भारत का सबसे बड़ा पुस्तकालय कौन सा है।

भारत आदि काल से ही शिक्षा का केंद्र रहा है। आदि काल में  विदेशों से छात्र ज्ञान हासिल करने के लिए भारत में आते थे। आज भी भारत की शिक्षा व्यवस्था अच्छी मानी जाती है। यहां बड़े स्तर पर स्कूल,  कॉलेज / यूनिवर्सिटी इत्यादि भी मौजूद है। बड़ी संख्या में स्कूल कॉलेज के साथ साथ शिक्षा के लिए ज़रूरी चीज़, पुस्तकालय ( Library )  भी हैं। भारत के अलग अलग राज्यों में पुस्तकालय मौजूद है।

bharat ki sabse badi library kounsi hai

यहां मौजूद पुस्तकालय अलग अलग क्षमता के हैं। आंकड़ो के अनुसार भारत में मौजूद सभी छोटे बड़े पुस्तकालयों को मिला कर, लगभग 70 हज़ार के आसपास पब्लिक पुस्तकालय मौजूद हैं। इतनी बड़ी संख्या में मौजूद पुस्तकालयों में से सबसे बड़े पुस्तकालय की बात करें तो, भारत का सबसे बड़ा पुस्तकालय पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर में मौजूद है। इस पुस्तकालय का नाम नेश्नल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया ( National Library of India ) है।

National Library of India – भारत का सबसे बड़ा पुस्तकालय

  • संक्षिप्त परिचय

समय के साथ यह लाइब्रेरी भी अपना सफर तय करता रहा है। अलग-अलग समय में इसके नाम बदले जाते रहे हैं, तथा इस लाइब्रेरी में कई अन्य लाइब्रेरी को मिला कर अंततः National Library of India के रूप में स्थापित किया गया है।  भारत सरकार के Ministry of Culture के अंतर्गत आने वाले इस लाइब्रेरी को National Library of India का नाम 1 फरवरी 1953 को मिला। इससे पहले तक यानी 30 जनवरी 1903 से यह लाइब्रेरी Imperial Library के नाम से जाना जाता था।

National Library of India का इतिहास

इस Library का इतिहास बहुत ही पुराना है। समय के साथ इस लाइब्रेरी के नाम बदलते गए। इस लाइब्रेरी के इतिहास को देखें तो सबसे पहले इसकी शुरुआत 1836 में Calcutta Public Library के रूप में कई गयी थी। उस समय इस लाइब्रेरी के शुरू करने का मुख्य उद्देश्य गरीब छात्रों को एक तय समय के लिए किताबों की सुविधा प्रदान करना था। छात्र के साथ-साथ इसे आम जनों को भी ध्यान में रखते हुए बनाया गया था।

यह लाइब्रेरी एक गैर सरकारी संस्था थी। इसलिए 1836 में शुरू करने के बाद इसे और बढ़ाने और जारी रखने के लिए एक ऐसी व्यवस्था बनाई गई जिसके तहत कोई भी व्यक्ति उस समय 300 रुपये दे कर इस Library के मालिक बन सकता था। 1836 के दौर में 300 रुपये कितनी बड़ी रकम होती थी, आप इसका अंदाजा लगा सकते हैं। 300 रुपए अदा कर इस लाइब्रेरी के पहले मालिक Dwarkanath Tagore बने थे। Dwarkanath अपने समय के बहुत बड़े उद्योगपति थे। इन्हें भारत का पहला उद्योगपति भी माना जाता है।

Calcutta Public Library के अलावा 1891 में Imperial Library की नींव रखी गयी। इस Library में मुख्य रूप से उस समय उन्ही किताबों को जगह दी गयी थी जो कि अंग्रेज़ी प्रशासन के अंतर्गत आने वाले उस समय के कॉलेजों में पढ़ाई जाती थी। इस लाइब्रेरी में सिर्फ बड़े सरकारी अधिकारियों को ही आने का अधिकार था।

National Library की स्थापना

1903 में उस समय भारत के वायसराय रहे Lord Curzon ने एक पब्लिक लाइब्रेरी बनाने की सोची तथा उस समय के बड़े Library में गिने जाने वाली Calcutta Public Library तथा Imperial Library को नोटिस जारी करते हुए दोनो लाइब्रेरी को मिला कर एक बड़ी लाइब्रेरी बनाने का प्रस्ताव रखा। इसके बाद दोनों को मिला कर Imperial Library की शुरुआत की गई तथा 30 जनवरी 1903 को इसका उद्घाटन किया गया।

आज़ादी के बाद इसी Imperial Library को भारत सरकार ने National Library घोषित कर दिया। इसके बाद इस लाइब्रेरी का स्थान The Esplanade से बदल कर Belvedere Estate में कर दिया तथा 1 फरवरी 1953 को इस लाइब्रेरी शुरुआत National Library के रूप में की गई।

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