Jawaharlal Nehru Biography in hindi – जवाहर लाल नेहरू की जीवनी।

  • श्री जवाहरलाल नेहरू
  • कार्यकाल :- 15 अगस्त 1947 से 27 मई 1964
  • जन्म ;- 1889
  • मृत्यु :- 1964
  • राजनीतिक पार्टी :- काँग्रेस
  • निर्वाचन क्षेत्र :- फूलपुर, उत्तर प्रदेश 

jawaharlal nehru biography in hindi

जवाहरलाल नेहरू ( Jawaharlal Nehru ) – भारतीय स्वतन्त्रता आंदोलन में Mahatma Gandhi के विश्वासपात्र होने के साथ-साथ गांधी जी के बाद सबसे महत्वपूर्ण हस्तियों में से एक थे। भारत के 1st  Prime Minister नेहरू का दृष्टिकोण समाजवाद की तरफ था और वो सामाजिक न्याय में विश्वास रखते थे। देश की आजादी के बाद नेहरू ने प्रधानमंत्री के रूप में विकास की जो रूपरेखा बनाई उस पर लगभग 50 Years तक भारत में आने वाली सरकारों ने कार्य किया है। Jawaharlal Nehru का Constitution of India (भारत के संविधान) के निर्माण में भी महत्वपूर्ण स्थान है। आजादी के बाद भारत की Foreign Policy निर्धारित करने में नेहरू का ही योगदान प्रमुख है। 1947 में लाल किले पर सबसे पहली बार नेहरू ने ही भारत का राष्ट्रीय झण्डा तिरंगा फहराया था।

जवाहर लाल नेहरू की प्रारम्भिक जीवन और शिक्षा

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवम्बर 1889 इसवीं में प्रयागराज (इलाहाबाद) में हुआ था। इनका परिवार कश्मीरी ब्राह्मण परिवार था जो अपनी शैक्षिक और प्रशासनिक योग्यता के लिए प्रसिद्ध था। इनके पूर्वज कश्मीर से 18वीं शताब्दी में दिल्ली चले आए थे। जवाहरलाल नेहरू के पिता श्री मोतीलाल नेहरू भी एक प्रसिद्ध वकील थे जिंहोने भारत के Freedom Struggle (स्वतन्त्रता संग्राम) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्हें Mahatma Gandhi का सहयोगी और करीबी माना जाता है। Motilal Nehru के चार बच्चों में जवाहरलाल सबसे बड़े थे। इनकी दो बहनें थीं। इनकी एक बहन विजया लक्ष्मी पंडित को संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त है। नेहरू की माता स्वरूपरानी थीं। जवाहरलाल नेहरू के दादा श्री Gangadhar Pandit (गंगाधर पंडित) दिल्ली के आखिरी Kotwal (कोतवाल) थे।

सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री के पद पर रहने का श्रेय भी जवाहर लाल नेहरू को ही प्राप्त है जो 1947 में भारत की आजादी से लेकर 1964 में अपनी मृत्यु तक इस पद पर बने रहे। Jawaharlal Nehru का बच्चों से बहुत लगाव था जिसके चलते नेहरू जी के जन्मदिन 14 November को हर साल Children’s Day (बाल दिवस) के रूप में मनाया जाता है।

जवाहरलाल नेहरू ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा प्रयागराज (इलाहाबाद) में घर पर ही प्राप्त की थी। 15 वर्ष की उम्र में उन्हे शिक्षा के लिए England (इंग्लैंड) भेजा गया। इंग्लैंड के हैरो स्कूल में दो वर्ष के अध्ययन के बाद नेहरू ने Cambridge University (कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी) में दाखिला लिया, जहाँ उन्होंने Natural Sciences में अपना Tripos का अध्ययन पूरा किया। इंग्लैंड में ही उन्होने अपनी वकालत की पढ़ाई भी पूरी की। 26 वर्ष की उम्र में मार्च 1916 में नेहरू का विवाह कमला कौल के साथ हुआ था जो उनसे 10 वर्ष छोटी थीं। उनकी एकमात्र संतान Indira Priyadarshini (इन्दिरा प्रियदर्शिनी- बाद में इन्दिरा गांधी) का जन्म 1917 में हुआ था।

