गुजरात के राजा भीमदेव द्वितीय ने किस आक्रमणकारी को हराया था ।

गुजरात के राजा भीमदेव द्वितीय ने  गुरिद  वंश के शासक मोहम्मद ऑफ गौर अथवा मोहम्मद गौरी को हराया था। भीमदेव द्वितीय चालुक्य साम्राज्य के राजा थे। भीमदेव द्वितीय के शासनकाल में चालुक्य साम्राज्य बहुत ज्यादा कमजोर हो गया। साम्राज्य की कमजोरी का स्तर कुछ इस तरह था कि भीमदेव द्वितीय के बाद इस साम्राज्य का केवल एक और राजा आया , उसके बाद यह साम्राज्य हमेशा हमेशा के लिए  विलुप्त हो गया।

अब जब आपने यह जान लिया कि गुजरात के राजा भीमदेव द्वितीय ने किस आक्रमणकारी को हराया था? तो इस युद्ध से जुड़ी कुछ और जानकारियां भी समझ लीजिए ।            

गुजरात के राजा भीमदेव द्वितीय ने किस आक्रमणकारी को हराया

मोहम्मद गौरी और चालुक्य साम्राज्य के बीच में यह लड़ाई 1178 ईस्वी में हुई थी।  इस लड़ाई के पूर्व मोहम्मद गौरी गुजरात के पश्चिम के इलाके अर्थात वर्तमान पाकिस्तान के सिंध के कई राजाओं को हरा चुका था परंतु उसे चालुक्य साम्राज्य के हाथों हार का मुंह देखना पड़ा । इस युद्ध को लेकर सबसे बड़ा विवाद यह है कि यह युद्ध भीमदेव द्वितीय ने जीता था या फिर उसके पहले के राजा  मुलाराजा  द्वितीय ने जीता था। बहुत बड़ी संख्या में इतिहासकारों का मानना है कि यह युद्ध मुलाराजा  ने जीता था परंतु वही मुस्लिम  इतिहासकारों का मानना है कि यह युद्ध  भीमदेव द्वितीय ने ही जीता था ।

मोहम्मद गौरी  इस युद्ध में हारा जरूर था परंतु वह किसी भी कीमत पर भारत में अपना कब्जा जमाना चाहता था।  इसीलिए वह इस युद्ध के लगभग 13 साल बाद एक बार फिर भारत पर आक्रमण करने वाला था जिस आक्रमण का जवाब तत्कालीन दिल्ली के राजा पृथ्वीराज चौहान ने ऐसा दिया कि मोहम्मद गौरी को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा। परंतु मोहम्मद गौरी एक बार फिर दिल्ली पर आक्रमण करने को आतुर था और इस बार उसने पृथ्वीराज चौहान को  हराकर  दिल्ली पर कब्जा कर लिया । मोहम्मद गौरी ज्यादा दिन तक हिंदुस्तान नहीं रुका, उसने अपने गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक को यहां की जिम्मेदारी सौंप दी और वह वापस चला ।

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