भारत का राजनीतिक इतिहास – Indian Politics In Hindi

इस हिस्से में हमने भारत के राजनीतिक इतिहास को जानने का प्रयत्न किया है और हमने इतिहास के केवल उसी हिस्से पर ध्यान दिया है जो कि स्वतंत्रता के बाद का है क्योंकि स्वतंत्रता के बाद ही भारत नाम का राष्ट्र अस्तित्व में आया इससे पहले भी यह राष्ट्र दुनिया के पटल पर उपलब्ध था परंतु एक इकाई के रूप में भारत 15 अगस्त 1947 को ही सामने आता है। राजनीति के इस हिस्से को हमने उस समय के प्रधानमंत्रियों के माध्यम से जानने का प्रयत्न किया है।

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पहला, दूसरा ,तीसरा एवं चौथा प्रधानमंत्री कार्यकाल

स्वतंत्र भारत के पहले चार प्रधानमंत्री कार्यकाल में पंडित जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री थे। उनका प्रधानमंत्री के रूप में पहला कार्यकाल 15 अगस्त 1947 से 15 अप्रैल 1952 के बीच में था। प्रधानमंत्री के रूप में नेहरु जी का दूसरा कार्यकाल 15 अप्रैल 1952 से 17 अप्रैल 1957 के बीच में था। प्रधानमंत्री के रूप में उनका तीसरा कार्यकाल 17 अप्रैल 1957 से 2 अप्रैल 1962 तक का था। प्रधानमंत्री के रूप में पंडित नेहरू का चौथा एवं अंतिम कार्यकाल 2 अप्रैल 1962 से 27 मई 1964 तक का था।

पंडित नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को हुआ एवं मृत्यु 27 मई 1964 को हुई । वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे उन्होंने कई किताबों की भी रचना की जिसमें डिस्कवरी ऑफ इंडिया सबसे प्रमुख है। जवाहरलाल नेहरू को भारत के शुरुआती संस्थानों को  बनाने का श्रेय जाता है उदाहरण के तौर पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी आदि। पंडित नेहरू के कार्यकाल के दौरान भारत दो बार युद्ध लड़ा पहला 1947-48 में और दूसरा 1962 में। पंडित नेहरू को भारत की विदेश नीति बनाने का श्रेय दिया जाता है क्योंकि वह कई बार प्रधानमंत्री के साथ साथ विदेश मंत्री भी रहे। जब पंडित नेहरू प्रधानमंत्री थे तब पूरी दुनिया शीत युद्ध के दौर में थी दुनिया के अधिकतर देश या तो संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ थे या फिर सोवियत रूस के साथ थे इस समय नेहरु जी ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन की शुरुआत की और ऐसे देशों को अपने साथ लेकर आए  जो  ना तो संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ जाना चाहते थे ना ही सोवियत रूस के साथ बल्कि अपनी एक स्वतंत्र विदेश नीति बनाना चाहते थे।  गुटनिरपेक्ष आंदोलन के लिए सारी दुनिया उन्हें आज भी याद रखती है।

  • पांचवा प्रधानमंत्री कार्यकाल

पंडित नेहरू की मृत्यु के बाद गुलजारी लाल नंदा भारत के कार्यकारी प्रधान मंत्री बने। उनका कार्यकाल केवल 13 दिनों का था जिसके पश्चात लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बने। गुलजारी लाल नंदा का कार्यकारी प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल 27 मई 1964 को शुरू होता है और 9 जून  1964 को खत्म होता है अर्थात वे 13 दिन तक भारत के प्रधानमंत्री थे यह  बात अत्यंत दिलचस्प है कि वे भारत के  इकलौते प्रधानमंत्री नहीं है जो 13 दिन तक प्रधानमंत्री रहे हैं हम आगे चलकर एक और प्रधानमंत्री की बात करेंगे जो  केवल 13 दिन के लिए प्रधानमंत्री बने थे।