1912 में अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद जवाहलराल नेहरू भारत लौट आए और भारत की राजनीति में एक प्रबल चेहरा बन गए। न केवल भारत बल्कि नेहरू ने समकालीन सभी राष्ट्रों, जो Colonialism (उपनिवेशवाद) की जकड़ में थे, की Freedom Struggle में दिलचस्पी दिखाई थी। उदाहरण के लिए नेहरू ने Ireland (आयरलैंड) में सिन फ़ेन आंदोलन में गहरी दिलचस्पी ली थी। 1919-1922 के Kisan Sabha (किसान सभा) आंदोलनों में जवाहरलाल नेहरू का योगदान उल्लेखनीय है।

नेहरू का राजनीति में प्रवेश

Indian National Congress (भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस) के सालाना होने वाले अधिवेशनों में नेहरू ने पहली बार 1912 की पटना के बांकीपुर कांग्रेस अधिवेशन में भाग लिया था। यह कॉंग्रेस का 28वां अधिवेशन था। भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में अपने बढ़ते प्रभाव के कारण जवाहरलाल नेहरू को 1919 में होम रूल लीग, इलाहाबाद का सचिव नियुक्त किया गया।

महात्मा गांधी के साथ जवाहरलाल नेहरू की प्रथम भेंट Indian National Congress (INC) के 1916 में हुए  Lucknow (लखनऊ) वार्षिक अधिवेशन के दौरान हुई थी। महात्मा गांधी के साथ हुई इस मुलाकात से Jawaharlal Nehru बहुत प्रभावित हुए थे। जवाहरलाल नेहरू महात्मा गांधी के व्यक्तित्व से इतने Inspired (प्रेरित) हुए कि वे Gandhi Ji के नेतृत्व को हमेशा स्वीकार करते रहे। महात्मा गांधी और Jawaharlal Nehru के संयुक्त प्रयास ने भारतीय जन मानस में आजादी के लिए होने वाले आंदोलनों में शामिल होने के लिए प्रेरणा दी।

जवाहरलाल नेहरू ने सबसे पहली बार किसान सभा आंदोलन में 1920 में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में पहला किसान मार्च आयोजित किया था। भारत के स्वतन्त्रता संग्राम में Non Cooperation Movement (असहयोग आंदोलन) की महत्वपूर्ण भूमिका है। असहयोग आंदोलन में भी Jawaharlal Nehru ने बहुत उत्साह के साथ लोगों को इसमें भाग लेने के लिए प्रेरित किया था। इस आंदोलन के दौरान नेहरू को 1920-1922 के वर्षों में दो बार जेल भी जाना पड़ा।

काँग्रेस में अपने बढ़ते प्रभाव और लोगों को प्रेरित करने की क्षमता के कारण नेहरू पहली बार सितंबर 1923 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव बने। यूरोप और अन्य देशों में होने वाले Political events (राजनीतिक घटनाचक्र) को समझने और International Politics (अंतराष्ट्रीय राजनीति) में होने वाले बदलाव तथा परतंत्रता से आजादी के लिए संघर्ष करने वाले देशों के संघर्ष को समझने के लिए जवाहरलाल नेहरू ने 1926 में इटली, स्विटज़रलैंड, इंग्लैंड, बेल्जियम, जर्मनी और रूस का दौरा किया। बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में जवाहरलाल नेहरू ने पीड़ित राष्ट्रों की काँग्रेस में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के आधिकारित प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था। इसके अलावा उन्होंने 1927 में रूस के मास्को में सम्पन्न हुए अक्टूबर समाजवादी क्रांति की दसवीं वर्षगांठ समारोह में भी भाग लिया। 1926 में हुए मद्रास काँग्रेस अधिवेशन में काँग्रेस द्वारा स्वतन्त्रता के लक्ष्य को आत्मसात करने में नेहरू की अहम भूमिका थी। भारत में आए श्वेत साइमन कमिशन  का पूरे देश में व्यापक विरोध हुआ था। 1928 में इसी साइमन कमिशन का विरोध करने के प्रदर्शन में नेहरू और अन्य नेताओं पर लाठ-चार्ज भी हुआ था।

