ISRO Full Form in Hindi – इसरो का पूरा नाम क्या है।

विगत वर्षों में भारत देश ने लगभग सभी विभागों में सराहनीय विकास किया है। फिर चाहे बात आर्थिक विकास की हो या सामाजिक मामलों की। खेल-कूद से लेकर राजनीति तक, देश ने अपना परचम सम्पूर्ण जगत में लहराया है। इसी प्रकार देश का एक अन्य विभाग भी है, जिसने बीते कुछ सालों में सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। वह विभाग ‘विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी’ का है। इस विभाग की बिडम्बना यह है कि, इसके बारे में चर्चा सिर्फ किसी खोज या नये निर्माण कार्य के दौरान बस होती है।

इसका सबसे बड़ा उदाहरण वर्तमान समय का चंद्रमा पर भेजा गया मिशन चंद्रयान-2 है। इसके दौरान समस्त लोगो की रुचि इस विषय मे एकाएक बढ़ गई, लेकिन उसके असफल होने के बाद लोगों का रुझान एकदम से इस विषय से पूरी तरह हट गया। इस मिशन के दौरान लोगो ने ISRO की भूमिका को समझा। लोगों की ‘इसरो’ के प्रति बढ़ती रुचि को देखते हुये इस आर्टिकल में हम इसको विस्तार से जानने की कोशिश करेंगे।

ISRO का FULL FORM

ISRO का Full form “Indian Space Research Organisation” है। अगर हिंदी भाषा में  इसको समझा जाये तो इसका हिंदी अनुवाद “भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन” होता है। यह हमारे देश का राष्ट्रीय अंतरिक्ष संस्थान है, जो अंतरिक्ष से जुड़े प्रत्येक पहलू पर खोज, चर्चा तथा सलाह करता है। देश के इस विशेष संस्थान का मुख्य कार्य देश के लिये अंतरिक्ष सम्बंधी विकसित तकनीक तथा नये नये सेटेलाइट व आविष्कारो को खोजना है। देश मे अन्तरिक्ष को एक नये मुकाम तक ले जाने से लेकर विशिष्ट खोज तक का पूर्ण कार्यभार “इसरो” की कार्य प्रणाली के अंतर्गत शामिल है।

ISRO की स्थापना

 ISRO की स्थापना वर्तमान समय से 50 वर्ष पूर्व की गई थी। वह दिन 15 अगस्त 1969 का था, जब  विक्रम साराभाई ने देश के सर्वश्रेष्ठ अंतरिक्ष संस्थान की स्थापना अपने कर कलमों से की। अगर हम इसके इतिहास के पन्नो को पलटे तो हम पाते है कि, वर्ष 1962 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने अंतरिक्ष अनुसंधान को परमाणु ऊर्जा विभाग (Department of Atomic Energy) की देखरेख में रखा था। उस समय परमाणु ऊर्जा विभाग की बागडोर होमी भाभा के हाथों में थी, जिन्होंने देश के विकास के लिए अंतरिक्ष को एक मुख्य आयाम माना।  

उनके उपरांत 1962 में एक संस्थान की रचना की गई, जिसको ‘अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए भारतीय राष्ट्रीय समिति’ (The Indian National Committee for Space Research) का नाम दिया गया। जिसको संक्षिप्त रूप से (INCOSPAR) के नाम से जाना गया। इस समिति का अध्यक्ष डॉ  विक्रम साराभाई को बनाया गया। इसके बाद 1969 में विक्रम साराभाई के आग्रह पर इस संस्थान का नाम बदलकर ISRO रख दिया गया।

जिसको वर्तमान समय मे Indian Space Research Organization के नाम से जाना जाता है। उसके बाद 1972 में जब भारत सरकार ने ‘अंतरिक्ष आयोग’ (Space Commission) तथा ‘अंतरिक्ष विभाग’ (Department of Space) की स्थापना की, तब ISRO को इसके अंतर्गत शामिल किया गया।

इसरो का मुख्यालय देश के “सिलिकॉन वैली” के नाम से मशहूर बेंगलुरू (Bengaluru) शहर में है। वर्तमान समय मे इसके प्रशासक डॉ॰ के॰ शिवान है। वर्ष 2019 के आंकड़ो के अनुसार इसरो में लगभग 16,900 कर्मचारी कार्यरत है, जबकि इस संस्थान का वार्षिक बजट ₹10,252 crore (US$1.5 billion) मापा गया है।

ISRO के केंद्र

देश की प्रमुख अंतरिक्ष संस्था होने के नाते इसरो ने पूरे देश मे अपने केंद्र खोले हुये है। जो देश के प्रत्येक कोने में शोधकार्य करते है। इसके अलावा अन्य कई सारी प्रयोगशालाएँ, तथा शोध विभाग भी इसरो ने देश के अलग अलग हिस्सों में स्थापित किये हुये है। जिनमे से  कुछ प्रमुख केंद्रो की सूची निम्न है –

1) Vikram Sarabhai Space Centre (VSSC)

2) Liquid Propulsion Systems Centre (LPSC)

3) Satish Dhawan Space Centre (SDSC) SHAR

4) National Remote Sensing Centre (NRSC)

5) ISRO Telemetry, Tracking and Command Network (ISTRAC)

6) ISRO Inertial Systems Unit (IISU)

7) U R Rao Satellite Centre (URSC)

8) ISRO Propulsion Complex (IPRC)

9) Space Applications Centre (SAC)

10) Development and Educational Communication Unit (DECU)

11) Laboratory for Electro-Optics Systems (LEOS)

12) Indian Institute of Remote Sensing (IIRS)

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