  • छठवां प्रधानमंत्री कार्यकाल

गुलजारीलाल नंदा के बाद लाल बहादुर शास्त्री भारत के अगले प्रधानमंत्री बने लाल बहादुर शास्त्री का कार्यकाल 9 जून 1964 में शुरू हुआ और 11 जनवरी 1966 में उनकी मृत्यु के साथ खत्म हुआ। लाल बहादुर शास्त्री का कुल कार्यकाल 1 वर्ष 216 दिनों का रहा ।लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल के दौरान ही 1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध हुआ।

लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को हुआ एवं उनकी मृत्यु 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में  हुई। लाल बहादुर शास्त्री ने जय जवान जय किसान का नारा दिया था। उन्होंने 1965 के युद्ध के  दौरान भारत को मजबूत नेतृत्व प्रदान किया।

  • सातवां प्रधानमंत्री कार्यकाल

लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद गुलजारीलाल नंदा एक बार फिर भारत के कार्यकारी प्रधानमंत्री बने  और इस बार  भी  गुलजारीलाल नंदा केवल 13 दिनों तक प्रधानमंत्री रहे।

  • आठवा नौवां  एवं दसवां प्रधानमंत्री कार्यकाल:

गुलजारी लाल नंदा के बाद इंदिरा गांधी भारत की तीसरी पूर्णकालिक प्रधानमंत्री बनी। इंदिरा गांधी को एक के बाद एक तीन प्रधानमंत्री कार्यकाल मिले ।  इंदिरा गांधी का पहला प्रधानमंत्री कार्यकाल 24 जनवरी 1966 से 4 मार्च 1967 तक का था, उनका दूसरा प्रधानमंत्री कार्यकाल 4 मार्च 1967 से 15 मार्च 1971 तक का था, उनका तीसरा प्रधानमंत्री कार्यकाल 15 मार्च 1971 से 24 मार्च 1977 तक का था।  इस तरह प्रधानमंत्री के रूप में इंदिरा गांधी ने एक साथ 11 वर्ष एवं 59 दिनों तक इस देश पर शासन किया। परंतु इंदिरा गांधी का यह अंतिम कार्यकाल नहीं था वह एक बार फिर भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने वाली थी।

इंदिरा गांधी का जन्म 19 नवंबर 1917 को हुआ एवं उनकी मृत्यु 31 अक्टूबर 1984 को हुई। इंदिरा गांधी के पिता पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री थे। इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी भी कांग्रेस के बड़े नेता थे। इंदिरा गांधी के दोनों पुत्र  एक के बाद एक राजनीति में आए सबसे पहले संजय गांधी राजनीति में आए और उनकी मृत्यु के पश्चात राजीव गांधी राजनीति में आए जो कि इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद भारत के अगले प्रधानमंत्री बने  , उनके बारे में हम आगे चल कर बात करेंगे। इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध हुआ जिसमें भारत को निर्णायक विजय प्राप्त हुई जिसके पश्चात पूर्वी पाकिस्तान ,पाकिस्तान से हमेशा के लिए अलग होकर बांग्लादेश नाम का स्वतंत्र राष्ट्र बन गया।  इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान ही बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया एवं उनके कार्यकाल के दौरान ही भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण किया इन दोनों घटनाओं के बारे में हम आगे विस्तार से  पढ़ेंगे।एक और घटना जो इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान हुई वह थी  भारत में इमरजेंसी लागू करना ,इसके बारे में भी हम आगे समझेंगे।

  • ग्यारहवां प्रधानमंत्री कार्यकाल

इंदिरा गांधी के बाद मोरारजी देसाई भारत के चौथे पूर्णकालिक प्रधानमंत्री बने। मोरारजी देसाई का कार्यकाल 24 मार्च 1977 से शुरू हुआ एवं 28 जुलाई 1979 को खत्म हुआ अर्थात कुल मिलाकर 2 वर्ष 126 दिनों के लिए भारत के प्रधानमंत्री रहे।

मोरारजी देसाई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे और कांग्रेस के बड़े नेता थे। इंदिरा गांधी से मतभेद होने के कारण उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर एक नई पार्टी बनाई जो कि 1977 में सत्ता में आई। मोरारजी देसाई का जन्म  और 29 फरवरी 1896 को हुआ और उनकी मृत्यु 10 अप्रैल 1995 को हुई।

