गुलजारी लाल नंदा की जीवनी – Gulzarilal Nanda Biography in Hindi

  • श्री गुलज़ारी लाल नन्दा
  • प्रथम कार्यकाल – 27 मई 1964 – 9 जून 1964                                                                                  
  • द्वितीय कार्यकाल – 11 जनवरी 1966 – 24 जनवरी 1966                               
  • जन्म – 1898
  • मृत्यु – 1998              
  • राजनीतिक पार्टी – काँग्रेस                                                                                                              
  • निर्वाचन क्षेत्र – बंबई, साबरकांठा इत्यादि
gulzarilal nanda biography in hindi

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4 जुलाई 1898 को पंजाब के सियालकोट में जन्मे गुलजारीलाल नंदा को दो बार भारत के कार्यवाहक प्रधानमंत्री के पद पर रहने का मौका मिला था। भारत की राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखने के साथ-साथ श्री गुलजारीलाल नंदा एक अनुभवी अर्थशास्त्री (Economist) भी थे।

गुलजारी लाल नंदा का प्रारम्भिक जीवन

एक हिंदू गुर्जर परिवार में जन्मे श्री नन्दा मूलरूप से ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के सियालकोट (अब पाकिस्तान में) के रहने वाले थे। उनकी शिक्षा लाहौर, आगरा और प्रयागराज (इलाहाबाद) में हुई थी। प्रयागराज में अपनी शिक्षा के बाद श्री गुलजारीलाल नंदा ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय (1920-1921) में श्रम समस्याओं पर एक शोध छात्र के रूप में कार्य किया था। इसके बाद उनका चयन 1921 में नेशनल कॉलेज (बॉम्बे) में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रूम में हुआ।

राजनीतिक जीवन

देश में राष्ट्रीय जागरण के फलस्वरूप होने वाले आंदोलनों से वे अछूते नहीं रहे और 1921 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में काँग्रेस द्वारा शुरू किए गए असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement) में शामिल हो गए। श्री गुलज़ारीलाल नन्दा के श्रम समस्याओं में विशेषता रखने के कारण उन्हे अहमदाबाद टेक्सटाइल लेबर एसोसिएशन के सचिव के तौर पर 1922 में नियुक्त किया गया। श्री नन्दा ने अहमदाबाद टेक्सटाइल लेबर एसोसिएशन के सचिव के तौर पर 1922 से लेकर 1946 तक कार्य किया। ब्रिटिश सरकार के खिलाफ होने वाले आंदोलनों में भाग लेने के कारण उन्हे कई बार जेल भी जाना पड़ा। महात्मा गांधी के सत्याग्रह से प्रभावित श्री नन्दा को सत्याग्रह में भाग लेने के लिए 1932 में कारावास में रखा गया। इसके बाद उन्हे 1942 से 1944 तक भी जेल में रहना पड़ा था। किन्तु अंग्रेजों द्वारा दिये दंड के कारण भी श्री नन्दा के देश के प्रति अपने उत्तरदायित्व में कोई कमी नहीं आई थी।

भारतीय स्वतन्त्रता आंदोलन से गहरा जुड़ाव होने के साथ-साथ श्री गुलज़ारीलाल नन्दा काँग्रेस की तरफ से विधानसभा चुनाओं में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे। श्री नंदा पहली बार 1937 में सम्पन्न हुए चुनाओं में बंबई (अब मुंबई) विधान सभा के लिए चुने गए और 1937 से 1939 तक बॉम्बे सरकार के संसदीय सचिव (श्रम और आबकारी) के पद पर कार्यरत थे। श्रम संबंधी अपने अनुभवों के कारण श्री नन्दा को बॉम्बे सरकार (1946-50) के श्रम मंत्री के रूप में भी कार्य करने का मौका मिला। इस पद पर उन्होने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। उदाहरण के लिए श्री नन्दा ने बंबई की विधानसभा में, श्रम मंत्री के रूप में, सफलतापूर्वक श्रम विवाद विधेयक (Labour Disputes Act) को पारित कराया था।