1928 में जवाहरलाल नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरू और अन्य के द्वारा तैयार की गयी नेहरू रिपोर्ट जो भारतीय संवैधानिक सुधार पर बनाई गयी थी पर हस्ताक्षर करने वालों में जवाहरलाल भी एक थे।

1928 में ही नेहरू ने Independence For India League (इंडिपेंडेंस फ़ॉर इंडिया लीग) की भी स्थापना की जिसने भारत की जनता पर अंग्रेजों द्वारा किए जा रहे अत्याचार के कारण India के साथ British Relations (सम्बन्धों) के पूर्ण Separation की वकालत की। जवाहरलाल नेहरू Independence For India League के General Secretary (महासचिव) भी बने।

जवाहरलाल नेहरू को स्वतन्त्रता संग्राम में अपनाए गए दृष्टिकोण के कारण पहली बार 1929 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लाहौर सत्र का अध्यक्ष चुना गया था। 1929 के Congress Session (काँग्रेस अधिवेशन) में ही सबसे पहली बार Complete Independence (पूर्ण स्वतन्त्रता) को काँग्रेस का लक्ष्य बनाया गया। ऐसे में पूरे देश में पूर्ण स्वतन्त्रता के लिए एक नए जोश के साथ आगे बढ़ने की जरूरत थी जिसमें नेहरू ने गांधी के साथ मिलकर नेतृत्व किया। 1930-1935 के काल में भारत में कई आंदोलन हुए जिसमें नमक सत्याग्रह प्रमुख था। इन आन्दोलनों में Jawaharlal Nehru ने एक सशक्त भूमिका निभाई और युवाओं को India की आजादी के लिए मर मिटने की प्रेरणा दी। इस काल में उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। उन्होंने 14 फरवरी, 1935 को अल्मोड़ा की जेल में ही अपनी Biography (‘आत्मकथा’) पुस्तक पूरी की।

जेल से रिहाई के बाद, नेहरू अपनी बीमार पत्नी को देखने के लिए स्विट्जरलैंड गए तथा फरवरी-मार्च, 1936 में लंदन का भी भ्रमण किया। गृहयुद्ध की चपेट में आए स्पेन का भी उन्होने जुलाई 1938 में दौरा किया। जवाहरलाल नेहरू ने द्वितीय विश्व युद्ध के आरंभ होने से ठीक पहले चीन का भी दौरा किया। विश्व के अनेक देशों के दौरों से Jawaharlal Nehru को एक Global Perspective (वैश्विक समझ) विकसित करने में बहुत सहायता मिली।

जवाहरलाल नेहरू का दृष्टिकोण Socialism (समाजवाद) की तरफ था। इसी के चलते नेहरू ने भारत में एक समाजवादी व्यवस्था (Socialistic Pattern) लागू करने का प्रयत्न किया। किन्तु नेहरू का समाजवाद रूस और अन्य समाजवादी देशों के समाजवाद से भिन्न था। नेहरू ने Socialism (समाजवाद) की एक मिली-जुली व्यवस्था लागू करने का प्रयत्न किया जिसमें उद्यमों और सेवाओं का उतना ही राष्ट्रीयकरण किया गया जितना की Indian Economy (भारतीय अर्थव्यवस्था) और Indian Society के लिए उपयोगी था।

ब्रिटेन ने 1940 में भारत को जबरन अपने युद्ध में शामिल कर लिया जिसके चलते भारत की सेना को अंग्रेजों की तरफ से लड़ना पड़ा। इसके विरोध में व्यक्तिगत सत्याग्रह की पेशकश करने के कारण नेहरू को 31 अक्टूबर, 1940 के दिन गिरफ्तार किया गया था। दबाव के कारण 31 अक्टूबर, 1940 को अन्य नेताओं के साथ जवाहरलाल नेहरू को भी जेल से रिहा कर दिया गया।

7 अगस्त, 1942 को पं नेहरू ने मुंबई के ऐतिहासिक काँग्रेस अधिवेशन में भारत छोड़ो प्रस्ताव को पारित किया। इसके अगले ही दिन 8 अगस्त, 1942 को नेहरू को अन्य राष्ट्रीय नेताओं के साथ गिरफ्तार कर के Ahmednagar Fort (अहमदनगर किले) में भेज दिया गया। यह Jawaharlal Nehru की सबसे लंबी और आखिरी नजरबंदी थी। India के स्वतन्त्रता संग्राम में नेहरू को कुल मिलाकर 9 बार जेल जाना पड़ा। जनवरी 1945 में अपनी रिहाई के बाद नेहरू ने भारतीय नौ सेना INA के लोगों पर राजद्रोह के आरोप के खिलाफ कानूनी बचाव किया।

जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रधानमंत्री : 1947-1964

1947 में भारत की आजादी के बाद नेहरू भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने। 15 अगस्त 1947 को सुबह 8:30 बजे   लॉर्ड माउंटबेटन ने जवाहरलाल नेहरू को भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई थी। किन्तु 1947 से लेकर 1964 में नेहरू की मृत्यु तक कश्मीर का विवाद नेहरू के लिए समस्या बना रहा। Jawaharlal Nehru के द्वारा दिये गए Slogan (नारे) “हिन्दू-चीनी भाई भाई” को भी गहरा धक्का लगा जब 1962 में China ने Boundary Issues  (सीमा विवाद) के चलते भारत पर आक्रमण कर दिया। जवाहरलाल नेहरू की सेहत भारत चीन के युद्ध के बाद बिगड़ने लगी थी जिसके कारण उन्हे 1963 में पहली बार दिल का दौरा पड़ा। लेकिन मई 27 1964 में तीसरी बार Heart Attack के कारण जवाहरलाल नेहरू का निधन हो गया। नेहरू ने India की Economy को आधुनिक बनाने का हर संभव प्रयत्न किया।

Prime Minister के पद पर अपने 17 Years के कार्यकाल के दौरान नेहरू ने भारत में Democratic socialism  (लोकतांत्रिक समाजवाद) को अपनाने का प्रयत्न किया। नेहरू के विचारों में Democracy और Socialism (समाजवाद) दोनों भारत के लिए अनिवार्य थे। नेहरू को 11 बार Noble Peace Prize (शांति के नोबल पुरस्कार) के लिए Nominate (नामांकित) किया गया किन्तु दुर्भाग्यवश उन्हे यह प्रदान नहीं किया गया। जवाहरलाल नेहरू अंतर्राष्ट्रीय मंच पर तटस्थ भूमिका में थे। वे Non-Aligned Movement की स्थापना करने वाले लोगों में से एक थे।

नेहरू द्वारा लिखी गईं पुस्तकें

India के Freedom Struggle में अहम भूमिका निभाने वाले जवाहरलाल नेहरू एक प्रसिद्ध Writer (लेखक) भी थे जिंहोने अँग्रेजी भाषा में कई Books लिखी हैं। उनकी द्वारा लिखी गयी पुस्तकों में डिस्कवरी ऑफ इंडिया, विश्व इतिहास की झलकियाँ, एक पिता के अपनी बेटी को पत्र, एक आत्मकथा: टूवर्ड फ्रीडम, महात्मा गांधी, स्वतंत्रता के शब्द: एक राष्ट्र के विचार इत्यादि प्रमुख हैं। जवाहरलाल नेहरू के द्वारा दी गईं Speeches (भाषणों) और लिखे गए Letters का संकलन भी प्रकाशित हो चुका है।

समाधि-स्थल :- शांतिवन राजघाट के उत्तर में जवाहरलाल की समाधि स्थित है। इसे शांतिवन के नाम से जाना जाता है।

1955 भारत रत्न :- देश के सामाजिक जीवन में दिये गए योगदान के लिए जवाहरलाल नेहरू को 1955 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

तीन मूर्ति भवन :- प्रधानमंत्री के रूप में जवाहरलाल नेहरू का आधिकारिक आवास तीन मूर्ति भवन था। वर्तमान में इसे संग्रहालय बना दिया गया है।

अनुच्छेद 44 :- भारतीय संविधान के Article 44 (अनुच्छेद 44) को तैयार करने में नेहरू की प्रमुख भूमिका थी। यह अनुच्छेद भारतीय संविधान के Directives Principles of State Policy (राज्य के नीति निर्देशक तत्वों) में सम्मिलित है। यह अनुच्छेद भारत के सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता (Uniform civil code) लागू करने के विषय में है।

2 Comments

  1. Chand babu March 2, 2019
    • Arvind Patel March 3, 2019

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