  • 12वां प्रधानमंत्री कार्यकाल

मोरारजी देसाई के पश्चात चौधरी चरण सिंह भारत के पांचवें  पूर्णकालिक प्रधानमंत्री बने। उनका कार्यकाल  28 जुलाई 1979 से लेकर 14 जनवरी 1980 तक रहा अर्थात 170 दिनों तक चौधरी चरण सिंह इस देश के प्रधानमंत्री रहे।

चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसंबर 1902 को हुआ एवं उनकी मृत्यु 29 मई 1987 को हुई। वह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे और ऐसा माना जाता है कि चौधरी चरण सिंह आज तक के किसानों के सबसे बड़े नेता थे।

  • 13 वां प्रधानमंत्री कार्यकाल

चौधरी चरण सिंह के पश्चात इंदिरा गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इस बार उनका कार्यकाल 14 जनवरी 1980 से लेकर 31 अक्टूबर 1984 को उनकी मृत्यु होने तक रहा अर्थात 4 वर्ष एवं 291 दिनों तक।

  • 14 वां  प्रधानमंत्री कार्यकाल

इंदिरा गांधी की मृत्यु के पश्चात उनके पुत्र राजीव गांधी देश के छठे पूर्णकालिक प्रधानमंत्री बने। राजीव गांधी ने इंदिरा गांधी की मृत्यु के उपरांत भारतीय प्रधानमंत्री पद की शपथ ली परंतु कुछ ही दिनों में लोकसभा को भंग करने एवं अगले चुनाव करवाने की घोषणा कर दी जिसमें में भारी बहुमत के साथ दोबारा चुनकर आए इस तरह वे दो कार्यकाल एक साथ  शासन करने वाले प्रधानमंत्रियों में से एक थे उनका पहला कार्यकाल जो बहुत छोटा कार्यकाल था 31 अक्टूबर 1984 को शुरू होता है एवं 31 दिसंबर 1984 को खत्म होता है वहीं दूसरा एवं पूर्णकालिक कार्यकाल 31 दिसंबर  1984 को शुरू होता है एवं 2 दिसंबर 1989 को खत्म होता है।

राजीव गांधी एक आधुनिक सोच वाले प्रधानमंत्री थे उन्होंने भारत में कंप्यूटर क्रांति की नीव  रखी । उनके इसी कदम के फल स्वरुप भारत में इन्फर्मेशन टेक्नॉलॉजी का एक बहुत बड़ा सेवा क्षेत्र बन गया जो आज भारत में विदेशी मुद्रा कमाने  वाला सबसे बड़ा क्षेत्र है।

  • 15 वां प्रधानमंत्री कार्यकाल

राजीव गांधी के पश्चात विश्वनाथ प्रताप सिंह भारत के सातवें पूर्णकालिक प्रधानमंत्री बने।उनका कार्यकाल 2 दिसंबर 1989 से 10 नवंबर 1990  तक रहा अर्थात उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में इस देश में 343 दिनों तक शासन किया। विश्वनाथ प्रताप सिंह आज तक इस देश में मंडल कमीशन के लिए जाने जाते हैं जिनकी अनुशंसाओं को उन्होंने लागू कर दिया था।

  • 16 वां  प्रधानमंत्री कार्यकाल

विश्वनाथ प्रताप सिंह के पश्चात चंद्रशेखर भारत के आठवें पूर्णकालिक प्रधानमंत्री बने। उनका कार्यकाल 10 नवंबर 1990 से शुरू होकर 21 जून 1991 तक गया अर्थात वे कुल मिलाकर 223 दिनों तक प्रधानमंत्री रहे। चंद्रशेखर के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान ही 1991 का वित्तीय संकट आया जिसके फलस्वरूप आगे चलकर  उदारवादी अर्थ व्यवस्था की नींव रखी गई परंतु  यह अगले प्रधानमंत्री के कार्यकाल में हुआ। चंद्रशेखर के कार्यकाल के दौरान ही राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी।

