नकारात्मक सोच क्या है – नकारात्मक सोच से छुटकारा कैसे पाये।

नकारात्मक विचारों पर विश्वास करना सफलता की राह में सबसे बड़ा रोड़ा हैचार्ल्स  ऍफ़ ग्लामेन

नकारात्मक सोच दुनिया के किसी भी व्यक्ति में किसी भी चीज में किसी भी वातावरण में उसके नकारात्मक पक्ष को देखने वाली सोच को कहते हैं। कुछ दर्शन शास्त्रियों के अनुसार नकारात्मक सोच का आधार डर है, अर्थात नकारात्मक सोच ( negative thinking) वाला व्यक्ति  किसी भी तरह स्थिति परिवर्तन से डरता है इसीलिए वह किसी भी स्थिति के परिवर्तन में होने वाले नकारात्मक पक्ष पर जोर देता है ताकि वह स्थिति कभी परिवर्तित न हो सके।

सरल शब्दों में कहें तो स्टेटस या यथा स्थिति नकारात्मक सोच वाले व्यक्तियों की आदर्श स्थिति होती है वह चीजों को बदलते हुए नहीं देखना चाहते हैं इसीलिए वे बदलाव के नकारात्मक पक्ष पर जोर देते हुए बदलाव का विरोध करते हैं। किसी भी तरह का नया काम करना किसी भी तरह का जोखिम उठाना स्थिति में एक तरह का बदलाव है और नकारात्मक सोच आपको  ऐसे किसी भी कार्य को करने से रोकती है जो कि नया हो । आप अपने चारों और सफल व्यक्तियों के जीवन में झांक कर देखिए उन्होंने कुछ ना कुछ नया किया है  उन सारे व्यक्तियों ने वे काम नहीं करें जिनकी उनसे अपेक्षा की जा रही थी बल्कि कुछ नया किया अगर उनकी सोच नकारात्मक होती तो वे इन नए कामों को कभी कर ही नहीं पाते अर्थात किसी  भी व्यक्ति एवं उसकी सफलता के बीच आने वाले सबसे बड़े   अवरोधों  में नकारात्मक सोच एक महत्वपूर्ण एवं बड़ा  अवरोध है ।

negative thinking kya hai

अभी आप विचार कर रहे होंगे कि नकारात्मक सोच कैसे जीवन की दिशा परिवर्तित कर सकती है  तो इसका उत्तर यह है कि नकारात्मक सोच दो चरणों में अपना काम करती है पहला चरण किसी भी चीज के, किसी भी अवस्था के सकारात्मक पक्ष को  अयोग्य करार दे देना और दूसरा चरण उसी अवस्था या स्थिति के नकारात्मक पक्ष को बढ़ा चढ़ाकर  बताना ।

चलिए हम इन्हें एक उदाहरण के द्वारा समझने का प्रयास करते हैं मान लीजिए कि आप राजनीति में जाना चाहते हैं और अब्राहम लिंकन आपके आदर्श हैं तो नकारात्मक सोच वाला व्यक्ति इस बात पर ध्यान नहीं देगा कि अब्राहम लिंकन ने अपने जीवन में क्या हासिल किया, और इतिहास में उनकी जगह कितनी ऊंची है, बल्कि वह व्यक्ति जो नकारात्मक सोच रखता है वह अब्राहम लिंकन के जीवन के उसी काल पर ज्यादा ध्यान देगा जहां पर वे चुनाव हारे हैं और उस काल पर जहां वे चुनाव जीते हैं  उस काल को नजरअंदाज कर देगा।

वह युद्ध के मामले में भी वैसा ही करेगा जैसा कि हम जानते हैं कि अब्राहम लिंकन के काल में अमरीका में भयंकर ग्रह युद्ध हुआ तो वह नकारात्मक सोच वाला व्यक्ति युद्ध काल के शुरुआती वर्षों का बखान करेगा जिसमें अब्राहम लिंकन की सेना को काफी नुकसान उठाना पड़ा था वही वह व्यक्ति युद्ध  के अंतिम वर्षों को नजरअंदाज कर देगा जहां अब्राहम लिंकन के नेतृत्व वाले पक्ष ने जीत हासिल की। इन सबका आपके जीवन पर यह प्रभाव पड़ सकता है कि आप एक राजनीतिज्ञ बनने के अपने विचार को छोड़ दें और वही काम करते रहे जो आप कर रहे हैं अर्थात आप स्टेटस  या यथास्थिति में बने रहें और यही नकारात्मक विचार की आदर्श स्थिति है।

