गुलजारी लाल नन्दा की जाती क्या है।

पंजाब के सियालकोट में 4 जुलाई 1898 को जन्मे गुलजारीलाल नंदा दो बार भारत के कार्यवाहक प्रधानमंत्री के पद पर विराजमान हुए थे। भारत की राजनीति और काँग्रेस पार्टी में एक महत्वपूर्ण स्थान रखने के साथ-साथ श्री गुलजारीलाल नंदा एक उच्च-स्तर के अर्थशास्त्री (Economist) भी थे।

guljarilal nanda ki jaati

गुलजारी लाल नन्दा जी एक पंजाबी परिवार से संबंध रखते थे और विवरणों के मुताबिक उनकी जाती “खत्री” थी। किन्तु कुछ उल्लेखों में उन्हे गुर्जर परिवार से भी संबन्धित बताया गया है। नन्दा उपनाम के लोग पंजाब, ओड़ीशा और दिल्ली में अधिक पाये जाते हैं। हालांकि ओड़ीशा के नन्दा ब्राह्मण जाती के होते हैं और पंजाब और उत्तर भारत के नन्दा उपनाम  के लोग खत्री जाती से संबन्धित होते हैं।

नन्दा जी के पिता श्री बुलाकी राम नंदा थे और माता का नाम श्री ईश्वर देवी नंदा था। एक पंजाबी परिवार में जन्मे श्री नन्दा मूलरूप से ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के सियालकोट (अब पाकिस्तान में) के रहने वाले थे। उनकी शिक्षा लाहौर, आगरा और प्रयागराज (इलाहाबाद) में हुई थी। प्रयागराज ( पहले इलाहाबाद) में अपनी शिक्षा के बाद श्री गुलजारीलाल नंदा ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय (1920-1921) में श्रम समस्याओं पर एक शोध छात्र के रूप में कार्य किया था। इसके बाद उनका चयन 1921 में नेशनल कॉलेज (बॉम्बे) में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रूम में हुआ।

1964 में तत्कालीन भारत के प्रधान मंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू की असमय हृदयाघात से मृत्यु के बाद श्री गुलज़ारीलाल नन्दा ने 27 मई, 1964 को भारत के कार्यवाहक प्रधान मंत्री के रूप में शपथ ली। कार्यवाहक प्रधान मंत्री का उनका पहला कार्यकाल केवल 13 दिनों तक के लिए था। इस पद पर वे 9 जून 1964 तक कार्यरत थे। श्री नन्दा ने दूसरी बार भारत के कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में शपथ 11 जनवरी, 1966 को ली थी जब ताशकंद में श्री लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु हो गयी थी। उनका कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में दूसरा कार्यकाल भी केवल 13 दिनों के लिए ही था जो 24 जनवरी 1966 के दिन इन्दिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने पर समाप्त हो गया।

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