  • 17 वां  प्रधानमंत्री कार्यकाल

चंद्रशेखर सिंह के पश्चात पीवी नरसिम्हा राव भारत के नौवें पूर्णकालिक प्रधानमंत्री बने। नरसिम्हा राव का कार्यकाल 21 जून 1991 से शुरू होकर 16 मई 1996 तक चला और वे  कुल मिलाकर 4 वर्ष एवं 330 दिनों तक इस देश के प्रधानमंत्री रहे।

पी वी नरसिम्हा राव का कार्यकाल भारत में उदारवादी अर्थव्यवस्था की शुरुआत करने के लिए जाना जाता है।   इस नई उदारवादी अर्थव्यवस्था के लिए वह भी उतने ही जिम्मेदार है जितने डॉ मनमोहन सिंह।

  • 18 वां  प्रधानमंत्री कार्यकाल

नरसिम्हा राव  के बाद अटल बिहारी वाजपेई ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली ।परंतु जब वे लोकसभा में अपना विश्वास मत साबित करने की स्थिति में नहीं थे तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया एवं कुछ दिनों तक ही प्रधानमंत्री रहे।

  • 19 वां  प्रधानमंत्री कार्यकाल

अटल बिहारी वाजपेई के पश्चात एचडी देवेगौड़ा इस देश के प्रधानमंत्री बने उनका कार्यकाल 1 जून 1996 से लेकर 21 अप्रैल 1997 तक चला अर्थात में कुल मिलाकर 324 दिनों के लिए इस देश के प्रधानमंत्री रहे।  वे संयुक्त मोर्चा की सरकार के पहले प्रधानमंत्री थे।

  • 20 वां  प्रधानमंत्री कार्यकाल

एचडी देवेगौड़ा के पश्चात इंद्र कुमार गुजराल भारत के अगले प्रधानमंत्री बने  उनका कार्यकाल 21 अप्रैल 1997 से लेकर 19 मार्च 1998 तक कुल मिलाकर 332 दिनों का रहा।

  • 21 वां प्रधानमंत्री कार्यकाल

इंद्र कुमार गुजराल के बाद अटल बिहारी वाजपई प्रधानमंत्री बने एवं इस बार वह दो बार प्रधानमंत्री बनने वाले थे।  उनका पहला कार्यकाल 19 मार्च 1998 से लेकर 10 अक्टूबर 1999 तक रहा एवं दूसरा कार्यकाल 10 अक्टूबर 1999 से लेकर 22 मई 2004 तक का रहा ।अर्थात वह कुल मिलाकर 6 वर्ष एवं 64 दिनों के लिए देश के प्रधानमंत्री रहे।

अटल बिहारी वाजपेई के इस प्रधानमंत्री कार्यकालों में कुछ महत्वपूर्ण घटनाएं हुई जैसे कि भारत ने अपना दूसरा परमाणु परीक्षण 1998 में किया।   अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल के दौरान ही कारगिल युद्ध हुआ जिसमें भारत की सेना ने अपना अदम्य साहस दिखाते हुए घुसपैठियों के द्वारा कब्जा की हुई जमीन को वापस लिया।

  • 22 वां प्रधानमंत्री कार्यकाल

अटल बिहारी वाजपेई के पश्चात  मनमोहन सिंह ने दो बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। मनमोहन सिंह का पहला कार्यकाल 22 मई 2004 से 22 मई 2009 तक रहा वहीं उनका दूसरा कार्यकाल 22 मई 2009 से 26 मई 2014 तक का रहा।

मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था में बहुत तेजी से तरक्की की और ऐसा माना जाता है कि भारत की गरीब जनसंख्या का सबसे बड़ा हिस्सा गरीबी से ऊपर उनके कार्यकाल के दौरान ही लाया गया। परंतु उनके कार्यकाल के अंतिम हिस्से में उनकी सरकार कई सारे भ्रष्टाचार के केसों की शंका में आई ।

  • 23 वां प्रधानमंत्री कार्यकाल

मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री कार्यकाल के पश्चात भारतीय जनता पार्टी के नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और वह अभी तक देश के प्रधानमंत्री हैं। नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ 26 मई 2014 को ली।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं में से नोटबंदी एवं जीएसटी का क्रियान्वयन प्रमुख है।

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