नकारात्मक विचार आपके दिमाग को संकीर्ण बना देते हैं जहां पर नई चीजों को करने की कोई जगह ही नहीं रहती है, ऐसी स्थिति में हो सकता है कि आपके पास कई ऐसे मौके आए जो आपकी सफलता का कारण बन सकते हो परंतु आप उन सभी को नज़रअंदाज़ कर देंगे क्योंकि नकारात्मक सोच के कारण आपके दिमाग में उनके लिए कोई जगह ही नहीं है आप जीवन में ऐसे ही जीना चाहते हैं जैसे कि आप जीवन जी रहे हैं भले ही आप इसमें खुश न हों परंतु आप इसमें परिवर्तन करने की इच्छा नहीं रखते हैं।

गणितज्ञ बर्टरेंड रसल के अनुसार

किसी भी तरह की नकारात्मक सोच इंसान के खुशी पाने के  लक्ष्य के लिए घातक हो सकती है।” ध्यान रहे  की बर्टरेंड रसल कोई  विचारक  या दर्शन शास्त्री नहीं है बल्कि वे  तो  गणित के  सेवक हैं इसीलिए उनका उपरोक्त वाक्य और भी ज्यादा महत्वपूर्ण बन जाता है क्योंकि वे बिना किसी सबूत के  कुछ भी नहीं बोलेंगे अर्थात उनके इस विचार के पीछे की नकारात्मक सोच  आपके और आपकी खुशी के बीच में आ सकती है  शाश्वत सत्य है। एक और चाइनीस विचारक लाओ जू   कहते हैं कि “ अगर आप उदास हैं तो आप भूतकाल में जी रहे हैं, अगर आप चिंतित  हैं तो आप भविष्य में जी रहे हैं और अगर आप शांत हैं तो आप वर्तमान में जी रहे हैं। ” यहां पर लाओ  हमें समझाना चाह रहे हैं कि नकारात्मक सोच वाले व्यक्ति या तो भविष्य की सोच रहे होते हैं या फिर  जो बीत चुका है उसका रोना रो रहे होते हैं परंतु वह व्यक्ति जो अपने वर्तमान में जी रहे हैं दोनों के मुकाबले कहीं  ज्यादा  शांत हैं। डेनिस विचारक  सोरेन  किर्कगार्ड  के अनुसार “  जीवन एक समस्या नहीं है  जिसका आपको हल निकालना है बल्कि यह एक सत्य है जिसका आपको अनुभव करना है।”  सोरेन इसे समझाते हुए कहते हैं कि नकारात्मक सोच वाले व्यक्ति  जीवन को एक समस्या मानते हैं और इसके प्रति नकारात्मक सोच रखते हैं इस कारण वे कभी उन चीजों का अनुभव कर ही नहीं सकते जो शायद सकारात्मक सोच के साथ उन्हें आनंद का अनुभव करा सकती थी।

अभी तक आपने जो कुछ पढ़ा वह नकारात्मक विचार का वैचारिक पक्ष था परंतु नकारात्मक विचार का स्वास्थ्य  पर भी अत्यंत बुरा प्रभाव पड़ता है। वैज्ञानिकों के अनुसार नकारात्मक विचार आपके हार्मोन संतुलन को बिगाड़ देते हैं यही नहीं वह दिमाग में उस केमिकल की भी कमी कर देते हैं जो खुशी के लिए अत्यंत आवश्यक है फल स्वरूप आप दुखी रहते हैं। नकारात्मक सोच क्रॉनिक स्ट्रेस का भी एक  मुख्य कारण है। नकारात्मक सोच हाइपर टेंशन का कारण भी बन सकता है जो आपके ब्लड प्रेशर को बुरी तरह प्रभावित करता है।

आपको यह विचार करना होगा कि आप सकारात्मक सोच रखना चाहते हैं या नकारात्मक सोच रखना चाहते हैं । आपको इस बात का निर्णय लेना होगा कि आप भविष्य या भूतकाल में जीना चाहते हैं या फिर वर्तमान का आनंद लेना चाहते हैं। आपको इस बात का निर्णय लेना होगा कि आपके लिए जीवन एक समस्या है या फिर एक सत्य जिसे अनुभव करना ही आपको आनंद की ओर ले जा सकता है।

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