Indira Gandhi Biography (History) In Hindi – इंदिरा गाँधी की जीवनी।

  • श्रीमती इन्दिरा गांधी
  • कार्यकाल :- 24 जनवरी 1966 से 24 मार्च 1977 : 14 जनवरी 1980  से 31 अक्टूबर 1984
  • जन्म 1917 :- मृत्यु 1984
  • राजनीतिक पार्टी :- काँग्रेस
  • निर्वाचन क्षेत्र :- रायबरेली, चिकमगलूर, मेदक
indira gandhi biography in hindi

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इन्दिरा गांधी का नाम भारत के सबसे प्रभावशाली और ताकतवर प्रधानमंत्रियों में गिना जाता है। उनके समय में सत्ता का केन्द्रीयकरण व्यापक हो गया था। इन्दिरा गांधी के समय में ही India, Pakistan का 1971 में युद्ध हुआ था जिसके बाद बांग्लादेश (Bangladesh) एक स्वतंत्र देश बना। इन्दिरा गांधी का प्रधानमंत्री के तौर पर कार्यकाल अनेक महत्वपूर्ण निर्णयों से भरा है। उनके कार्यकाल में ही 1976 का संविधान संसोधन किया गया जिसने भारतीय संविधान को बदलकर रख दिया था। भारत में इन्दिरा गांधी के कार्यकाल में इमरजेंसी-Emergency  भी लागू की गयी थी।

इन्दिरा गांधी का प्रारम्भिक जीवन

19 नवंबर 1917 को जन्मीं इन्दिरा प्रियदर्शिनी गांधी जवाहरलाल नेहरू और कमला नेहरू की एकमात्र संतान (Only Child) थीं। इन्दिरा गांधी का जन्म उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) में हुआ था। शिक्षा के प्रति स्वाभाविक इच्छा होने के चलते इन्दिरा गांधी ने भारत के साथ-साथ foreign countries के कई संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की।

इन्दिरा गांधी की शिक्षा इकोले नोवेल, बेक्स (स्विट्जरलैंड), इकोल इंटरनेशनेल, जेनेवा, पुपिल्स ओन स्कूल, पूना और बॉम्बे, बैडमिंटन स्कूल, ब्रिस्टल, विश्व भारती, शांतिनिकेतन और सोमरविले कॉलेज, ऑक्सफोर्ड जैसे प्रसिद्ध संस्थानों से हुई थी। इसके अलावा इन्दिरा गांधी को कई महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध शैक्षिक संस्थानों से Honorary doctorate की उपाधि भी प्रदान की गयी। इनमें आंध्र, आगरा, बैंगलोर, विक्रम, पंजाब, गुरुकुल, नागपुर, जामिया मिलिया, पूना, ब्यूनस आयर्स के अल सल्वाडोर, टोक्यो के वासेदा, मॉस्को स्टेट, ऑक्सफोर्ड, चार्ल्स ऑफ प्राग, मॉरीशस, बगदाद और USSR की Universities का नाम शामिल है।

इन्दिरा गांधी को उनकी प्रभावशाली और उच्च Academic background के कारण कोलंबिया विश्वविद्यालय से प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया था।

इन्दिरा गांधी के पिता जवाहरलाल नेहरू भारत के स्वतन्त्रता आंदोलनों( Freedom struggle) के प्रमुख नेता थे। इस कारण उन्हे कई बार जेल भी जाना पड़ता था। लिहाजा इन्दिरा गांधी का बचपन काफी अकेले बीता था। किन्तु जवाहरलाल नेहरू और इन्दिरा गांधी के दादा श्री मोतीलाल नेहरू के भारतीय राजनीति में सक्रिय रहने के कारण इन्दिरा गांधी पर भी देशप्रेम और राष्ट्रीयता का प्रभाव बचपन से ही पड़ा था। इन्दिरा गांधी की माता कमला नेहरू का निधन 1936 में बीमारी के कारण हो गया था जिसके कारण वे और भी अकेली हो गईं।

इंदिरा गांधी स्वतंत्रता संग्राम में बचपन से ही सक्रिय रूप से involved थीं। इन्दिरा गांधी ने भारत के स्वतन्त्रता आंदोलन में अपना योगदान देने के लिए Non Cooperation आंदोलन के दौरान बच्चों की ‘Monkey Army’ की स्थापना की थी।

