भाग ले रहे देशों के थल सेना, जल सेना और वायु सेना ने भी युद्ध में भाग लिया था।

  • प्रथम विश्वयुद्ध में भारत की भूमिका

प्रथम विश्व युद्ध से काफी पहले ही भारत पर ब्रिटिश हुकूमत में कब्ज़ा कर लिया था। चूंकि प्रथम विश्व युद्ध के समय भी भारत ब्रिटेन का ही गुलाम था। ऐसे में उस समय के भारतीय नेताओं ने युद्ध में ब्रिटेन की सेना का साथ देने का फैसला किया। इस फैसले के पीछे भारतीयों का मत यह था भारत के उस कदम से खुश हो कर अंग्रेजी हुक़ूमत युद्ध समाप्ति के बाद भारत की आज़ादी को ले कर ठोस कदम उठाएगा।

दूसरी ओर उस समय भारत को आज़ाद कराने की जद्दोजहद में लगे क्रांतिकारियों ने भी इस फैसले का समर्थन करते हुए भारतीय सेना के आंग्रेज़ी सेना का साथ देने के फैसले का स्वागत किया। तब क्रांतिकारियों की सोच यह थी के अगर भारतीय सेना उनका साथ देगी तो इससे ऐसा माहौल बनेगा  जिसमें अंग्रेज़ो के खिलाफ बगावत को और तेज़ किया जा सकता है। प्रथम विश्व युद्ध में भारत के 8 लाख सैनिकों ने भाग लिया था।

  • प्रथम विश्व युद्ध का परिणाम

इस युद्ध में गठबंधन सेना की जीत हुई। युद्ध शुरू होने के बाद ज़रूर जर्मनी हावी रहा था लेकिन यह अधिक समय तक नही चल सका। इसके बाद गठबंधन सेना हावी होती गयी और उन्ही की जीत हुई। इन सब में अमेरिका विश्व पटल पर Super Power के रूप में उभड़ा।

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