श्री नन्दा ने राष्ट्रीय योजना समिति के सदस्य के रूप में कार्य करने के साथ-साथ कस्तूरबा मेमोरियल ट्रस्ट के सचिव, हिंदुस्तान मजदूर सेवक संघ के सचिव; तथा Bombay Housing Board के President के रूप में भी अपनी सेवाएँ दीं। उन्होने भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (Indian National Trade Union Congress -INTUC) का आयोजन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी तथा बाद में इसके President भी बने।

संयुक्त राष्ट्र संघ के 1947 में आयोजित हुए International Labor Conference में श्री नन्दा भारत सरकार के सरकारी प्रतिनिधि के रूप में जिनेवा (Geneva) गए। इस सम्मेलन द्वारा नियुक्त “द फ्रीडम ऑफ एसोसिएशन कमेटी” में उन्होने कार्य किया। अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन (International Labor Conference ) के कार्यों के कारण स्वीडन, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, बेल्जियम और इंग्लैंड (England) देशों में श्रम और आवास की स्थिति का अध्ययन करने के लिए उन देशों का भ्रमण भी किया। इन देशों में श्रम समस्याओं पर अध्ययन करने के कारण श्री नन्दा का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर श्रमिकों और उनकी दशा (Labour situations) के संबंध में गहरा अनुभव हुआ।

भारत की आजादी के बाद देश के विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्यक्रम बनाए गए। इसके लिए योजना आयोग (Planning Commission) का गठन किया गया था। गुलज़ारीलाल नन्दा जी मार्च 1950 में योजना आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में नियुक्त हुए। किन्तु अगले वर्ष 1951 के सितंबर में, उन्हें केंद्र सरकार में योजना मंत्री के पद का कार्यभार सौंप दिया गया। योजना मंत्री के अतिरिक्त श्री गुलज़ारीलाल नन्दा को सिंचाई और बिजली के विभागों का दायित्व भी दिया गया। 1950 में भारत में संविधान लागू होने के बाद पहली बार 1952 में आम चुनाव कराये गए। इन चुनावों में नन्दा जी बंबई से लोक सभा के लिए चुनकर आए। उन्हें पुनः जवाहरलाल नेहरू की सरकार में सिंचाई,  बिजली और योजना मंत्री (Minister of Irrigation, Power and Planning ) के रूप में कार्य करने का मौका मिला। उन्होने कई अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

श्री गुलज़ारीलाल नन्दा को 1957 में हुए आम चुनावों में भी दोबारा चुना गया और वे श्रम और रोजगार तथा योजना के केंद्रीय मंत्री बने। इसके अलावा श्री नन्दा योजना आयोग के उपाध्यक्ष भी बनाए गए। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने 1959 में संघीय गणराज्य जर्मनी यूगोस्लाविया और ऑस्ट्रिया का दौरा भी किया था।

भारत की राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले श्री नन्दा ने 1962 का लोकसभा चुनाव भी लड़ा था जिसमें एक बार फिर उन्हे सफलता मिली। 1962 का आम चुनाव (General Election) उन्होने गुजरात में साबरकांठा सीट से लड़ा था  श्री ननदा की कई महत्वपूर्ण आयोजनों, सम्मेलनों और संस्थाओं में भागिदारी थी। इनमें से एक कांग्रेस फोरम फॉर सोसलिस्ट एक्शन भी था जिसकी शुरुआत उन्होने 1962 में की थी। श्रम मंत्रालय में अपने लंबे अनुभव के अलावा वे 1963 से 1966 तक गृहमंत्री भी रहे।

1964 में तत्कालीन भारत के प्रधान मंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद श्री गुलज़ारीलाल नन्दा ने 27 मई, 1964 को भारत के कार्यवाहक प्रधान मंत्री के रूप में शपथ ली। कार्यवाहक प्रधान मंत्री का उनका पहला कार्यकाल केवल 13 दिनों तक के लिए था। इस पद पर वे 9 जून 1964 तक कार्यरत थे। श्री नन्दा ने दूसरी बार भारत के कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में शपथ 11 जनवरी, 1966 को ली थी जब ताशकंद में श्री लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु हो गयी थी। उनका कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में दूसरा कार्यकाल भी केवल 13 दिनों के लिए ही था जो 24 जनवरी 1966 के दिन इन्दिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने पर समाप्त हो गया।

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