इन्दिरा गांधी ने 26 मार्च, 1942 को एक पारसी वकील फिरोज गांधी से शादी की। हालांकि इस विवाह के लिए इन्दिरा गांधी का परिवार सहमत नहीं था। Indira और Feroz को दो सन्तानें संजय और राजीव गांधी हुईं। इनमें से एक राजीव गांधी 1984 में  भारत के Prime Minister भी बने।

इंदिरा गांधी का राजनीतिक कैरियर

इन्दिरा गांधी के परिवार का माहौल शुरू से ही राजनीतिक (Political) था जिसके चलते इन्दिरा गांधी ने बचपन से हे राजनीति के दांव-पेंच सीख लिए थे। भारतीय स्वतन्त्रता संघर्ष में भी वो सक्रिय रहीं। अपने पिता श्री जवाहरलाल नेहरू के समाजवादी दृष्टिकोण ( Socialistic View) का प्रभाव इन्दिरा गांधी पर भी पड़ा था।

अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलनों में भाग लेने के कारण इन्दिरा गांधी को Quit India Movement में सितंबर 1942 में जेल में डाल दिया गया किन्तु वे बिना प्रभावित हुए राष्ट्र के प्रति Freedom Struggle में भाग लेती रहीं। 1947 में देश के बँटवारे के समय हुए दंगों के कारण देश के कई भाग प्रभावित हुए थे।

इन्दिरा गांधी के बढ़ते राजनीतिक कद के कारण उन्हे शीघ्र ही 1955 में कांग्रेस वर्किंग कमेटी का सदस्य बना दिया गया। इसके चार वर्षों के बाद वे इसकी अध्यक्ष भी बनीं। कांग्रेस के केंद्रीय संसदीय बोर्ड के सदस्य के रूप में भी इन्दिरा गांधी को 1958 में चयनित किया गया।  इन्दिरा गांधी अखिल भारतीय काँग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय एकता परिषद की अध्यक्ष बनने के अलावा 1956 में अखिल भारतीय युवा कांग्रेस की अध्यक्ष के पद पर भी विराजमान हुई।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सर्वोच्च पद यानि कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रेसिडेंट के पद पर भी उन्हे 1959 में कार्य करने का मौका मिला। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के पद पर वो दोबारा जनवरी 1978  में चुनी गईं।

Jawaharlal Nehru के 1947 में देश की आजादी के बाद प्रधानमंत्री बनने के बाद इन्दिरा गांधी भी दिल्ली चली गईं जहां उन्हे भारत में विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और अंतर्राष्ट्रीय हस्तियों से रूबरू होने और उनका स्वागत करने का मौका मिला। इसके अलावा इन्दिरा गांधी को जवाहरलाल नेहरू के साथ विदेशी यात्राओं में भी जाने का मौका मिला। इन यात्राओं ने इन्दिरा गांधी को international politics में व्यापक अनुभव कराए।

1964 में जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद श्री लाल बहादुर शास्त्री भारत के प्रधानमंत्री चुने गए। लाल बहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान 1964 से लेकर 1966 तक  इन्दिरा गांधी सूचना और प्रसारण मंत्री थीं।

इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री के रूप में

जनवरी 1966 में श्री लाल बहादुर शास्त्री के असमय निधन के बाद इन्दिरा गांधी 24 जनवरी 1966 को भारत की प्रधानमंत्री बनीं।  प्रधानमंत्री के रूप में उनका यह कार्यकाल जनवरी 1966 से मार्च 1977 तक चला। इस काल में इन्दिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री होने के साथ-साथ परमाणु ऊर्जा मंत्री भी थीं। इस दौरान कुछ समय के लिए उन्होने विदेश मंत्रालय (MEA) का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। इसके अतिरिक्त गृह मंत्रालय, अंतरिक्ष मंत्री, तथा Planning Commission के अध्यक्ष के रूप में भी उन्होने कार्य किया।

प्रधानमंत्री के रूप में इन्दिरा गांधी का अगला कार्यकाल 14 जनवरी, 1980 से शुरू हुआ जब उन्हे भारी बहुमत से लोकसभा चुनाओं में जनता ने चुना। प्रधानमंत्री के रूप में इन्दिरा गांधी ने हरित क्रांति(Green Revolution)के रूप में कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जिससे देश खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बन सके। इन कार्यक्रमों से जनता में उनकी लोकप्रियता काफी बढ़ी। किन्तु इन्दिरा गांधी के कुछ Decision ऐसे भी थे जिससे सामान्य जनमानस अपने आप को जोड़ नहीं पाया। उदाहरण के लिए सरकार द्वारा प्रायोजित नसबंदी का कार्यक्रम। हालांकि यह India की बढ़ती Population को रोकने के लिए किया गया उपाय था किन्तु लोगों के बीच यह बहुत आलोकप्रिय हुआ।

1971 में Bangladesh को आजाद कराने के लिए हुए आंदोलन में इन्दिरा गांधी ने अपनी पूरी Power झोंक दी। भारतीय सेना के साथ हुए पाकिस्तानी सेना के युद्ध में भारत की जीत हुई और पाकिस्तानी Army को मजबूर हो कर Surrender  करना पड़ा। इस घटना के बाद बांग्लादेश, एक नए देश के रूप में अस्तित्व में आया। बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजाद होने में सहायता करने के लिए इन्दिरा गांधी को मरणोपरांत बांग्लादेश का Highest Honour प्रदान किया गया।

इन्दिरा गांधी का नाम कुछ विवादों में भी घिरा रहा। 1972 के लोकसभा चुनावों के बाद, इन्दिरा गांधी पर चुनाओं में धांधली का आरोप लगाया गया था। इस मामले में Allahabad High Court में चले मुकदमे के बाद इन्दिरा गांधी को इलाहाबाद के उच्च न्यायालय द्वारा चुनावी भ्रष्टाचार का दोषी पाया गया और आने वाले 6 सालों में कोई भी चुनाव लड़ने पर रोक (Ban) लगा दी गयी। किन्तु इलाहाबाद उच्च न्यायालय का आदेश मानने के स्थान पर इन्दिरा गांधी ने देश में 25 जून को आपातकाल ( Emergency) की घोषणा कर दी। इस आपातकाल में Press और नागरिकों के अधिकारों को Suspend कर दिया गया। इन्दिरा गांधी के आदेश पर अधिकांश विपक्ष के नेताओं को बिना मुकदमे के हिरासत में ले लिया गया। मार्च 1977 में आपातकाल में छुट दी गयी और अगले आम चुनाओं ( General Elections) की घोषणा की गयी।

1977 में हुए आम चुनावों में इन्दिरा गांधी की हार हुई और जनता पार्टी की मोरारजी देसाई के नेतृत्व में सरकार बनी। 1971 में इन्दिरा गांधी को भारत रत्न से नवाजा गया।

इन्दिरा गांधी एक कुशल नेता होने के साथ-साथ एक अच्छी लेखिका के रूप में भी जानी जाती हैं। उनके द्वारा लिखी Books में द इयर्स ऑफ चैलेंज,  द इयर्स ऑफ एंडेवर’, ’इंडिया’ (लंदन) इत्यादि शामिल हैं। श्रीमती इन्दिरा गांधी ने भारत के साथ-साथ Foreign Countries की व्यापक रूप से यात्राएँ कीं।

इंदिरा गांधी की हत्या

1984 में पंजाब में सिख चरमपंथियों द्वारा एक अलग राज्य के लिए उपद्रव किए गए जिसके चलते उन्होने अमृतसर के पवित्र स्वर्ण मंदिर को अपने कब्जे में ले लिया। सिख चरमपंथियों से स्वर्ण मंदिर को छुड़ाने के लिए इन्दिरा गांधी ने सेना को भेजा जिसमें कई कई सिख मारे गए। इस घटना से सिखों में रोष फैल गया। 31 अक्टूबर, 1984 के दिन इन्दिरा गांधी की हत्या उनके दो विश्वसनीय अंगरक्षकों द्वारा कर दी गयी। ये हत्या इन्दिरा गांधी द्वारा स्वर्ण मंदिर में की गयी कार्यवाही का बदला लेने के लिए की गयी थी।

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